“26 लोगों की मौत वाले हमले में जांच एजेंसी का दावा — सिर्फ सीमा पार की साजिश नहीं, स्थानीय स्तर पर भी मिला था आतंकियों को समर्थन”
नई दिल्ली/श्रीनगर: पहलगाम आतंकी हमले की जांच में बड़ा और चिंताजनक खुलासा सामने आया है। जांच एजेंसी की चार्जशीट के अनुसार, हमले को अंजाम देने वाले आतंकियों को केवल सीमा पार से समर्थन नहीं मिला था, बल्कि स्थानीय स्तर पर भी कथित सहयोग और मदद उपलब्ध कराई गई थी। जांच में सामने आया है कि आतंकियों को सुरक्षित ठिकाने, भोजन, आवाजाही और सुरक्षा बलों की गतिविधियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी तक पहुंच दिलाने में कथित तौर पर स्थानीय नेटवर्क की भूमिका रही।
जांच एजेंसी के अनुसार, इस पूरे मामले में ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) नेटवर्क और कुछ स्थानीय सहयोगियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है। एजेंसी का दावा है कि आतंकियों को इलाके में टिके रहने और गतिविधियां संचालित करने के लिए लॉजिस्टिक और स्थानीय स्तर पर सहायता दी गई।
स्थानीय संपर्क और कथित मदद ने बढ़ाई चिंता
चार्जशीट के मुताबिक, दो स्थानीय गाइड — परवेज और बशीर — कथित रूप से आतंकियों के संपर्क में थे। जांच एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने इलाके की भौगोलिक जानकारी, सुरक्षित रास्तों और पनाह से जुड़ी मदद उपलब्ध कराने में भूमिका निभाई।
जांच एजेंसियों का मानना है कि आतंकवाद का नेटवर्क केवल हथियारों या घुसपैठ तक सीमित नहीं होता, बल्कि स्थानीय स्तर पर मिलने वाली मदद भी ऐसे हमलों को अंजाम देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
‘ओवर ग्राउंड नेटवर्क’ पर अब बड़ा फोकस
सुरक्षा एजेंसियां अब केवल हथियार उठाने वाले आतंकियों तक सीमित नहीं रहना चाहतीं। जांच का दायरा अब उन नेटवर्क तक भी बढ़ाया जा रहा है, जो कथित तौर पर आतंकियों को सूचना, संसाधन, पनाह या लॉजिस्टिक समर्थन उपलब्ध कराते हैं।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को प्रभावी बनाने के लिए ऐसे सहयोगी नेटवर्क की पहचान और कार्रवाई बेहद अहम है।
क्या समय रहते जानकारी मिलती तो टल सकता था हमला?
चार्जशीट के बाद एक बड़ा सवाल भी उठ रहा है — क्या स्थानीय स्तर पर संदिग्ध गतिविधियों की समय पर सूचना मिलती, तो निर्दोष लोगों की जान बचाई जा सकती थी?
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि स्थानीय जागरूकता, समय पर सूचना और नागरिक सहयोग आतंकवाद के खिलाफ सबसे प्रभावी सुरक्षा कवच साबित हो सकते हैं।
सुरक्षा के साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि आतंकवाद केवल हथियारों के दम पर नहीं, बल्कि वैचारिक समर्थन, स्थानीय मदद और गुप्त नेटवर्क के जरिए भी मजबूत होता है। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई के साथ-साथ सामाजिक सतर्कता भी जरूरी है।
हालांकि, विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट कर रहे हैं कि किसी भी संवेदनशील मामले में बिना तथ्य और जांच के किसी समुदाय या आम नागरिक को संदेह के आधार पर निशाना बनाना उचित नहीं है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई कानून, जांच, राष्ट्रीय एकता और जिम्मेदार सामाजिक व्यवहार के साथ ही प्रभावी ढंग से लड़ी जा सकती है।














