गाजियाबाद कमिश्नरेट के मसूरी थाना क्षेत्र में बुधवार को प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कथित रूप से अवैध रूप से निर्मित एक मदरसे को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया। प्रशासन का दावा है कि मदरसा ग्राम सभा की सरकारी बंजर भूमि पर अवैध कब्जा करके बनाया गया था। करीब दो घंटे तक चली कार्रवाई में पांच बुलडोजर लगाए गए और भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पूरे निर्माण को गिरा दिया गया।
कार्रवाई से पहले अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था
प्रशासन को आशंका थी कि कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसी कारण सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। मौके पर तीन प्लाटून RAF, दो कंपनी PAC, लगभग 800 पुलिसकर्मी, आठ थाना प्रभारी और अन्य सुरक्षा बलों को तैनात किया गया। कई पुलिसकर्मी एंटी-रायट उपकरणों से लैस थे। यह सुरक्षा व्यवस्था दर्शाती है कि प्रशासन इस कार्रवाई को बेहद संवेदनशील मान रहा था।
कौन-सा मदरसा था निशाने पर?
प्रशासन के अनुसार, मसूरी क्षेत्र के कल्लूगढ़ी इलाके में स्थित “मदरसा जामिया अरबिया इशातुल इस्लाम” ग्राम सभा की भूमि पर बनाया गया था। आरोप है कि वर्ष 2021 में मदरसा संचालक फारूक ने सरकारी जमीन पर कब्जा कर निर्माण कराया। अधिकारियों का कहना है कि यह भूमि सरकारी बंजर भूमि के रूप में दर्ज है और लगभग 12 बीघा क्षेत्र में अवैध कब्जा किया गया था।
24 करोड़ की सरकारी जमीन पर कब्जे का दावा
राजस्व विभाग के अनुसार, जिस भूमि को कब्जामुक्त कराया गया है उसकी अनुमानित कीमत करीब 24 करोड़ रुपये है। यदि यह दावा सही पाया जाता है तो यह मामला केवल अवैध निर्माण का नहीं बल्कि सरकारी संपत्ति पर बड़े पैमाने के अतिक्रमण का भी बन जाता है।
कानूनी कार्रवाई और भारी जुर्माना
प्रशासन ने मदरसा संचालक फारूक पर 1.23 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही लेखपाल अनुपम मिश्रा की शिकायत पर मसूरी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि भूमि कब्जे, निर्माण की वैधता और अन्य संभावित अनियमितताओं की जांच की जा रही है।
फंडिंग की जांच बना सबसे बड़ा सवाल
इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू अब फंडिंग की जांच है। पुलिस और प्रशासन यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि मदरसे के निर्माण और संचालन के लिए धन कहां से आया। जांच एजेंसियां यह भी देख सकती हैं कि कहीं धनराशि का स्रोत संदिग्ध तो नहीं था और क्या निर्माण के लिए आवश्यक सरकारी अनुमति प्राप्त की गई थी या नहीं।
सूर्या चौहान हत्याकांड के बाद तेज हुई कार्रवाई
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब एक दिन पहले खोड़ा क्षेत्र में तीन मदरसों को सील किया गया था। यह घटनाक्रम सूर्या चौहान हत्याकांड के बाद सामने आया है। हालांकि हत्या का आरोपी असद पुलिस एनकाउंटर में मारा जा चुका है, लेकिन घटना के बाद प्रशासन ने क्षेत्र में अवैध निर्माणों और संस्थानों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है।
उठ रहे बड़े सवाल
यदि भूमि पर 2021 से कब्जा था तो प्रशासन ने पहले कार्रवाई क्यों नहीं की?
क्या स्थानीय स्तर पर किसी अधिकारी की लापरवाही या मिलीभगत थी?
मदरसे के निर्माण के लिए धन कहां से आया?
क्या अन्य सरकारी भूमि पर भी इसी प्रकार के कब्जे मौजूद हैं?
क्या प्रदेशभर में ऐसे संस्थानों का सत्यापन किया जाएगा?
प्रशासन का संदेश
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा करने वालों और भू-माफियाओं के खिलाफ अभियान जारी रहेगा। प्रशासन का कहना है कि चाहे कोई भी व्यक्ति या संस्था हो, नियमों के विरुद्ध किए गए निर्माणों पर कार्रवाई की जाएगी।
गाजियाबाद की यह कार्रवाई केवल एक अवैध निर्माण हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकारी जमीनों पर कब्जे, प्रशासनिक जवाबदेही, अवैध फंडिंग की जांच और कानून के शासन को लेकर एक बड़ी बहस को भी जन्म देती है। आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष इस पूरे मामले की दिशा तय करेंगे।














