ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली होसैनी खामेनेई के निधन के बाद देश की राजनीतिक स्थिति को लेकर नई जानकारी सामने आई है। भारत में ईरान के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा है कि ईरान एक सप्ताह के भीतर नया सुप्रीम लीडर चुन लेगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान में सर्वोच्च नेता के चयन की एक निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया है और उसी के तहत अगले नेता का चुनाव किया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ईरान किसी भी परिस्थिति में अमेरिका या इजराइल के दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है और देश अपनी आज़ादी और सम्मान की रक्षा के लिए लंबे संघर्ष के लिए भी तैयार है।
एक हफ्ते में चुना जाएगा नया सुप्रीम लीडर
अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने बताया कि ईरान के संविधान में सुप्रीम लीडर के चयन की एक तय प्रक्रिया है, जिसे पूरी तरह से लागू किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि देश की नेतृत्व व्यवस्था मजबूत है और इसलिए नेतृत्व परिवर्तन के बावजूद शासन और नीतियों में स्थिरता बनी रहेगी। उनके मुताबिक, आने वाले एक सप्ताह के भीतर नया सुप्रीम लीडर चुन लिया जाएगा।
अमेरिका और इजराइल पर लगाया हमला करने का आरोप
इलाही ने आरोप लगाया कि यूनाइटेड स्टेट्स और इजराइल ने जिस तरह से खामेनेई को निशाना बनाया, उससे ईरान के लोग और अधिक एकजुट हो गए हैं।
उन्होंने कहा कि इन हमलों के बावजूद ईरान अपने राष्ट्रीय सम्मान, स्वतंत्रता और नैतिक मूल्यों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
इलाही के शब्दों में, “हम अपनी जमीन के लिए कुर्बानी देंगे, अपनी इज्जत के लिए कुर्बानी देंगे, अपनी आजादी और अपने मूल्यों की रक्षा के लिए हर कीमत चुकाने को तैयार हैं।”
दो साल तक संघर्ष के लिए तैयार
क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर बात करते हुए इलाही ने कहा कि ईरान किसी भी युद्ध की शुरुआत नहीं चाहता था, लेकिन परिस्थितियों ने उसे रक्षा की स्थिति में ला खड़ा किया है।
उन्होंने कहा कि अगर संघर्ष की स्थिति बनी रहती है तो ईरान दो साल तक भी लड़ने के लिए तैयार है।
उनका कहना था कि देश पर “अन्यायपूर्ण हमले” किए गए हैं और इसलिए अब अपनी सुरक्षा के लिए कदम उठाना मजबूरी बन गया है।
पड़ोसी देशों पर हमला नहीं करेगा ईरान
इलाही ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान किसी भी पड़ोसी देश के खिलाफ आक्रामक नीति नहीं अपनाना चाहता।
उन्होंने कहा कि ईरान की नीति साफ है—अगर उस पर हमला नहीं किया जाता, तो वह भी किसी पर हमला नहीं करेगा। उनका कहना था कि ईरान क्षेत्रीय स्थिरता और शांति चाहता है, लेकिन अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा।
बाहरी ताकतें नहीं दे सकती स्थायी सुरक्षा
इलाही ने मौजूदा क्षेत्रीय संकट को लेकर कहा कि इस स्थिति ने ईरान के पड़ोसी देशों को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है कि बाहरी शक्तियां स्थायी सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकतीं।
उन्होंने कहा कि क्षेत्र के देशों को अपनी समस्याओं का समाधान खुद निकालना चाहिए और विदेशी ताकतों पर निर्भरता कम करनी चाहिए।
उनके अनुसार, “अब हमारे पड़ोसी यह समझने लगे हैं कि कोई भी बाहरी शक्ति उन्हें पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकती।”
भारत और ईरान के बीच ऐतिहासिक संबंध
भारत और ईरान के आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों पर बात करते हुए इलाही ने कहा कि दोनों देशों के बीच दोस्ती हजारों साल पुरानी है।
उन्होंने कहा कि भारत और ईरान के बीच संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि संस्कृति, सभ्यता, दर्शन और आध्यात्मिक परंपराओं से भी जुड़े हुए हैं।
इलाही के मुताबिक, दोनों देशों के रिश्ते लगभग 3000 साल पुराने हैं और वर्तमान भू-राजनीतिक तनाव भी इन ऐतिहासिक संबंधों को कमजोर नहीं कर सकता।
व्यापारिक संबंधों पर भी दिया बयान
तेहरान और नई दिल्ली के बीच तेल आयात-निर्यात को लेकर चल रहे विवाद के सवाल पर उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है और भविष्य में सहयोग के नए रास्ते खुल सकते हैं।
उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत और ईरान के बीच आर्थिक संबंध आगे भी मजबूत बने रहेंगे।
क्षेत्रीय राजनीति में बढ़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान में नए सुप्रीम लीडर का चुनाव केवल देश की आंतरिक राजनीति ही नहीं, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है।
ऐसे समय में जब क्षेत्र पहले से ही तनाव और संघर्ष का सामना कर रहा है, ईरान की नई नेतृत्व व्यवस्था आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अहम भूमिका निभा सकती है।














