मुंबई:महाराष्ट्र की राजनीति में एक नई हलचल तब देखने को मिली, जब दिवंगत पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे से मुलाकात की। यह मुलाकात मुंबई के शिवाजी पार्क स्थित ‘शिवतीर्थ’ बंगले पर हुई, जो करीब डेढ़ घंटे तक चली।
बंद कमरे की बैठक से बढ़ी चर्चा
हालांकि इस बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसका आधिकारिक खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन इस मुलाकात ने राज्य की राजनीति में नए समीकरणों की अटकलों को जन्म दे दिया है।
अजित पवार के निधन के बाद बदली सियासत
दो महीने पहले एक विमान हादसे में अजित पवार के निधन के बाद महाराष्ट्र की सियासत में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। इसी बीच रोहित पवार लगातार इस हादसे की जांच की मांग कर रहे हैं, जिससे यह मुद्दा अभी भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बना हुआ है।
पहले भी मिला था राज ठाकरे का समर्थन
गौरतलब है कि जब पुणे जमीन घोटाले में पार्थ पवार का नाम सामने आया था, तब राज ठाकरे ने खुलकर उनका बचाव किया था और आरोपों की आलोचना की थी। ऐसे में यह मुलाकात और भी अहम मानी जा रही है।
ठाकरे परिवार में दूरी की चर्चा
वहीं, Uddhav Thackeray और राज ठाकरे के बीच भी दूरी की चर्चाएं हैं। बीएमसी चुनाव के बाद दोनों नेताओं को सार्वजनिक मंच पर साथ नहीं देखा गया है। राज ठाकरे की पार्टी को चुनाव में अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के कारण पार्टी के भीतर असंतोष की बात भी सामने आ रही है।
NCP में भी अंदरूनी नाराजगी
इस बीच Nationalist Congress Party के भीतर भी असंतोष की खबरें हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष Sunil Tatkare के एक कार्यक्रम में बैनर पर अजित पवार और सुनेत्रा पवार की तस्वीर न होने से समर्थकों में नाराजगी देखी गई। हालांकि विवाद बढ़ने पर तटकरे ने खेद जताया।
भविष्य की रणनीति पर नजर
महाराष्ट्र में अगले तीन साल तक कोई बड़ा चुनाव नहीं है। ऐसे में माना जा रहा है कि पार्थ पवार अब संगठन को मजबूत करने और युवाओं को जोड़ने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं।
यह मुलाकात भले ही औपचारिक बताई जा रही हो, लेकिन इसके सियासी मायने दूरगामी हो सकते हैं।














