“देश के सबसे बड़े धार्मिक केंद्र में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच तेज”
अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दानपात्रों से नकदी गायब होने के कथित मामले ने देशभर में करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं को झकझोर दिया है। विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए तथ्य और गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं।
हालांकि अब तक गायब हुई धनराशि का कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया गया है, लेकिन जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि कथित अनियमितताओं का दायरा करोड़ों रुपये तक पहुंच सकता है। फिलहाल एसआईटी रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, बैंक जमा विवरण और कर्मचारियों के बयानों का मिलान कर वास्तविक स्थिति का पता लगाने में जुटी है।
सबसे बड़ा सवाल: आखिर कितनी राशि गायब हुई?
पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील पहलू यही है कि दानपात्रों से वास्तविक रूप से कितनी धनराशि गायब हुई।
जांच एजेंसियां निम्न बिंदुओं का मिलान कर रही हैं—
दानपात्रों से प्राप्त नकदी का दैनिक रिकॉर्ड
नकदी गणना रजिस्टर और उपस्थिति विवरण
बैंक खातों में जमा की गई वास्तविक राशि
सीसीटीवी फुटेज और सुरक्षा रिकॉर्ड
कर्मचारियों और जिम्मेदार अधिकारियों के बयान
अधिकारियों का मानना है कि इन सभी दस्तावेजों और साक्ष्यों के सत्यापन के बाद ही वास्तविक वित्तीय नुकसान का सटीक आकलन संभव हो सकेगा।
प्राण प्रतिष्ठा के बाद बढ़ी दानराशि, बढ़ा कथित गड़बड़ी का दायरा
सूत्रों के अनुसार, दानपात्रों से नकदी निकालने का कथित सिलसिला रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से पहले ही शुरू हो चुका था। लेकिन 22 जनवरी 2024 को प्राण प्रतिष्ठा के बाद श्रद्धालुओं की संख्या और दानराशि में अभूतपूर्व वृद्धि हुई, जिससे कथित अनियमितताओं का दायरा भी बढ़ गया।
जांच में यह दावा किया जा रहा है कि शुरुआती दौर में प्रतिदिन दो से चार लाख रुपये तक की नकदी कथित रूप से निकाली जाती थी, जबकि बाद में यह राशि कई गुना बढ़ गई।
हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
जांच के केंद्र में अनुकल्प मिश्रा
एसआईटी की जांच में मिल्कीपुर निवासी अनुकल्प मिश्रा का नाम प्रमुखता से सामने आया है।
सूत्रों के अनुसार, एक ट्रस्टी की अनुशंसा पर उन्हें मंदिर से जुड़े कार्यों में नियुक्त किया गया था और बाद में दानराशि की गणना की जिम्मेदारी सौंपी गई। जांच एजेंसियों को संदेह है कि उन्होंने कथित तौर पर अपने रिश्तेदारों और परिचितों का एक नेटवर्क तैयार किया, जिसके माध्यम से दानराशि में हेराफेरी की गई।
जांच में यह भी सामने आया है कि लगभग आठ महीने पहले उनके बहनोई लवकुश मिश्रा को भी गणना कार्य से जोड़ा गया था।
कथित तौर पर कैसे अंजाम दिया जाता था पूरा नेटवर्क?
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, दानपात्रों से निकाली गई नकदी को पहले यात्री सुविधा केंद्र (पीएफसी) के बाथरूम में छिपाया जाता था। बाद में सुरक्षा जांच से बचाते हुए उसे परिसर से बाहर ले जाया जाता था और कथित रूप से कौशलपुरी स्थित एक ठिकाने तक पहुंचाया जाता था।
एसआईटी इस बात की जांच कर रही है कि—
सुरक्षा व्यवस्था में चूक कहां हुई?
गणना कर्मियों की निगरानी क्यों नहीं की गई?
परिसर से बाहर निकलते समय तलाशी की व्यवस्था क्यों नहीं थी?
क्या इसमें एक से अधिक स्तरों पर मिलीभगत शामिल थी?
नियुक्तियों और निगरानी प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू कर्मचारियों की नियुक्ति और उनकी ड्यूटी निर्धारण प्रक्रिया है।
सूत्रों के अनुसार, मंदिर व्यवस्था से जुड़े रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव ने पूछताछ में दावा किया है कि अनुकल्प मिश्रा और उनके कुछ परिचितों की नियुक्ति ट्रस्टी डॉ. अनिल कुमार मिश्र की अनुशंसा पर हुई थी।
आरोप यह भी है कि गणना कार्य से जुड़े कर्मचारियों की तैनाती और निगरानी की जिम्मेदारी भी संबंधित अधिकारियों के पास थी।
हालांकि, इन आरोपों की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और एसआईटी सभी दावों का स्वतंत्र सत्यापन कर रही है।
जांच के दायरे में कई जिम्मेदार अधिकारी
एसआईटी ने पिछले तीन दिनों में कई कर्मचारियों और जिम्मेदार अधिकारियों से पूछताछ की है।
जांच के घेरे में आने वाले प्रमुख नामों में शामिल हैं—
रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव
मनीष यादव
राजेश पाठक
सेवानिवृत्त बैंककर्मी सुभाष श्रीवास्तव
सुभाष श्रीवास्तव पर दानराशि की गणना के बाद उसे बैंक में जमा कराने की जिम्मेदारी थी। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि रिकॉर्ड और बैंक जमा राशि में कहीं कोई विसंगति तो नहीं है।
यह मामला केवल धनराशि का नहीं, भरोसे का भी है
राम मंदिर देश की करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में दानपात्रों से जुड़ी कथित अनियमितताओं ने केवल वित्तीय पारदर्शिता ही नहीं, बल्कि संस्थागत जवाबदेही और निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकरण ने धार्मिक संस्थानों में वित्तीय प्रबंधन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों को सामने ला दिया है—
दानराशि के संग्रह और गणना की पारदर्शी व्यवस्था
स्वतंत्र ऑडिट प्रणाली की आवश्यकता
डिजिटल निगरानी और बहुस्तरीय सुरक्षा तंत्र
कर्मचारियों की नियुक्ति और सत्यापन प्रक्रिया
जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण
आगे क्या?
एसआईटी की जांच अब उन सभी कड़ियों को जोड़ने पर केंद्रित है, जिनसे यह स्पष्ट हो सके कि कथित अनियमितताएं कब से चल रही थीं, इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और दानपात्रों से वास्तविक रूप से कितनी राशि गायब हुई।
जांच पूरी होने और आधिकारिक रिपोर्ट सामने आने के बाद ही इस पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
तब तक यह मामला देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता, जवाबदेही और वित्तीय निगरानी की व्यवस्था को लेकर एक बड़ी परीक्षा बना हुआ है।














