चंडीगढ़ में 11 और 12 अप्रैल को आयोजित अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा का दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इस अधिवेशन में देशभर के 24 प्रांतों से आए पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया और समाज से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर गंभीरता से चर्चा की।
अधिवेशन के दौरान संगठन में महत्वपूर्ण नियुक्तियों की घोषणा की गई। मथुरा के ऋषिराज सिंह को सर्वसम्मति से अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया। यह घोषणा राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजा मानवेन्द्र सिंह द्वारा की गई। इसके अलावा टिक्का शिवेंद्र पाल कुटलैहड़ को यूथ विंग का राष्ट्रीय अध्यक्ष, श्रीमती इंदु तोमर को महिला विंग की राष्ट्रीय अध्यक्षा और गाजीपुर निवासी एवं SAIL के सेवानिवृत्त जीएम संजय सिंह को सांस्कृतिक प्रकोष्ठ का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया।
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अजय सिंह ने बताया कि अधिवेशन में कई अहम सामाजिक और नीतिगत मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। प्रमुख प्रस्तावों में आरक्षण व्यवस्था को आर्थिक आधार पर लागू करने की मांग, एससी-एसटी एक्ट की समीक्षा, महाराणा प्रताप की जयंती पर राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने तथा क्षत्रिय इतिहास को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने जैसे विषय प्रमुख रहे।
इसके अलावा शिक्षा और सामाजिक विकास को लेकर भी कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। गरीब छात्रों की सहायता, यूजीसी कानून में पुनर्विचार, पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण और समाज के इतिहास के प्रचार-प्रसार पर विशेष जोर दिया गया। अधिवेशन में सामाजिक सरोकारों को प्राथमिकता देते हुए गरीब परिवारों के बच्चों की मुफ्त शिक्षा, सामूहिक विवाह, स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन और आर्थिक सहयोग जैसे कदमों पर सहमति बनी।

साथ ही दहेज प्रथा, शराब सेवन और मृत्यु भोज जैसी कुप्रथाओं को समाप्त करने का आह्वान किया गया। नवनियुक्त कार्यकारी अध्यक्ष ऋषिराज सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि देश में बढ़ती बेरोजगारी एक गंभीर समस्या है, जिसे लेकर संगठन पूरे देश में जनजागरण अभियान चलाएगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि महासभा का उद्देश्य केवल क्षत्रिय समाज तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में सामाजिक एकता, सांस्कृतिक संरक्षण और युवाओं को जागरूक करना है। उन्होंने ऐतिहासिक किलों, महलों और धरोहरों के संरक्षण के साथ-साथ राष्ट्रहित में कार्य करने को संगठन की प्राथमिकता बताया।
अधिवेशन में यह भी रेखांकित किया गया कि क्षत्रिय समाज की एकजुटता से सामाजिक और राष्ट्रीय स्तर पर सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। महापुरुषों के स्मारक निर्माण, क्षत्रिय भवनों की स्थापना और विभिन्न संगठनों के बीच बेहतर समन्वय बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
चंडीगढ़ का यह अधिवेशन केवल संगठनात्मक बदलाव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक सुधार, शिक्षा, सांस्कृतिक संरक्षण और राष्ट्रीय एकता जैसे व्यापक मुद्दों पर मंथन का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ।














