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MLC चुनाव के बीच गाजियाबाद और नोएडा में छुट्टी पर अलग-अलग नियम, कहीं स्कूल बंद तो कहीं सिर्फ मतदाताओं को राहत; आदेश को लेकर अभिभावक और कर्मचारी रहें सतर्क

“23 अक्टूबर को मतदान, गाजियाबाद में नर्सरी से 12वीं तक के स्कूलों में अवकाश का उल्लेख; गौतम बुद्ध नगर में पात्र और पंजीकृत मतदाताओं को विशेष आकस्मिक छुट्टी की व्यवस्था — पूरे जिले में छुट्टी समझने की भूल पड़ सकती है भारी”

गाजियाबाद/नोएडा। उत्तर प्रदेश में 23 अक्टूबर को प्रस्तावित विधान परिषद सदस्य (MLC) चुनाव को लेकर गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर में छुट्टी की व्यवस्था चर्चा का विषय है। दोनों जिले भौगोलिक रूप से एक-दूसरे के करीब हैं, लेकिन चुनाव के दिन स्कूलों, शिक्षण संस्थानों और कर्मचारियों के लिए लागू व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण अंतर बताया गया है। गाजियाबाद में नर्सरी से 12वीं कक्षा तक के विद्यालयों में अवकाश की बात सामने आई है, जबकि गौतम बुद्ध नगर में संबंधित स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के पात्र एवं पंजीकृत मतदाताओं को मतदान के लिए विशेष आकस्मिक अवकाश देने की व्यवस्था बताई गई है।

यानी एक जिले में स्कूलों की छुट्टी का सवाल है, तो दूसरे जिले में मतदान के अधिकार का इस्तेमाल करने के लिए पात्र मतदाताओं को मिलने वाली राहत का। इस अंतर को नजरअंदाज करना अभिभावकों, विद्यार्थियों, शिक्षकों और नौकरीपेशा लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। खास तौर पर नोएडा में रहने वाले उन अभिभावकों और कर्मचारियों को यह समझना होगा कि मतदान के दिन छुट्टी की व्यवस्था का अर्थ अपने आप सभी स्कूलों, कार्यालयों और निजी संस्थानों का बंद होना नहीं है।

हालांकि, किसी भी आदेश की अंतिम स्थिति संबंधित जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग और नियोक्ता की आधिकारिक सूचना से ही सुनिश्चित की जानी चाहिए। उपलब्ध विवरण के आधार पर दोनों जिलों के लिए एक समान छुट्टी का दावा करना उचित नहीं होगा।

गाजियाबाद में स्कूलों की छुट्टी, नर्सरी से 12वीं तक के विद्यार्थियों को राहत

गाजियाबाद में 23 अक्टूबर, शुक्रवार को चुनाव के मद्देनजर नर्सरी से कक्षा 12वीं तक के स्कूलों में अवकाश घोषित किए जाने की जानकारी सामने आई है। इस व्यवस्था के दायरे में सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों को शामिल बताया गया है। उच्च शिक्षण संस्थानों के संबंध में भी विशेष अवकाश की व्यवस्था का उल्लेख है, लेकिन उनके लिए लागू नियमों की पुष्टि संबंधित आधिकारिक आदेश से की जानी चाहिए।

इस फैसले का सीधा असर उन परिवारों पर पड़ेगा, जिनके बच्चे स्कूलों में पढ़ते हैं। अभिभावकों को एक ओर बच्चों के स्कूल जाने को लेकर अपनी दिनचर्या में बदलाव करना होगा, वहीं दूसरी ओर उन्हें यह भी देखना होगा कि विद्यालय की ओर से कोई अलग निर्देश तो जारी नहीं किया गया है।

स्कूलों की छुट्टी को लेकर भ्रम की स्थिति से बचने का सबसे प्रभावी तरीका यही है कि अभिभावक विद्यालय की आधिकारिक सूचना और जिला प्रशासन के आदेश का मिलान कर लें। केवल मौखिक जानकारी या अपुष्ट संदेश के आधार पर बच्चों को स्कूल भेजने अथवा छुट्टी मान लेने से बचना चाहिए।

यह भी महत्वपूर्ण है कि किसी विद्यालय में अवकाश घोषित होने का अर्थ यह नहीं है कि जिले के प्रत्येक शैक्षणिक संस्थान पर बिना किसी अपवाद के एक ही नियम लागू होगा। जहां उच्च शिक्षण संस्थानों या अन्य श्रेणियों का प्रश्न हो, वहां संबंधित आदेश में दर्ज शर्तों को ही निर्णायक माना जाना चाहिए।

नोएडा में सभी स्कूलों की छुट्टी नहीं, मतदाताओं के लिए अलग व्यवस्था

गौतम बुद्ध नगर में तस्वीर अलग बताई गई है। यहां 23 अक्टूबर को जिले के सभी स्कूलों को बंद रखने की सामान्य व्यवस्था का उल्लेख नहीं है। इसके बजाय मेरठ खंड के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के पात्र एवं पंजीकृत मतदाताओं को मतदान करने के लिए विशेष आकस्मिक अवकाश देने की व्यवस्था बताई गई है।

इसका अर्थ स्पष्ट है: मतदान के लिए दी जाने वाली छुट्टी और पूरे जिले में स्कूल बंद रखने का आदेश दो अलग-अलग बातें हैं। किसी कर्मचारी को मतदान के लिए अवकाश मिलने की व्यवस्था से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि उसके बच्चे का स्कूल भी बंद रहेगा या जिले के सभी सरकारी और निजी कार्यालयों में कामकाज स्थगित रहेगा।

इसी तरह, केवल शिक्षक होने, किसी शिक्षण संस्थान में काम करने या गौतम बुद्ध नगर में निवास करने भर से किसी व्यक्ति को संबंधित निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता नहीं माना जा सकता। इस विशेष व्यवस्था का लाभ लेने के लिए संबंधित निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में पंजीकरण और मतदान की पात्रता महत्वपूर्ण है।

इसलिए नोएडा के अभिभावकों, शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों को अपने-अपने संस्थान से स्पष्ट जानकारी लेनी चाहिए। स्कूलों के मामले में विद्यालय प्रबंधन या संबंधित शिक्षा विभाग की सूचना और कर्मचारियों के मामले में नियोक्ता की ओर से जारी निर्देश देखना जरूरी है। छुट्टी को लेकर अनुमान लगाने के बजाय लिखित सूचना पर भरोसा करना अधिक सुरक्षित रहेगा।

सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान, समय का रखें ध्यान

उपलब्ध जानकारी के अनुसार मेरठ खंड स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव के लिए 23 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान निर्धारित है। पात्र मतदाताओं को अपने मतदान केंद्र, मतदाता सूची में दर्ज विवरण और मतदान संबंधी निर्देशों की पहले से जांच कर लेनी चाहिए।

मतदान के लिए मिलने वाली छुट्टी का उद्देश्य पात्र मतदाताओं को अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने का अवसर देना है। इसलिए जिन कर्मचारियों पर यह व्यवस्था लागू होती है, उन्हें अपने नियोक्ता से अवकाश की प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों के बारे में जानकारी लेनी चाहिए। वहीं, संस्थानों को भी लागू आदेश की शर्तों के अनुरूप स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच अनावश्यक विवाद न हो।

यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। मतदान का अधिकार पात्र मतदाता का अधिकार है, लेकिन अवकाश की पात्रता और उसे लेने की प्रक्रिया संबंधित नियमों तथा लागू आदेश के अनुसार निर्धारित होती है। इसलिए किसी भी व्यक्ति को बिना पुष्टि के यह नहीं मानना चाहिए कि उसे स्वतः पूरे दिन की छुट्टी मिल गई है या उसकी अनुपस्थिति हर परिस्थिति में अधिकृत मानी जाएगी।

अभिभावक और कर्मचारी क्या करें?

23 अक्टूबर को लेकर भ्रम से बचने के लिए कुछ बुनियादी बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

  • गाजियाबाद के अभिभावक: अपने बच्चे के विद्यालय में घोषित अवकाश की पुष्टि करें। स्कूल की आधिकारिक सूचना को प्राथमिकता दें।
  • नोएडा के अभिभावक: यह मानकर न चलें कि जिले के सभी स्कूल बंद रहेंगे। संबंधित विद्यालय से छुट्टी की स्थिति स्पष्ट करें।
  • पात्र मतदाता: अपनी मतदाता सूची में पंजीकरण, मतदान केंद्र और मतदान के समय की पुष्टि करें।
  • नौकरीपेशा मतदाता: विशेष आकस्मिक अवकाश के लिए लागू नियम, नियोक्ता के निर्देश और आवश्यक औपचारिकताओं की जानकारी लें।
  • विद्यालय एवं संस्थान प्रबंधन: कर्मचारियों, अभिभावकों और विद्यार्थियों को स्पष्ट सूचना दें, ताकि गलतफहमी या अनावश्यक विवाद की स्थिति न बने।

इन सावधानियों से न केवल छुट्टी को लेकर पैदा होने वाला भ्रम कम होगा, बल्कि मतदान और सामान्य कामकाज के बीच बेहतर समन्वय भी स्थापित किया जा सकेगा।

प्रशासनिक स्पष्टता जरूरी, अफवाहों से बचना भी उतना ही अहम

चुनाव के दौरान सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। साथ ही, छुट्टी से जुड़े आदेशों की स्पष्ट और समय पर जानकारी उपलब्ध होना भी उतना ही आवश्यक है। जब दो पड़ोसी जिलों में अलग-अलग व्यवस्थाएं लागू होने की बात सामने आती है, तब अस्पष्ट या अधूरी सूचनाएं अभिभावकों, कर्मचारियों और संस्थानों के लिए परेशानी पैदा कर सकती हैं।

ऐसी स्थिति में प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से आदेश का दायरा, लागू होने वाली संस्थाओं की श्रेणियां तथा अवकाश की पात्रता स्पष्ट की जानी चाहिए। इससे लोगों को बार-बार अलग-अलग स्रोतों से जानकारी जुटाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और अनावश्यक भ्रम से बचा जा सकेगा।

हालांकि, आधिकारिक आदेश देखे बिना किसी विभाग या संस्थान पर नियमों की अनदेखी का आरोप लगाना उचित नहीं है। किसी भी शिकायत या विवाद की स्थिति में संबंधित आदेश, लिखित सूचना और लागू नियमों के आधार पर ही स्थिति का आकलन किया जाना चाहिए।

गाजियाबाद और नोएडा की छुट्टी को एक नजर से न देखें

23 अक्टूबर को MLC चुनाव के मद्देनजर गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर के लिए बताई गई व्यवस्थाओं में बुनियादी अंतर है। गाजियाबाद में नर्सरी से 12वीं तक के स्कूलों में अवकाश की जानकारी सामने आई है, जबकि नोएडा में संबंधित स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के पात्र एवं पंजीकृत मतदाताओं को मतदान के लिए विशेष आकस्मिक अवकाश देने की व्यवस्था बताई गई है।

ऐसे में गाजियाबाद में स्कूल बंद होने की सूचना को नोएडा पर लागू मान लेना या नोएडा में मतदाताओं के लिए अवकाश की व्यवस्था को जिले के सभी स्कूलों की छुट्टी समझ लेना सही नहीं होगा।

अभिभावकों, शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए सबसे जरूरी संदेश यही है कि छुट्टी का निर्णय अपने जिले और अपने संस्थान पर लागू आधिकारिक आदेश के आधार पर करें। मतदान के अधिकार का इस्तेमाल करें, लेकिन छुट्टी को लेकर किसी अपुष्ट दावे पर भरोसा न करें। स्पष्ट सूचना, नियमों की समझ और समय रहते की गई पुष्टि ही चुनाव के दिन होने वाली अनावश्यक परेशानी से बचने का सबसे बेहतर रास्ता है।

 

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VIKAS TRIPATHI
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