योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश विधानमंडल के विशेष सत्र में विपक्षी दलों पर जोरदार राजनीतिक हमला बोलते हुए कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और INDIA Alliance को “जन्मजात महिला विरोधी” करार दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन दलों के “रग-रग में नारी का अपमान” भरा हो, वे आज महिला आरक्षण और नारी सम्मान की बात कर रहे हैं, यह जनता को भ्रमित करने की कोशिश मात्र है।
उन्होंने अपने संबोधन में तीखे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि विपक्ष का चेहरा “बोलने का कुछ और, दिखाने का कुछ और” है। यूपीए से नाम बदलकर इंडी गठबंधन करने पर तंज कसते हुए योगी ने कहा कि ये लोग “गिरगिट की तरह रंग बदलते हैं, बल्कि इन्हें देखकर गिरगिट भी शरमा जाए।”
महिला विरोधी आचरण के खिलाफ बुलाया गया विशेष सत्र
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण की शुरुआत यह कहते हुए की कि आज का विशेष सत्र कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और इंडी गठबंधन के कथित महिला विरोधी आचरण की निंदा करने के उद्देश्य से बुलाया गया है। उन्होंने कहा कि जब विपक्ष को आधी आबादी के आक्रोश का सामना करना पड़ा तो वे 33 प्रतिशत महिला आरक्षण की बात करने लगे, लेकिन जब सदन में महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने का वास्तविक अवसर आया तो इन्हीं दलों ने विरोध किया।
योगी ने कहा कि विपक्ष का यह दोहरा चरित्र अब जनता के सामने पूरी तरह उजागर हो चुका है। उनके मुताबिक, “जो लोग सदन में महिला आरक्षण के मुद्दे पर बाधा बनते रहे, वे आज महिला हितैषी होने का नाटक कर रहे हैं।”
“देख सपाई, बिटिया घबराई” — सपा शासन पर सीएम का तीखा प्रहार
समाजवादी पार्टी पर हमला तेज करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में जब-जब सपा को सत्ता मिली, उस दौरान महिलाओं के खिलाफ अपराध, बर्बर घटनाएं और अत्याचार की तमाम सीमाएं पार हुईं। उन्होंने कहा कि उस दौर में एक नारा आम हो गया था— “देख सपाई, बिटिया घबराई।”
योगी ने आरोप लगाया कि सपा शासन में महिलाओं की सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल बन गई थी और प्रशासनिक संरक्षण में महिला उत्पीड़न की अनेक घटनाएं सामने आई थीं।
उन्होंने पुराने मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि State Guest House Incident जैसे कांडों से लेकर पार्टी नेताओं और पदाधिकारियों पर लगे महिला विरोधी आरोपों तक, देश समाजवादी पार्टी का चेहरा पहले ही देख चुका है।
कांग्रेस-सपा ने गंवाया छवि सुधारने का मौका: योगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्षी दलों के पास अपनी महिला विरोधी छवि को सुधारने का एक सुनहरा अवसर था — Nari Shakti Vandan Adhiniyam के समर्थन का। लेकिन उन्होंने इस ऐतिहासिक पहल में भी सहयोग नहीं किया।
योगी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और इंडी गठबंधन से जुड़े अन्य दल लगातार इस कोशिश में लगे रहे कि किसी भी स्थिति में यह संशोधन प्रभावी ढंग से लागू न हो पाए। उन्होंने कहा कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के मुद्दे पर इन दलों की नीयत साफ नहीं थी।
शाहबानो से महिला आरक्षण तक विपक्ष पर सवाल
सीएम योगी ने अपने भाषण में शाहबानो प्रकरण का भी उल्लेख किया और कहा कि महिलाओं के अधिकारों के मामले में कांग्रेस का रिकॉर्ड शुरू से ही संदिग्ध रहा है। उन्होंने कहा कि शाहबानो प्रकरण से लेकर अब तक महिलाओं के सम्मान और अधिकार से जुड़े मुद्दों पर विपक्षी दलों ने हमेशा राजनीतिक सुविधा के अनुसार रुख अपनाया।
उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में Bharatiya Janata Party और एनडीए महिलाओं को नीति निर्धारण में सम्मानजनक भागीदारी देने का काम कर रहे हैं, जबकि दूसरी ओर विपक्ष हर सकारात्मक बदलाव के रास्ते में रुकावट बन रहा है।
2014 के बाद महिलाओं के लिए बदली राजनीति की तस्वीर
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद केंद्र सरकार ने महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और राजनीतिक भागीदारी के लिए कई ऐतिहासिक फैसले लिए हैं। उन्होंने बताया that अब तक राष्ट्रीय स्तर पर संसद में केवल लगभग 15 प्रतिशत महिलाएं पहुंच सकी हैं, जबकि उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा 11 से 12 प्रतिशत के बीच रहा है। भाजपा की कोशिश है कि यह संख्या बढ़कर 33 प्रतिशत तक पहुंचे ताकि आधी आबादी को वास्तविक राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिल सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लेकिन इंडी गठबंधन “हर नारी हित, हर अच्छे मुद्दे और हर सकारात्मक विधेयक” का विरोध करने की आदत से बाहर नहीं निकल पा रहा है।
विपक्ष के खिलाफ भाजपा का महिला सम्मान नैरेटिव तेज
विशेष सत्र में योगी आदित्यनाथ का यह आक्रामक भाषण साफ संकेत देता है कि आने वाले राजनीतिक महीनों में भाजपा महिला सम्मान, महिला सुरक्षा और महिला आरक्षण को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने जा रही है। सपा-कांग्रेस पर महिला विरोधी छवि का ठप्पा लगाने की कोशिश के जरिए भाजपा आधी आबादी के बीच अपना संदेश और मजबूत करना चाहती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर भाजपा जिस तरह विपक्ष को घेर रही है, उससे आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति में महिला मतदाता सबसे निर्णायक फैक्टर बन सकती हैं।














