“नियमितीकरण और समान कार्य-समान वेतन की मांग पर नोएडा CMO कार्यालय में 250 कर्मचारियों का धरना, छह सूत्रीय मांगों को लेकर शासन को ज्ञापन”
नोएडा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत वर्षों से स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी संभाल रहे संविदा कर्मचारियों का सब्र अब जवाब देता नजर आ रहा है। नियमितीकरण और समान कार्य-समान वेतन की दो प्रमुख मांगों को लेकर एनएचएम संविदा कर्मचारियों ने एक बार फिर अपनी आवाज बुलंद की है। संगठन का कहना है कि इन मांगों को लेकर सरकार के समक्ष पिछले करीब 10 वर्षों से लगातार मांग रखी जा रही है, लेकिन अब तक कोई ऐसा ठोस समाधान सामने नहीं आया है, जिससे हजारों संविदा कर्मचारियों को स्थायी सेवा सुरक्षा और समान वेतन का भरोसा मिल सके।
इसी क्रम में गौतम बुद्ध नगर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय में करीब 250 एनएचएम संविदा कर्मचारी धरने पर बैठे और प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर शासन के खिलाफ अपना असंतोष जाहिर किया और स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार मजबूती देने वाले कर्मचारियों के सेवा संबंधी मुद्दों पर अब निर्णायक स्तर पर कार्रवाई की जरूरत है।
उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ, शाखा गौतम बुद्ध नगर की ओर से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट कार्यालय, जिलाधिकारी गौतम बुद्ध नगर तथा सीएमओ कार्यालय में सौंपा गया। संगठन ने मांग की कि कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर शासन स्तर से शीघ्र सकारात्मक निर्णय लिया जाए।
दस साल से वही मांग, अब सवाल—कब मिलेगा स्थायी समाधान?
एनएचएम संविदा कर्मचारियों के आंदोलन का सबसे बड़ा मुद्दा नियमितीकरण है। संगठन का कहना है कि बड़ी संख्या में कर्मचारी लंबे समय से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न सेवाओं में लगातार काम कर रहे हैं। वर्षों की सेवा के बावजूद उनकी नियुक्ति संविदा व्यवस्था के तहत बनी हुई है।
संगठन के अनुसार, कर्मचारी स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था में अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहे हैं, लेकिन उनकी सेवा शर्तों, वेतन और भविष्य की सुरक्षा को लेकर कई सवाल अभी भी कायम हैं। कर्मचारियों का कहना है कि जब काम की जिम्मेदारी लगातार बनी हुई है तो सेवा सुरक्षा और सम्मानजनक वेतन की मांग को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखा जाना चाहिए।
जिला अध्यक्ष डॉ. मतलूब और महामंत्री अशुदीप ने कहा कि संगठन की प्रमुख मांगों में नियमितीकरण और समान कार्य-समान वेतन सबसे महत्वपूर्ण हैं। उनका कहना है कि कर्मचारियों की मांग कोई अचानक उठी आवाज नहीं, बल्कि लंबे समय से शासन के सामने रखी जा रही मांग है।
समान काम, फिर वेतन में अंतर क्यों?
एनएचएम संविदा कर्मचारियों ने समान कार्य-समान वेतन को भी आंदोलन का केंद्रीय मुद्दा बनाया है। संगठन का तर्क है कि समान प्रकृति का कार्य करने वाले कर्मचारियों के बीच वेतन और सेवा सुविधाओं को लेकर मौजूद अंतर को दूर किया जाना चाहिए।
कर्मचारियों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारियों में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है और लंबे समय से सेवा देने के बावजूद वेतन एवं अन्य सुविधाओं को लेकर असमानता का सामना करना पड़ रहा है। संगठन ने सरकार से मांग की है कि समान कार्य-समान वेतन के सिद्धांत के अनुरूप वेतनमान में वृद्धि कर एक समान व्यवस्था लागू की जाए।
यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि संगठन के अनुसार, समान कार्य-समान वेतन की मांग पिछले लगभग एक दशक से उठाई जा रही है। अब कर्मचारियों का सवाल है कि यदि इस मांग पर वर्षों से चर्चा और ज्ञापन दिए जाते रहे हैं, तो इसका नीतिगत समाधान कब होगा?
छह सूत्रीय मांगों ने बढ़ाया दबाव
संघ की ओर से मुख्यमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में छह प्रमुख मांगें रखी गई हैं। इनमें सबसे पहली मांग लंबे समय से कार्यरत एनएचएम संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण की है।
दूसरी मांग समान कार्य-समान वेतन लागू करने की है। संगठन ने वेतनमान में वृद्धि के साथ समान वेतन व्यवस्था लागू करने की मांग की है।
तीसरी मांग कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की है, ताकि गंभीर बीमारी या इलाज की स्थिति में कर्मचारियों पर आर्थिक दबाव कम हो सके।
चौथी मांग में महंगाई भत्ता (DA), EPF, HRA समेत अन्य अनुमन्य सुविधाएं दिए जाने की मांग की गई है।
पांचवीं मांग एनएचएम संविदा कर्मचारियों के लिए स्पष्ट स्थानांतरण नीति लागू करने की है। संगठन का कहना है कि स्थानांतरण को लेकर स्पष्ट नीति कर्मचारियों के लिए पारदर्शिता और सुविधा दोनों सुनिश्चित कर सकती है।
छठी और बेहद संवेदनशील मांग सेवा अवधि के दौरान संविदा कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिवार के पात्र सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति दिए जाने की है। संगठन का कहना है कि वर्षों तक सेवा देने वाले कर्मचारी के परिवार को संकट की स्थिति में पूरी तरह असुरक्षित नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के समायोजन की भी मांग
संगठन ने केवल छह सूत्रीय मांगों तक अपनी बात सीमित नहीं रखी है। इसके अतिरिक्त आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्यरत स्वास्थ्यकर्मियों को एनएचएम के अंतर्गत समायोजित करने की मांग भी उठाई गई है।
साथ ही नियमित पदों पर होने वाली भर्ती में एनएचएम संविदा कर्मचारियों के लिए कम से कम 25 प्रतिशत कोटा निर्धारित करने की मांग रखी गई है। संगठन का तर्क है कि जो कर्मचारी लंबे समय से विभागीय और मिशन की व्यवस्थाओं में काम कर रहे हैं, उनके अनुभव को नियमित भर्ती प्रक्रिया में उचित महत्व मिलना चाहिए।
3 अक्टूबर तक कार्रवाई की मांग, अब आंदोलन की चेतावनी
संगठन की ओर से पहले शासन को मांगों पर 3 अक्टूबर 2026 तक सकारात्मक कार्रवाई किए जाने की अपेक्षा जताई गई थी। ज्ञापन में कहा गया था कि 24 सितंबर से 10 दिनों के भीतर मांगों पर शासन स्तर से सकारात्मक पहल की उम्मीद है। संगठन ने यह भी संकेत दिया था कि अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में आगे आंदोलनात्मक कार्यक्रम पर विचार किया जाएगा।
अब सीएमओ कार्यालय पर करीब 250 कर्मचारियों का धरना इस बात का संकेत है कि संगठन अपनी मांगों को लेकर दबाव बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हालांकि आगे की रणनीति संगठन की बैठक और निर्णय के बाद तय की जाएगी।
‘स्वास्थ्य सेवाएं चलाने वालों की सेवा सुरक्षा कब?’
एनएचएम संविदा कर्मचारियों का पूरा आंदोलन मूल रूप से इसी सवाल के इर्द-गिर्द घूमता नजर आ रहा है कि जो कर्मचारी वर्षों से स्वास्थ्य व्यवस्था का हिस्सा हैं, उनकी अपनी सेवा सुरक्षा कितनी सुनिश्चित है?
संगठन का कहना है कि संविदा कर्मचारी लगातार अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। ऐसे में नियमितीकरण, समान वेतन, सामाजिक सुरक्षा और परिवार की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सरकार को ठोस नीति बनानी चाहिए।
जिला अध्यक्ष डॉ. मतलूब ने कहा कि संगठन की प्रमुख मांगें वर्षों पुरानी हैं और कर्मचारियों की ओर से लगातार शासन तक पहुंचाई जाती रही हैं। वहीं महामंत्री अशुदीप ने कहा कि कर्मचारियों की मांगों पर सकारात्मक और समयबद्ध निर्णय की आवश्यकता है।
धरने में कर्मचारियों की मौजूदगी ने यह स्पष्ट किया कि मामला अब केवल ज्ञापन तक सीमित नहीं रहना चाहता। कर्मचारी संगठन अपने मुद्दों को लेकर सामूहिक रूप से आवाज उठा रहा है और शासन से समाधान की अपेक्षा कर रहा है।
अब गेंद शासन के पाले में
एनएचएम संविदा कर्मचारियों की छह सूत्रीय मांगों और दो प्रमुख मुद्दों—नियमितीकरण तथा समान कार्य-समान वेतन—पर अब निगाह शासन के अगले कदम पर है।
एक तरफ संगठन वर्षों से चली आ रही मांगों का समाधान चाहता है, वहीं दूसरी तरफ सरकार के स्तर से इन मांगों पर क्या नीति अपनाई जाती है, यह आने वाले समय में महत्वपूर्ण होगा। नियमितीकरण, वेतन समानता, सामाजिक सुरक्षा और सेवा शर्तों से जुड़े ये मुद्दे सीधे तौर पर बड़ी संख्या में संविदा कर्मचारियों और उनके परिवारों से जुड़े हैं।
फिलहाल नोएडा में करीब 250 कर्मचारियों का धरना यह बताने के लिए पर्याप्त है कि एनएचएम संविदा कर्मचारियों में अपनी लंबित मांगों को लेकर असंतोष मौजूद है। संगठन ने अपनी मांगें लिखित रूप में शासन और प्रशासन के सामने रख दी हैं। अब कर्मचारियों की नजर इस बात पर है कि दस साल से चली आ रही मांगों को एक और ज्ञापन मिलेगा या इस बार कोई ठोस नीतिगत निर्णय भी सामने आएगा।
धरने में डॉ. मतलूब, जिला अध्यक्ष एनएचएम संघ गौतम बुद्ध नगर, अशुदीप, महामंत्री, तथा संगठन के अन्य पदाधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।















