पटना: बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर इंतजार कर रहे नेताओं को फिलहाल और इंतजार करना होगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में प्रस्तावित कैबिनेट विस्तार अब 4 मई के बाद ही होने की संभावना है।
सूत्रों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहे विधानसभा चुनावों के कारण भारतीय जनता पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इन दिनों पूरी तरह चुनावी तैयारियों में व्यस्त है। इसी वजह से बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका है। इन राज्यों में मतगणना 4 मई को होनी है, जिसके बाद ही बिहार में इस दिशा में गतिविधियां तेज होंगी।
जानकारी के अनुसार, बिहार भाजपा के कई वरिष्ठ नेता और संभावित मंत्री भी इन चुनावों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में संभावित मंत्रियों के नामों पर चर्चा नहीं हो पाई है। यही कारण है कि फिलहाल सरकार का दायरा सीमित है।
वर्तमान में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ जेडीयू के दो नेताओं—विजय चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव—ने उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है। विभागों का अस्थायी बंटवारा भी कर दिया गया है, जिसमें भाजपा कोटे के विभाग मुख्यमंत्री के पास हैं, जबकि जेडीयू कोटे के विभाग दोनों उपमुख्यमंत्रियों के बीच बांटे गए हैं।
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि इस बार बिहार सरकार में शक्ति संतुलन पहले से अलग नजर आएगा। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में जहां जेडीयू प्रमुख भूमिका में थी, वहीं अब भाजपा को “बड़े भाई” और जेडीयू को “छोटे भाई” की भूमिका में देखा जा रहा है।
मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर संभावित फॉर्मूले पर भी चर्चा जारी है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा से लगभग 17 और जेडीयू से करीब 15 मंत्री बनाए जा सकते हैं। वहीं सहयोगी दलों—एलजेपी (रामविलास), हम (हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा) और आरएलपी—को भी प्रतिनिधित्व दिए जाने की संभावना है।
बताया जा रहा है कि विभागों का बंटवारा भी पहले की तरह ही किया जा सकता है, यानी जो विभाग पहले जिस दल के पास थे, उन्हें उसी के अनुरूप फिर से आवंटित किया जा सकता है।
फिलहाल, बिहार की राजनीति में सबकी नजर 4 मई के बाद होने वाले घटनाक्रम पर टिकी है, जब चुनाव परिणामों के बाद मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अंतिम फैसला लिया जा सकता है।














