कोलकाता: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने कड़ी कार्रवाई करते हुए ईस्ट बर्दवान जिले की जॉइंट ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (BDO)-कम-असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर (ARO) ज्योत्सना खातून को ड्यूटी में गंभीर लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया है। आयोग का यह कदम स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की उसकी “जीरो टॉलरेंस” नीति का हिस्सा बताया जा रहा है।
ज्योत्सना खातून ईस्ट बर्दवान जिले के खंडघोष डेवलपमेंट ब्लॉक में जॉइंट BDO-कम-ARO के पद पर कार्यरत थीं। उन पर आरोप है कि उन्होंने सत्तारूढ़ ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पक्ष में खुले तौर पर चुनाव प्रचार किया, जो चुनावी नियमों और आचार संहिता का गंभीर उल्लंघन माना जाता है।
मुख्य सचिव को भेजा गया निर्देश
चुनाव आयोग के सचिव सुजीत कुमार मिश्रा ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव दुष्यंत नरियाला को एक आधिकारिक पत्र भेजकर खातून को तुरंत निलंबित करने और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया था।
आयोग ने स्पष्ट किया कि उसके निर्देशों को तुरंत लागू किया जा रहा है और इस संबंध में अनुपालन रिपोर्ट 4 अप्रैल 2026 को सुबह 11 बजे तक आयोग को भेजनी होगी।
ट्रांसफर को लेकर भी उठे सवाल
इसी बीच चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद आयोग द्वारा किए गए अधिकारियों के तबादलों की संख्या, उससे पहले राज्य सरकार द्वारा किए गए बड़े पैमाने के तबादलों की तुलना में काफी कम है।
ECI द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 27 अक्टूबर 2025 को स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) शुरू होने से लेकर 16 मार्च 2026 को चुनाव की घोषणा तक पश्चिम बंगाल सरकार ने कुल 1,370 अधिकारियों का तबादला किया था। इनमें—
97 आईएएस अधिकारी
146 आईपीएस अधिकारी
1,080 पश्चिम बंगाल सिविल सेवा अधिकारी
47 पश्चिम बंगाल पुलिस सेवा अधिकारी शामिल हैं।
चुनाव आयोग के एक अंदरूनी सूत्र के मुताबिक, राज्य सरकार द्वारा किए गए इन बड़े पैमाने के तबादलों से पैदा हुई प्रशासनिक अव्यवस्था को आयोग ने सीमित संख्या में ट्रांसफर करके संतुलित करने की कोशिश की।
जीरो टॉलरेंस नीति लागू
इस बीच पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) के कार्यालय ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए जानकारी दी कि आयोग ने राज्य की सभी 294 विधानसभा सीटों पर होने वाले चुनाव को स्वतंत्र, निष्पक्ष और हिंसा-मुक्त बनाने के लिए “जीरो टॉलरेंस” नीति लागू की है।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव इस महीने के अंत में दो चरणों में होने वाले हैं। ऐसे में चुनाव आयोग लगातार सख्त कदम उठाकर प्रशासनिक तंत्र की निष्पक्षता और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है














