लखनऊ। उत्तर प्रदेश में किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना और उन्हें बिचौलियों के शोषण से मुक्त कराना योगी सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में फसलों की सरकारी खरीद व्यवस्था को तकनीक आधारित, पारदर्शी और किसान-केंद्रित बनाया गया है। इसका परिणाम यह है कि लाखों किसानों को सीधे न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ मिला है और उनकी आय में स्थिरता आई है।
प्रदेश सरकार ने खरीद प्रक्रिया को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़कर भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजने की व्यवस्था की है। इससे न केवल भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर अंकुश लगा है, बल्कि किसानों का सरकारी व्यवस्था पर भरोसा भी मजबूत हुआ है।
51 लाख से अधिक गेहूं किसानों को मिला सीधा लाभ
रबी विपणन वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक राज्य में संचालित गेहूं खरीद अभियान के तहत 51,70,117 किसानों से गेहूं खरीदा गया। इसके बदले किसानों को 45,935.46 करोड़ रुपये का भुगतान सीधे उनके खातों में किया गया। प्रदेशभर में 5,837 गेहूं क्रय केंद्रों की स्थापना कर यह सुनिश्चित किया गया कि किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े और उन्हें समय पर भुगतान प्राप्त हो।
धान खरीद में बना नया रिकॉर्ड, 80 लाख से अधिक किसान लाभान्वित
प्रदेश सरकार की खरीद नीति का सबसे बड़ा प्रभाव धान उत्पादक किसानों पर देखने को मिला है। वर्ष 2017-18 से 2025-26 के दौरान 80,39,539 किसानों को धान खरीद योजना का लाभ मिला। सरकार ने किसानों से धान खरीदकर उनके खातों में 1,03,694.71 करोड़ रुपये का भुगतान किया। यह आंकड़ा दर्शाता है कि सरकारी खरीद प्रणाली केवल कागजी व्यवस्था नहीं रही, बल्कि किसानों की आर्थिक मजबूती का प्रभावी माध्यम बनी है।
मोटे अनाजों को बढ़ावा, पोषण और किसानों दोनों को लाभ
योगी सरकार ने केवल गेहूं और धान तक अपनी नीति सीमित नहीं रखी, बल्कि श्रीअन्न (मिलेट्स) को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
ज्वार खरीद के माध्यम से 26,972 किसानों को लाभ मिला और उन्हें 363.35 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।
बाजरा खरीद के तहत 1,48,718 किसानों को 1,854 करोड़ रुपये की राशि दी गई।
यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक है, बल्कि पोषण सुरक्षा, जल संरक्षण और जलवायु अनुकूल खेती को भी प्रोत्साहित कर रही है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिली नई ताकत
विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों के खातों में सीधे पहुंची लाखों करोड़ रुपये की राशि ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है। जब किसान को समय पर भुगतान मिलता है तो वह कृषि निवेश, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय बाजारों में खर्च बढ़ाता है, जिससे गांवों की आर्थिक गतिविधियां तेज होती हैं।
पारदर्शिता और तकनीक से बदली खरीद व्यवस्था
पहले जहां किसानों को फसल बेचने के लिए बिचौलियों और आढ़तियों पर निर्भर रहना पड़ता था, वहीं अब ऑनलाइन पंजीकरण, डिजिटल सत्यापन और डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से भुगतान ने पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाया है। इससे फर्जीवाड़े की संभावनाएं कम हुई हैं और वास्तविक किसानों तक लाभ पहुंचा है।
खाद्य सुरक्षा और किसान कल्याण का दोहरा लक्ष्य
खाद्य एवं रसद विभाग की यह व्यवस्था केवल किसानों की आय बढ़ाने तक सीमित नहीं है। सरकारी खरीद के माध्यम से सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के लिए पर्याप्त खाद्यान्न उपलब्ध होता है, जिससे करोड़ों गरीब परिवारों को सस्ती दरों पर अनाज उपलब्ध कराया जा रहा है। इस प्रकार यह नीति किसान कल्याण और खाद्य सुरक्षा—दोनों लक्ष्यों को एक साथ पूरा कर रही है।
बढ़ा किसानों का विश्वास, मजबूत हुआ कृषि तंत्र
फसलों की रिकॉर्ड खरीद, समयबद्ध भुगतान, खरीद केंद्रों का विस्तार और तकनीक आधारित पारदर्शी व्यवस्था ने यह सिद्ध किया है कि उत्तर प्रदेश में कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए सुनियोजित प्रयास किए गए हैं। आंकड़े बताते हैं कि योगी सरकार की नीतियों ने किसानों के विश्वास को मजबूत किया है और कृषि को प्रदेश की आर्थिक प्रगति का महत्वपूर्ण आधार बनाया है। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने की यह व्यवस्था आने वाले वर्षों में ग्रामीण समृद्धि और आत्मनिर्भर कृषि अर्थव्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।














