केंद्र सरकार बुधवार को लोकसभा में आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश करने जा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य अमरावती को आंध्र प्रदेश की एकमात्र स्थायी राजधानी के रूप में कानूनी मान्यता देना है। यह कदम आंध्र प्रदेश विधानसभा द्वारा पारित प्रस्ताव के बाद उठाया जा रहा है, जिसमें केंद्र से इस संबंध में कानून में संशोधन करने की मांग की गई थी।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, 28 मार्च 2026 को बुलाए गए विशेष विधानसभा सत्र में यह प्रस्ताव पारित किया गया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने तेजी से कार्रवाई करते हुए विधेयक तैयार किया और उसकी प्रतियां सांसदों को वितरित कर दी गई हैं। संसद का मौजूदा सत्र जारी है, ऐसे में इस विधेयक पर जल्द चर्चा और पारित होने की संभावना जताई जा रही है।
प्रस्तावित विधेयक में आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 की धारा 5 में संशोधन किया जाएगा। इस अधिनियम के तहत पहले Hyderabad को अधिकतम 10 वर्षों के लिए आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की संयुक्त राजधानी घोषित किया गया था। अब इस प्रावधान में बदलाव कर अमरावती को स्थायी राजधानी का दर्जा देने की तैयारी है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि की बात करें तो 2019 में Y. S. Jagan Mohan Reddy के नेतृत्व वाली सरकार ने तीन राजधानियों—अमरावती (विधायी), विशाखापत्तनम (कार्यकारी) और कुरनूल (न्यायिक)—का प्रस्ताव रखा था। इस निर्णय के चलते अमरावती में चल रहे कई विकास कार्य रुक गए थे, क्योंकि सरकार का मानना था कि एक ही स्थान पर राजधानी विकसित करने में अत्यधिक खर्च हो रहा है।
हालांकि, 2024 में सत्ता में वापसी के बाद N. Chandrababu Naidu ने अमरावती परियोजना को फिर से गति दी और इसे राज्य की एकमात्र राजधानी बनाने के लिए केंद्र से कानूनी मंजूरी की मांग की। इसी दिशा में यह संशोधन विधेयक एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
गौरतलब है कि इस मुद्दे पर विपक्षी दल वाईएसआरसीपी के विधायक विशेष विधानसभा सत्र से दूर रहे थे, जिससे राजनीतिक मतभेद भी स्पष्ट हो गए। अब सबकी नजरें संसद पर टिकी हैं, जहां इस विधेयक के पारित होने के बाद राजपत्र अधिसूचना जारी होते ही अमरावती को आधिकारिक रूप से आंध्र प्रदेश की स्थायी राजधानी का दर्जा मिल सकता है।
यह कदम न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि राज्य के विकास, निवेश और बुनियादी ढांचे को नई दिशा देने वाला भी साबित हो सकता है।














