Saturday, April 11, 2026
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‘नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर’ के लिए 100 दिवसीय अभियान शुरू: मनोज सिन्हा ने दिखाई सख्ती, नार्को-टेरर नेटवर्क पर कसा जाएगा शिकंजा

 

मनोज सिन्हा ने शनिवार को ‘नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर’ अभियान के तहत 100 दिवसीय विशेष अभियान की शुरुआत की। इस अभियान का उद्देश्य केंद्र शासित प्रदेश ‘जम्मू-कश्मीर’ से नशे की समस्या को जड़ से खत्म करना और युवाओं को इसके दुष्प्रभावों से बचाना है।

अभियान की शुरुआत जम्मू के एमए स्टेडियम से एक भव्य पदयात्रा को हरी झंडी दिखाकर की गई। करीब 1900 मीटर लंबी इस पदयात्रा के जरिए लोगों को नशा मुक्ति का संदेश दिया गया। यह पदयात्रा जम्मू से शुरू होकर कठुआ, उधमपुर और रामबन सहित कई जिलों में जाएगी और आगे चलकर कश्मीर के सभी 10 जिलों तक पहुंचाई जाएगी।

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इस अभियान को जन आंदोलन बनाने पर जोर देते हुए युवाओं, छात्रों, एनसीसी, एनएसएस, स्काउट्स एंड गाइड्स, स्वयंसेवी संगठनों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों से सक्रिय भागीदारी की अपील की। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल सरकार नहीं, बल्कि पूरे समाज को मिलकर लड़नी होगी।

सीमा पार से नशे की तस्करी बड़ी साजिश

मनोज सिन्हा ने कहा कि Pakistan से नशीले पदार्थों की तस्करी एक बड़े अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र का हिस्सा है, जिसका मकसद जम्मू-कश्मीर के युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुंचाना है। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, करीब 5000 करोड़ रुपये का यह अवैध कारोबार आतंकवादी गतिविधियों को भी आर्थिक मदद पहुंचा रहा है।

ड्रोन और अन्य माध्यमों से सीमा पार से बड़े पैमाने पर हेरोइन और अन्य नशीले पदार्थों की तस्करी की जा रही है। कई बार ड्रोन के जरिए सीमा के पास नशे की खेप गिराई जाती है, जिसकी कीमत 10 से 40 करोड़ रुपये तक होती है। बाद में स्थानीय नेटवर्क के जरिए इन्हें अलग-अलग जिलों में पहुंचाया जाता है।

जम्मू और श्रीनगर बने तस्करी के हॉटस्पॉट

नशे के कारोबार में Jammu और Srinagar प्रमुख केंद्र बनकर उभरे हैं। वर्ष 2025 में जम्मू में एनडीपीएस के 204 मामले दर्ज किए गए और 309 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इस दौरान करीब 60 करोड़ रुपये की 15 किलो हेरोइन बरामद हुई।

वहीं श्रीनगर में 172 मामले दर्ज हुए, जिनमें छोटी, मध्यम और व्यावसायिक मात्रा की ड्रग्स शामिल थीं। पुलिस ने पंजाब, कठुआ, उधमपुर और राजौरी तक फैले ड्रग नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए 36 आरोपियों को गिरफ्तार किया।

2026 में भी जारी कार्रवाई

साल 2026 के पहले तीन महीनों में ही 88 एफआईआर दर्ज की गईं और 65 करोड़ रुपये से अधिक कीमत की 10 किलो से ज्यादा हेरोइन जब्त की गई। यह इस बात का संकेत है कि ड्रग तस्करी का नेटवर्क कितना सक्रिय है।

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि ड्रग्स से कमाए गए पैसे का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों को फिर से सक्रिय करने में किया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार यह केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी एक बड़ी चुनौती है।

ऐसे में प्रशासन का मानना है कि सख्त कार्रवाई, व्यापक जागरूकता और जनभागीदारी के जरिए ही इस खतरे पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

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