HomeNCR News12 साल तक झाड़ियों और कूड़े के हवाले रही 11.2 KM की...

12 साल तक झाड़ियों और कूड़े के हवाले रही 11.2 KM की सड़क, अब 34.18 करोड़ के बजट ने खोली सिस्टम की नींद! ग्रामीणों की शिकायतों के आगे आखिर झुका नोएडा का तंत्र

“यमुना पुस्ता सड़क की सफाई शुरू होते ही ग्रामीणों में खुशी, लेकिन सवाल बड़ा है—जिस सड़क की बदहाली की शिकायतें 2021 से हो रही थीं, उसकी सुध लेने में सरकारी मशीनरी को इतने साल क्यों लग गए?”

नोएडा: सरकारी व्यवस्था में किसी सड़क को बनाने में जितनी मेहनत नहीं लगती, कभी-कभी उसकी सफाई कराने में उससे कहीं ज्यादा पसीना बहाना पड़ता है। खासकर तब, जब सड़क किसी वीआईपी इलाके की न होकर गांवों और आम जनता की जरूरत से जुड़ी हो। नोएडा में यमुना के किनारे बनी करीब 11.2 किलोमीटर लंबी चार लेन की यमुना मार्जिनल बांध सड़क इसका जीता-जागता उदाहरण बन गई थी। सड़क पर वाहनों की आवाजाही होनी चाहिए थी, लेकिन वर्षों से वहां कंटीली झाड़ियों, कूड़े के ढेर और सरकारी विभागों की जिम्मेदारियों का ऐसा जंगल उग आया था, जिसे काटने की जरूरत सड़क की झाड़ियों से भी ज्यादा थी।

अब करीब 12 वर्षों बाद इस सड़क की सफाई, झाड़ियों की कटाई-छंटाई और मरम्मत का काम तेजी से शुरू हुआ है। सेक्टर-135 स्थित गांव नंगली वाजिदपुर के सामने सिंचाई विभाग की मशीनरी काम करती दिखाई दे रही है। सड़क के दोनों किनारों और बीच में उगी कंटीली झाड़ियों को हटाया जा रहा है। जगह-जगह जमा कूड़े के ढेर भी साफ किए जा रहे हैं। लंबे समय से इस सड़क की बदहाली झेल रहे ग्रामीणों और आसपास के सेक्टरों के निवासियों में काम शुरू होने से खुशी की लहर है।

लेकिन इस कहानी का असली दिलचस्प पहलू सड़क की सफाई नहीं, बल्कि उस सफाई तक पहुंचने का सरकारी सफर है। क्योंकि यहां मामला केवल झाड़ियों का नहीं था, बल्कि जिम्मेदारी से बचने, विभागीय तालमेल की कमी और शिकायतों को जवाबों में उलझाने वाली व्यवस्था का भी था।

सड़क बनी 2014 में, लेकिन रखरखाव की जिम्मेदारी वर्षों तक फाइलों में भटकती रही!

यमुना मार्जिनल बांध यानी यमुना तट बांध पर चार लेन की इस सड़क का निर्माण वर्ष 2014 में नोएडा प्राधिकरण की वित्तीय मदद से कराया गया था। सड़क का उद्देश्य सिर्फ आवागमन का एक और रास्ता तैयार करना नहीं था, बल्कि यमुना किनारे बसे गांवों और नोएडा के सेक्टरों को बेहतर कनेक्टिविटी देना भी था।

सिंचाई विभाग और नोएडा विकास प्राधिकरण के बीच हुए एमओयू की शर्तों के अनुसार सड़क की मरम्मत और अनुरक्षण का कार्य नोएडा प्राधिकरण की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली धनराशि से कराया जाना प्रस्तावित था।

यानी व्यवस्था में जिम्मेदारी और धनराशि का रास्ता पहले से तय था। लेकिन जमीन पर सड़क की हालत देखकर ऐसा लगता था कि एमओयू में सड़क के रखरखाव की बात तो लिख दी गई, मगर उसकी नियमित निगरानी करने की जिम्मेदारी शायद किसी ने गंभीरता से नहीं ली।

सड़क के दोनों तरफ और बीच में कंटीली झाड़ियां फैलती चली गईं। कई स्थानों पर कूड़े के ढेर जमा हो गए। सड़क की उपयोगिता लगातार कम होती गई। स्थानीय लोगों के लिए यह सवाल बन गया कि जब सड़क जनता के लिए बनाई गई है तो उसकी देखभाल के लिए जनता को बार-बार सरकारी दरवाजे क्यों खटखटाने पड़ रहे हैं?

2021 से शिकायतें, 2023 में आईजीआरएस का जवाब और 2025 तक जारी रही बदहाली!

गांव नंगली वाजिदपुर निवासी एवं ग्राम विकास संगठन नोएडा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अशोक चौहान ने इस सड़क की दुर्दशा को लेकर वर्ष 2021 से लगातार शिकायतें करनी शुरू की थीं।

उनका कहना है कि सेक्टर-94 स्थित गांव रायपुर से सेक्टर-135 स्थित गांव नंगली वाजिदपुर तक लगभग 11.2 किलोमीटर लंबी सड़क पर बड़ी-बड़ी कंटीली झाड़ियां उग आई थीं और जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए थे। इसके बावजूद लंबे समय तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।

वर्ष 2023 में उन्होंने मुख्यमंत्री पोर्टल/आईजीआरएस पर शिकायत संख्या 40014123027859 दर्ज कराई। इस शिकायत पर सिंचाई विभाग की ओर से जवाब दिया गया कि पुस्ता बांध सड़क की दैनिक सफाई का कार्य नोएडा प्राधिकरण करता है।

यह जवाब अपने आप में सरकारी कार्यप्रणाली की एक तस्वीर पेश करता है। जनता सड़क की सफाई मांग रही थी और विभागीय जवाब में जिम्मेदारी दूसरे विभाग की तरफ जाती दिखाई दे रही थी।

इसके बाद 31 अगस्त 2024 को अशोक चौहान ने दोबारा मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत संख्या 40014124021755 और 40014124021758 दर्ज कराईं। ये शिकायतें नोएडा प्राधिकरण और सिंचाई विभाग में अलग-अलग दर्ज कराई गई थीं, ताकि दोनों विभागों की जिम्मेदारी स्पष्ट हो सके।

मगर समस्या जस की तस बनी रही।

इसके बाद 28 अगस्त 2025 को एक और शिकायत संख्या 40014125031556 मुख्यमंत्री पोर्टल/आईजीआरएस पर दर्ज कराई गई। शिकायतों का सिलसिला चलता रहा, लेकिन सड़क की हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।

सवाल यह है कि जब सड़क की बदहाली का मामला बार-बार शासन के पोर्टल तक पहुंच रहा था, तब संबंधित विभागों की नियमित निगरानी व्यवस्था कहां थी? क्या सरकारी पोर्टल पर शिकायत का जवाब देना ही समस्या का समाधान मान लिया गया था?

34.18 करोड़ रुपये का बजट, पहली किस्त में करीब 11 करोड़ जारी

लगातार शिकायतों और सड़क की बदहाल स्थिति का संज्ञान लेते हुए नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्री कृष्णा करुणेश के स्तर से यमुना पुस्ता बांध की सफाई और अनुरक्षण कार्य के लिए सिंचाई विभाग को धनराशि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

नोएडा प्राधिकरण ने यमुना मार्जिनल बांध/यमुना तट बांध की चार लेन सड़क की मरम्मत और सफाई के लिए कुल 34.18 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है।

इसमें से पहली किस्त के रूप में लगभग 11 करोड़ रुपये उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के बैंक खाते में भेजे जा चुके हैं।

धनराशि उपलब्ध होने के बाद अब सड़क पर सफाई और मरम्मत का काम शुरू हो गया है। सेक्टर-94 के गांव रायपुर से लेकर सेक्टर-135 के गांव नंगली वाजिदपुर तक सड़क के दोनों तरफ और मध्य में उगी कंटीली झाड़ियों को हटाने तथा कूड़े की सफाई का कार्य प्रगति पर है।

अब उम्मीद की जा रही है कि बजट और विभागीय जिम्मेदारी के बीच वर्षों से फंसी यह सड़क आखिरकार अपनी उपयोगिता वापस हासिल कर सकेगी।

हालांकि, 34.18 करोड़ रुपये के स्वीकृत बजट का वास्तविक लाभ तभी दिखाई देगा, जब सफाई के साथ-साथ सड़क की मरम्मत, नियमित अनुरक्षण और भविष्य में कूड़ा जमा होने से रोकने की स्थायी व्यवस्था भी जमीन पर उतरेगी।

यह सिर्फ पुस्ता नहीं, नोएडा के ट्रैफिक जाम से निकलने का वैकल्पिक रास्ता है

यमुना पुस्ता की यह सड़क केवल आसपास के गांवों के लिए स्थानीय संपर्क मार्ग नहीं है। इसका महत्व नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर बढ़ते यातायात दबाव के संदर्भ में भी काफी बड़ा है।

रायपुर, बख्तावरपुर, असगरपुर, गढ़ी शाहपुर, शाहपुर गोवर्धनपुर, नंगली नंगला, नंगली शाखपुर, नंगली वाजिदपुर, छपरौली और दोस्तपुर मंगरौली समेत आसपास के गांवों के लोग इस मार्ग से लाभान्वित हो सकते हैं।

इसके अलावा सेक्टर-126 से सेक्टर-135 और सेक्टर-168 के निवासियों को भी आवागमन का एक वैकल्पिक विकल्प मिल सकता है।

वर्तमान में एक्सप्रेसवे पर यातायात का दबाव बढ़ने के कारण कई बार लोगों को लंबा जाम झेलना पड़ता है। यदि पुस्ता बांध सड़क को व्यवस्थित, सुरक्षित और सुचारु बनाया जाता है तो स्थानीय यातायात का एक हिस्सा इस वैकल्पिक मार्ग का इस्तेमाल कर सकता है।

इससे एक्सप्रेसवे पर वाहनों का दबाव कम करने में मदद मिलने की संभावना है। वाहनों के जाम में कम फंसने से ईंधन की बर्बादी और अनावश्यक प्रदूषण को भी कम किया जा सकता है।

हालांकि, इसके लिए सड़क की बेहतर स्थिति के साथ पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम, यातायात प्रबंधन और नियमित रखरखाव भी जरूरी होगा।

ग्रामीणों की खुशी के पीछे छिपा एक बड़ा सवाल

सड़क की सफाई शुरू होने से ग्रामीणों में खुशी होना स्वाभाविक है। आखिरकार जिस रास्ते की बदहाली को लेकर वर्षों तक शिकायतें करनी पड़ीं, वहां अब मशीनें और कर्मचारी काम करते दिखाई दे रहे हैं।

लेकिन इस पूरे घटनाक्रम से एक महत्वपूर्ण सवाल भी उठता है।

क्या किसी सार्वजनिक सड़क की सफाई और मरम्मत के लिए नागरिकों को चार-पांच साल तक शिकायतें करनी पड़नी चाहिए? क्या विभागों को सड़क की हालत का पता तभी चलता है, जब कोई व्यक्ति मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराता है? और क्या किसी विभाग की जिम्मेदारी दूसरे विभाग की ओर इशारा करके पूरी हो जाती है?

सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों की असली परीक्षा उद्घाटन, बजट स्वीकृति और प्रेस विज्ञप्तियों में नहीं होती। उनकी असली परीक्षा इस बात से होती है कि आम आदमी को सड़क, पानी, सफाई और यातायात जैसी बुनियादी सुविधाएं समय पर मिल रही हैं या नहीं।

यमुना पुस्ता सड़क की कहानी इसी परीक्षा का एक उदाहरण है।

यहां एक तरफ वर्षों की शिकायतें हैं, दूसरी तरफ विभागीय जवाब हैं और अब तीसरी तरफ करोड़ों रुपये की स्वीकृत धनराशि के बाद शुरू हुआ काम है।

अब सफाई के साथ जवाबदेही भी जरूरी

ग्राम विकास संगठन नोएडा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अशोक चौहान का कहना है कि यमुना पुस्ता बांध सड़क की सफाई और मरम्मत का कार्य शुरू होना आसपास के गांवों और सेक्टरों के निवासियों के लिए राहत की बात है। उन्होंने इस दिशा में पहल करने और सिंचाई विभाग को धनराशि उपलब्ध कराने के लिए नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी कृष्णा करुणेश का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने उम्मीद जताई कि लगभग 11.2 किलोमीटर लंबे इस मार्ग की सफाई और मरम्मत का कार्य निर्धारित गुणवत्ता के साथ पूरा कराया जाएगा, जिससे ग्रामीणों और सेक्टरवासियों को बेहतर आवागमन सुविधा मिल सकेगी।

साथ ही यह भी जरूरी है कि भविष्य में सड़क पर दोबारा कंटीली झाड़ियां न उगें, कूड़े के ढेर न लगें और रखरखाव के नाम पर फिर से वर्षों तक इंतजार न करना पड़े।

क्योंकि विकास का मतलब केवल 34.18 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत करना नहीं, बल्कि उस बजट का असर जनता को सड़क पर दिखाई देना है।

फिलहाल यमुना पुस्ता सड़क पर झाड़ियां कट रही हैं, कूड़ा हट रहा है और ग्रामीणों के चेहरे पर संतोष दिखाई देने लगा है। लेकिन इस सड़क की असली जीत उस दिन होगी, जब लोगों को सफाई के लिए मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत नहीं करनी पड़ेगी।

सरकारी मशीनरी ने देर से ही सही, नींद तोड़ी है। अब देखना यह है कि यह जागरूकता स्थायी साबित होती है या कुछ दिनों की सफाई के बाद व्यवस्था फिर उसी पुरानी नींद में चली जाती है।

फिलहाल ग्रामीणों की उम्मीद यही है कि यमुना पुस्ता पर अब झाड़ियों का नहीं, विकास और सुचारु यातायात का रास्ता खुले।

- Advertisement -
Your Dream Technologies
VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
VIKAS TRIPATHI भारत देश की सभी छोटी और बड़ी खबरों को सामने दिखाने के लिए "पर्दाफास न्यूज" चैनल को लेके आए हैं। जिसके लोगो के बीच में करप्शन को कम कर सके। हम देश में समान व्यवहार के साथ काम करेंगे। देश की प्रगति को बढ़ाएंगे।
RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments