चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर करने वाली अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी TVK (तमिलगा वेत्री कझगम) की नई सरकार गठन के कुछ ही दिनों बाद राजनीतिक अस्थिरता के संकेत मिलने लगे हैं। सरकार बने अभी 10 दिन भी पूरे नहीं हुए हैं, लेकिन सहयोगी दलों के तेवर और बहुमत के समीकरणों ने नई सरकार के सामने चुनौती खड़ी कर दी है।
सबसे बड़ा झटका तब सामने आया, जब सरकार को बाहर से समर्थन दे रही CPM ने साफ शब्दों में कहा कि अगर AIADMK के किसी भी गुट को सरकार या गठबंधन में शामिल किया गया, तो पार्टी अपने समर्थन पर दोबारा विचार करेगी। CPM के इस बयान के बाद तमिलनाडु की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
AIADMK को लेकर CPM का सख्त संदेश
CPM ने कहा कि तमिलनाडु की जनता ने विधानसभा चुनाव में DMK और AIADMK दोनों को नकार दिया है। ऐसे में AIADMK के किसी भी गुट को TVK सरकार में जगह देना जनता के जनादेश के खिलाफ होगा।
पार्टी ने यह भी कहा कि विजय ने चुनाव के दौरान “स्वच्छ शासन” और नई राजनीति का वादा किया था, इसलिए AIADMK जैसे पुराने राजनीतिक ढांचे को सरकार का हिस्सा बनाना उन दावों के भी विपरीत माना जाएगा।
CPM ने अपने समर्थन को लेकर स्पष्ट करते हुए कहा—
“हम TVK का समर्थन इसलिए कर रहे हैं क्योंकि तमिलनाडु फिलहाल एक और चुनाव के लिए तैयार नहीं है। साथ ही हम यह भी नहीं चाहते कि BJP राज्यपाल शासन के जरिए पिछले दरवाजे से सत्ता में प्रवेश करे।”
ऐतिहासिक जीत, लेकिन बहुमत से 10 सीट दूर रह गई TVK
हाल ही में संपन्न हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में विजय की पार्टी TVK ने राज्य की दशकों पुरानी दो-दलीय राजनीति को चुनौती देते हुए बड़ी सफलता हासिल की। पार्टी ने 234 सदस्यीय विधानसभा में 108 सीटें जीतकर राजनीतिक समीकरण बदल दिए।
हालांकि पूर्ण बहुमत के लिए जरूरी आंकड़े से पार्टी 10 सीट पीछे रह गई। इसके बाद सरकार गठन को लेकर कई दिनों तक राजनीतिक बातचीत और रणनीतिक बैठकों का दौर चला।
आखिरकार कांग्रेस ने अपनी 5 सीटों के साथ TVK को समर्थन देने का फैसला किया। इसके अलावा लेफ्ट फ्रंट, VCK और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के समर्थन से विजय बहुमत का आंकड़ा जुटाने में सफल रहे और नई सरकार का गठन हुआ।
विश्वास मत में आया बड़ा मोड़
सरकार गठन के कुछ दिन बाद 13 मई को हुए विश्वास मत के दौरान राजनीतिक घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया।
विजय सरकार को विश्वास मत में कुल 144 विधायकों का समर्थन मिला। सबसे ज्यादा चर्चा AIADMK के 24 विधायकों को लेकर हुई, जिन्होंने पार्टी नेतृत्व के निर्देशों को नजरअंदाज करते हुए विजय सरकार के पक्ष में मतदान किया।
बताया जा रहा है कि AIADMK नेतृत्व पहले से इन विधायकों को विजय सरकार के समर्थन से रोकने की कोशिश कर रहा था। पार्टी प्रमुख ई. पलानीस्वामी ने स्पष्ट निर्देश भी जारी किए थे, लेकिन विश्वास मत के दौरान इन विधायकों ने पार्टी व्हिप की अनदेखी कर दी।
अब पार्टी नेतृत्व इन विधायकों के खिलाफ दल-बदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई पर विचार कर रहा है।
छोटी पार्टियों की रणनीति—‘फिर चुनाव नहीं चाहिए’
CPM और अन्य सहयोगी दलों ने स्पष्ट किया है कि उनका समर्थन पूरी तरह राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने के लिए है।
छोटी पार्टियों का कहना है कि राज्य को एक और चुनाव की स्थिति में धकेलना सही नहीं होगा। साथ ही उनका उद्देश्य BJP और उसके सहयोगी AIADMK को सत्ता से दूर रखना भी है।
हालांकि AIADMK के बागी विधायकों के समर्थन से सरकार को संख्याबल तो मिला है, लेकिन सहयोगी दलों की नाराजगी आने वाले दिनों में विजय सरकार के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर सकती है।
क्या फिर बदलेगा तमिलनाडु का सियासी गणित?
तमिलनाडु में नई राजनीतिक ताकत के रूप में उभरी विजय की पार्टी ने चुनाव में बड़ी सफलता जरूर हासिल की है, लेकिन सरकार चलाने की असली परीक्षा अब शुरू होती दिखाई दे रही है।
AIADMK के बागी विधायकों का समर्थन, CPM की चेतावनी, सहयोगी दलों की शर्तें और सत्ता संतुलन—इन सबके बीच विजय सरकार को हर कदम बेहद सावधानी से उठाना होगा। आने वाले दिन तय करेंगे कि तमिलनाडु में बदलाव की राजनीति स्थिर सरकार दे पाएगी या सियासी समीकरण फिर नया मोड़ लेंगे।














