उत्तर प्रदेश के नोएडा में क्रिप्टोकरेंसी निवेश के नाम पर हुई 11.49 लाख रुपये की ठगी ने एक बार फिर डिजिटल निवेश से जुड़े बढ़ते साइबर अपराधों की गंभीरता को उजागर किया है। थाना सेक्टर-20 पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने एक कारोबारी को बाजार मूल्य से कम कीमत पर क्रिप्टोकरेंसी उपलब्ध कराने और कम समय में अधिक मुनाफा दिलाने का लालच देकर अपने जाल में फंसाया। यह मामला केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि डिजिटल वित्तीय जागरूकता की कमी और तेजी से बदलते निवेश परिदृश्य में बढ़ते साइबर जोखिमों का भी संकेत है।
योजनाबद्ध तरीके से दिया गया वारदात को अंजाम
पीड़ित कारोबारी को आरोपियों ने विश्वास में लेकर सेक्टर-20 क्षेत्र में बुलाया, जहां एक लग्जरी कार में सवार चार लोगों ने उससे संपर्क किया। आरोपियों ने नकद 11 लाख 49 हजार रुपये लेकर डिजिटल वॉलेट में क्रिप्टोकरेंसी ट्रांसफर करने का भरोसा दिलाया।
पुलिस जांच में सामने आया कि नकदी प्राप्त करने के बाद आरोपियों ने कारोबारी से उसके क्रिप्टो वॉलेट से संबंधित संवेदनशील जानकारी और पासवर्ड भी हासिल करने का प्रयास किया। इसके बाद आरोपी मौके से फरार हो गए।
जब काफी समय तक कारोबारी के वॉलेट में कोई क्रिप्टोकरेंसी प्राप्त नहीं हुई, तब उसे अपने साथ हुई ठगी का एहसास हुआ और उसने तत्काल पुलिस से शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई, दो आरोपी गिरफ्तार
थाना सेक्टर-20 पुलिस ने स्थानीय खुफिया तंत्र, सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों की सहायता से मामले की जांच शुरू की। कार्रवाई के दौरान सेक्टर-27 स्थित कैम्ब्रिज स्कूल के पास सर्विस रोड से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 22 वर्षीय उमेर खान और 22 वर्षीय अनुराग पारासरी के रूप में हुई है। दोनों स्नातक शिक्षित हैं, जो यह दर्शाता है कि साइबर अपराधों में अब तकनीकी समझ रखने वाले युवा भी शामिल हो रहे हैं।
पुलिस के अनुसार, इस मामले में कुल चार लोगों की संलिप्तता सामने आई है और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।
आरोपियों के कब्जे से बरामद सामान
पुलिस ने आरोपियों के पास से निम्नलिखित सामान बरामद किया है—
11,49,500 रुपये नकद
पंजाब नेशनल बैंक की चेकबुक
एक डेबिट कार्ड
एक आधार कार्ड
इस संबंध में थाना सेक्टर-20 में मु0अ0सं0 233/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 303(2) और 317(2) के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है।
क्रिप्टो निवेश के नाम पर बढ़ रही संगठित ठगी
विशेषज्ञों के अनुसार, क्रिप्टोकरेंसी की बढ़ती लोकप्रियता के साथ उससे जुड़ी धोखाधड़ी के मामलों में भी तेजी से वृद्धि हुई है। अपराधी निवेशकों को “कम कीमत”, “गारंटीड रिटर्न” और “कम समय में दोगुना लाभ” जैसे प्रलोभन देकर अपने जाल में फंसाते हैं।
अधिकांश मामलों में अपराधी नकद लेन-देन, निजी वॉलेट ट्रांसफर और अनधिकृत प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं, जिससे पीड़ित के लिए अपनी राशि वापस पाना कठिन हो जाता है।
धोखाधड़ी के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस—
क्रिप्टो करेन्सी दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले 02 अभियुक्तों को @noidapolice द्वारा गिरफ्तार किया गया है।
अभियुक्तों के कब्जे से ₹11 लाख 49 हजार 500/- नकद, चेकबुक एवं डेबिट कार्ड बरामद किया गया है।#UPPAgainstCrime #GoodWorkUPP pic.twitter.com/1v5quaILvc
— UP POLICE (@Uppolice) June 20, 2026
यह मामला क्यों है चिंताजनक?
इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं—
क्या लोग बिना सत्यापन के डिजिटल निवेश प्रस्तावों पर भरोसा कर रहे हैं?
क्या क्रिप्टो निवेश को लेकर पर्याप्त वित्तीय जागरूकता का अभाव है?
क्या नकद लेन-देन और निजी वॉलेट के उपयोग से साइबर अपराधियों को बढ़ावा मिल रहा है?
क्या निवेशकों को डिजिटल सुरक्षा और साइबर जोखिमों के प्रति पर्याप्त प्रशिक्षण मिल रहा है?
क्रिप्टो निवेश करते समय बरतें ये सावधानियां
विशेषज्ञों और पुलिस ने नागरिकों को निम्नलिखित सावधानियां अपनाने की सलाह दी है—
केवल अधिकृत और विश्वसनीय क्रिप्टो एक्सचेंज प्लेटफॉर्म का ही उपयोग करें।
किसी भी अनजान व्यक्ति को नकद राशि न दें।
अपने डिजिटल वॉलेट की निजी कुंजी (Private Key), ओटीपी, पासवर्ड या रिकवरी फ्रेज किसी के साथ साझा न करें।
“गारंटीड मुनाफा” या बाजार मूल्य से कम कीमत के दावों से सतर्क रहें।
निवेश से पहले संबंधित संस्था और व्यक्ति की विश्वसनीयता की स्वतंत्र रूप से जांच करें।
किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
डिजिटल अर्थव्यवस्था के साथ डिजिटल सतर्कता भी आवश्यक
भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में निवेश के नए अवसरों के साथ नए प्रकार के आर्थिक अपराध भी सामने आ रहे हैं। नोएडा की यह घटना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि तकनीकी प्रगति के साथ नागरिकों में साइबर जागरूकता और वित्तीय साक्षरता बढ़ाना भी उतना ही आवश्यक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल निवेश के क्षेत्र में पारदर्शिता, नियामकीय समझ और व्यक्तिगत सतर्कता ही ऐसी ठगी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।














