कोलकाता। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने अपनी पहली ही कैबिनेट बैठक में कई ऐसे फैसले लिए हैं, जिन्हें राज्य की नौकरशाही और प्रशासनिक व्यवस्था में बड़े बदलाव की शुरुआत माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने साफ संकेत दे दिए हैं कि उनकी सरकार “जवाबदेही, पारदर्शिता और अनुशासन” के एजेंडे पर काम करेगी।
नई सरकार का सबसे बड़ा और चर्चित फैसला रहा — सेवानिवृत्ति के बाद दोबारा नियुक्त किए गए अधिकारियों और सलाहकारों पर कार्रवाई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि 60 वर्ष की आयु पार कर चुके और एक्सटेंशन या री-अपॉइंटमेंट के जरिए विभिन्न विभागों में काम कर रहे अधिकारियों की नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से समाप्त की जाएं।
सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार के विभिन्न विभागों, बोर्डों और सार्वजनिक उपक्रमों में 900 से अधिक एडवाइजर, OSD और विशेष नियुक्तियां सक्रिय थीं, जिन्हें पूर्व मुख्यमंत्री Mamata Banerjee की सरकार के दौरान दोबारा नियुक्त किया गया था। अब नई सरकार ने इन नियुक्तियों पर “सर्जिकल स्ट्राइक” करते हुए बड़ा प्रशासनिक संदेश देने की कोशिश की है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कैबिनेट बैठक के बाद यह भी आदेश दिया कि विभिन्न बोर्ड, निगम, संगठनों और पब्लिक सेक्टर यूनिट्स में नियुक्त नॉमिनेटेड सदस्य, डायरेक्टर और चेयरपर्सन का कार्यकाल भी तत्काल प्रभाव से समाप्त माना जाए। इस संबंध में सभी विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और सचिवों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
अफसरों को सख्त संदेश: “डरिए मत, लेकिन जवाबदेही तय होगी”
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ नौकरशाहों के साथ अलग से चर्चा करते हुए स्पष्ट कहा कि अधिकारी “सिर ऊंचा करके काम करें” और यदि किसी स्तर पर दबाव या परेशानी हो तो सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को जानकारी दें। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी व्यवस्था में किसी विशेष व्यक्ति को “अनुप्रेरणा” के नाम पर असामान्य महत्व देने की संस्कृति खत्म होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार “सरकार की तरह” काम करेगी और प्रशासनिक गरिमा को बहाल किया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी अधिकारी का सार्वजनिक अपमान नहीं किया जाएगा, लेकिन लापरवाही या भ्रष्टाचार पाए जाने पर जवाबदेही भी तय होगी।
ब्यूरोक्रेसी के लिए शुभेंदु अधिकारी के बड़े निर्देश
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कई अहम निर्देश दिए—
सरकारी धन की बर्बादी तुरंत रोकी जाए
केवल जरूरी योजनाओं और कार्यों पर खर्च किया जाए
फालतू खर्चों और दिखावटी योजनाओं पर रोक लगे
केंद्र सरकार की परियोजनाओं को तेजी से लागू किया जाए
हर विभाग में कार्यकुशलता और पारदर्शिता सुनिश्चित हो
सभी सचिवों और मुख्यमंत्री को जोड़ते हुए एक विशेष WhatsApp ग्रुप बनाया जाए
प्रशासनिक फैसलों में देरी और लापरवाही पर कार्रवाई की जाए
उन्होंने यह भी कहा कि पिछले 15 वर्षों में कई स्तरों पर गलतियां हुईं और यदि किसी अधिकारी के साथ अन्याय हुआ था, तो उन्हें पहले आवाज उठानी चाहिए थी।
“सम्मान भी मिलेगा, जवाब भी देना होगा”
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनकी सरकार प्रशासन में कार्यरत हर अधिकारी को सम्मान और गरिमा देगी, लेकिन साथ ही जवाबदेही भी तय करेगी। उन्होंने कहा कि यदि कोई अधिकारी अपने दायित्वों में लापरवाही करता है या प्रशासनिक गलतियां करता है, तो उससे जवाब मांगा जाएगा और जरूरत पड़ने पर उचित प्रशासनिक कार्रवाई भी की जाएगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शुभेंदु अधिकारी की पहली कैबिनेट बैठक ने यह साफ कर दिया है कि नई सरकार राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने के मूड में है। वहीं विपक्ष इसे “राजनीतिक बदले की कार्रवाई” बताकर सवाल उठा रहा है, जबकि भाजपा समर्थक इसे “सिस्टम क्लीनअप” की शुरुआत मान रहे हैं।














