“रिमोट एक्सेस, स्क्रीन शेयरिंग और प्रॉक्सी सर्वर के जरिए चल रहा था भर्ती परीक्षा में धांधली का नेटवर्क; STF ने 7 आरोपियों को दबोचा”
ग्रेटर नोएडा: उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क इलाके में बड़ी कार्रवाई करते हुए ऑनलाइन भर्ती परीक्षाओं में धांधली कराने वाले एक संगठित हाईटेक परीक्षा माफिया गिरोह का भंडाफोड़ किया है। STF ने मौके से 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो कथित तौर पर SSC की ऑनलाइन भर्ती परीक्षाओं में अभ्यर्थियों को “फिक्स पास” कराने का नेटवर्क चला रहे थे।
जांच एजेंसियों के अनुसार, गिरोह आधुनिक तकनीक, रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर और प्रॉक्सी नेटवर्क की मदद से परीक्षा प्रणाली में सेंध लगाकर अभ्यर्थियों तक सीधे उत्तर पहुंचा रहा था।
SSC भर्ती परीक्षा के दौरान STF का छापा
जानकारी के मुताबिक STF ने यह कार्रवाई उस समय की, जब SSC कांस्टेबल (GD), CPO और असम राइफल्स भर्ती परीक्षा-2026 की ऑनलाइन परीक्षा चल रही थी।
जांच में सामने आया कि गिरोह परीक्षा केंद्र के सिस्टम में तकनीकी छेड़छाड़ कर मूल सर्वर को बायपास कर देता था। इसके बाद बाहर बैठे सॉल्वर स्क्रीन शेयरिंग एप्लिकेशन के जरिए प्रश्नपत्र देखते और तुरंत उत्तर भेजते थे।
कैसे चलता था पूरा हाईटेक नेटवर्क?
STF के अनुसार, आरोपी परीक्षा केंद्र के कंप्यूटर सिस्टम में कथित रूप से प्रॉक्सी सर्वर और रिमोट तकनीक का इस्तेमाल करते थे।
इसके जरिए—
✔ परीक्षा का लाइव एक्सेस बाहर बैठे सॉल्वरों तक पहुंचाया जाता था
✔ स्क्रीन शेयरिंग से प्रश्नपत्र देखा जाता था
✔ तुरंत उत्तर अभ्यर्थियों तक भेजे जाते थे
✔ पूरी प्रक्रिया इतनी तकनीकी थी कि गड़बड़ी पकड़ना मुश्किल हो जाता था
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय हो सकता है।
‘फिक्स पास’ के लिए 4 लाख रुपये तक की डील
जांच में खुलासा हुआ है कि गिरोह अभ्यर्थियों से परीक्षा पास कराने के नाम पर करीब 4 लाख रुपये तक वसूलता था।
बताया जा रहा है कि—
कुछ रकम पहले एडवांस के रूप में ली जाती थी
बाकी पैसे परीक्षा के बाद बांटे जाते थे
नेटवर्क में तकनीकी टीम, सॉल्वर और संपर्क कराने वाले लोग शामिल थे
STF को शक है कि परीक्षा केंद्र से जुड़े कुछ लोग भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
कौन-कौन गिरफ्तार हुआ?
गिरफ्तार आरोपियों में— प्रदीप चौहान,अरुण कुमार,संदीप भाटी,नीरज राघव,अमित राणा,शाकिर मलिक,विवेक कुमार शामिल बताए जा रहे हैं।
जांच के अनुसार, कुछ आरोपी तकनीकी सेटअप संभालते थे, जबकि अन्य आर्थिक लेन-देन और अभ्यर्थियों से संपर्क कराने का काम करते थे।
50 लाख कैश, लैपटॉप और मोबाइल बरामद
STF ने छापेमारी के दौरान आरोपियों के पास से—
✔ करीब 50 लाख रुपये नकद
✔ 10 मोबाइल फोन
✔ 5 लैपटॉप
✔ कई अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड
✔ अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं।
इसके अलावा जांच एजेंसियां अब कुछ तकनीकी कर्मचारियों और परीक्षा संचालन से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही हैं।
भर्ती प्रक्रिया पर बड़ा सवाल
यह मामला केवल परीक्षा में नकल या तकनीकी धोखाधड़ी तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे युवाओं के भविष्य और भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़ा गंभीर अपराध माना जा रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि परीक्षा माफिया अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर हाईटेक और संगठित नेटवर्क के जरिए काम कर रहे हैं, जिससे भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता पर गंभीर खतरा पैदा हो रहा है।
अब जांच का अगला फोकस क्या?
STF अब यह पता लगाने में जुटी है कि—
यह गिरोह किन-किन अन्य परीक्षाओं में सक्रिय था
अब तक कितने अभ्यर्थियों को अवैध तरीके से पास कराया गया
नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं
क्या परीक्षा केंद्रों के अंदर से भी मदद मिल रही थी
STF की इस कार्रवाई के बाद भर्ती परीक्षा माफियाओं के खिलाफ और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।














