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28 MLC सीटों पर महासंग्राम आज: यूपी में BJP-सपा की साख दांव पर, बिहार से महाराष्ट्र और कर्नाटक तक चुनावी घमासान

“उत्तर प्रदेश की 11 सीटों समेत चार राज्यों में विधान परिषद चुनाव के लिए मतदान; शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के फैसले पर टिकी निगाहें, निष्पक्ष चुनाव और मतदाताओं की सुरक्षा को लेकर सियासी टकराव तेज”

लखनऊ/पटना/मुंबई/बेंगलुरु, 23 अक्टूबर। देश के चार राज्यों—उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक—में आज विधान परिषद की कुल 28 सीटों के लिए मतदान हो रहा है। सुबह 8 बजे से शुरू होकर शाम 4 बजे तक चलने वाली मतदान प्रक्रिया के बीच राजनीतिक दलों की प्रतिष्ठा, संगठनात्मक ताकत और मतदाताओं के बीच उनकी स्वीकार्यता की परीक्षा होगी। इन चुनावों में सबसे ज्यादा निगाहें उत्तर प्रदेश पर टिकी हैं, जहां विधान परिषद की 11 सीटों के लिए मुकाबला हो रहा है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच आरोप-प्रत्यारोप ने चुनावी माहौल को और गरमा दिया है।

यह चुनाव केवल विधान परिषद की सीटें जीतने का सवाल नहीं है। शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं का रुख राजनीतिक दलों को उनके संगठन, जनसंपर्क और नीतियों के प्रति समर्थन का संकेत भी दे सकता है। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इसे राजनीतिक ताकत परखने के एक अहम अवसर के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इन चुनावों के नतीजों को सीधे विधानसभा चुनाव का परिणाम मानना जल्दबाजी होगी, लेकिन इनके राजनीतिक संदेश को नजरअंदाज करना भी आसान नहीं होगा।

चार राज्यों में एक साथ हो रही इस चुनावी प्रक्रिया के बीच सबसे अहम सवाल यही है कि मतदान कितना स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी रहता है। मतदाता सूची की त्रुटियों, मतदान में कथित बाधाओं और राजनीतिक दबाव को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता की कसौटी पर प्रशासन और राजनीतिक दल, दोनों होंगे।

यूपी की 11 सीटों पर मुकाबला, BJP-सपा के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई

उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों में पांच स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। स्नातक सीटों में आगरा, मेरठ, इलाहाबाद-झांसी, लखनऊ और वाराणसी क्षेत्र शामिल हैं। वहीं, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में लखनऊ, काशी, आगरा, गोरखपुर-फैजाबाद, बरेली-मुरादाबाद और मेरठ क्षेत्र में मतदान हो रहा है।

इन निर्वाचन क्षेत्रों में आम विधानसभा चुनावों की तरह प्रत्येक वयस्क नागरिक मतदान नहीं करता, बल्कि संबंधित निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में पंजीकृत पात्र स्नातक और शिक्षक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं। इसलिए यहां उम्मीदवारों की व्यक्तिगत पहुंच, शिक्षक और शिक्षित वर्ग के मुद्दे, स्थानीय संगठन तथा मतदाताओं से सीधा संपर्क निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

BJP और सपा के लिए यह मुकाबला इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि दोनों दल 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अपने समर्थक आधार और राजनीतिक प्रभाव का आकलन करना चाहेंगे। BJP के सामने अपनी संगठनात्मक पकड़ बनाए रखने की चुनौती है, जबकि सपा इस चुनाव को सत्तारूढ़ दल के खिलाफ समर्थन जुटाने के अवसर के रूप में देख रही है।

हालांकि, विधान परिषद के इन चुनावों का सामाजिक और राजनीतिक आधार विधानसभा चुनाव से अलग है। इसलिए यहां मिलने वाला समर्थन व्यापक जनमत का पूर्ण प्रतिनिधित्व नहीं करता। फिर भी, खास निर्वाचन क्षेत्रों में परिणाम राजनीतिक दलों की रणनीति और आगामी चुनावी तैयारियों को प्रभावित कर सकते हैं।

मतदाता सूची की गलती पर वोट का अधिकार नहीं छिनेगा

उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची में नाम या अन्य विवरणों में मामूली लिपिकीय अथवा प्रिंटिंग संबंधी त्रुटियों के आधार पर किसी पात्र मतदाता को मतदान से वंचित नहीं किया जाएगा। इस संबंध में सभी संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।

यह निर्देश ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब चुनावी प्रक्रिया से पहले मतदाता सूची में गलतियों और दोहरे नामों को लेकर राजनीतिक आरोप सामने आए हैं। मतदान के दिन किसी मतदाता को केवल ऐसी छोटी गलती के कारण परेशानी नहीं होनी चाहिए, जिसे निर्धारित नियमों के तहत पहचान और सत्यापन के जरिए दूर किया जा सकता है।

लेकिन इस निर्देश की वास्तविक परीक्षा मतदान केंद्रों पर होगी। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि मतदान अधिकारी नियमों का पालन करें, पात्र मतदाताओं की पहचान की प्रक्रिया स्पष्ट रहे और किसी भी शिकायत का समय पर समाधान हो। दूसरी ओर, मतदाताओं को भी निर्धारित पहचान और अन्य आवश्यक दस्तावेजों के साथ मतदान केंद्र पहुंचना चाहिए।

लोकतंत्र में मतदान का अधिकार केवल घोषणा से सुरक्षित नहीं होता; उसकी असली गारंटी मतदान केंद्र पर निष्पक्ष और समान व्यवहार से मिलती है।

सपा का आरोप: समर्थक मतदाताओं को डराने की कोशिश

मतदान से पहले समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाया है कि प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में उसके समर्थक मतदाताओं को डराने और मतदान से रोकने की कोशिश की जा रही है। पार्टी ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मामले में तत्काल हस्तक्षेप और स्वतंत्र, निष्पक्ष तथा भयमुक्त मतदान सुनिश्चित कराने की मांग की है।

सपा के ज्ञापन में कानपुर नगर, कानपुर देहात और उन्नाव समेत कई जिलों में कथित तौर पर समर्थक मतदाताओं को निशाना बनाए जाने का आरोप लगाया गया है। पार्टी का दावा है कि कुछ स्थानों पर पुलिसकर्मियों के जरिए मतदाताओं पर दबाव बनाया जा रहा है और उन्हें मतदान के दिन घर से बाहर न निकलने की हिदायत दी जा रही है। सपा ने फर्जी मुकदमों में फंसाने और गिरफ्तारी की धमकी दिए जाने के आरोप भी लगाए हैं।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना आवश्यक है। फिलहाल इन्हें समाजवादी पार्टी के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। यदि किसी स्थान पर मतदाताओं को धमकाने, अनुचित दबाव बनाने या उनके मतदान के अधिकार में बाधा डालने की शिकायत सही पाई जाती है, तो निर्वाचन अधिकारियों को निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।

किसी भी राजनीतिक दल के समर्थक को केवल उसकी राजनीतिक पसंद के कारण डराया या रोका नहीं जा सकता। इसी तरह, शिकायतों की जांच भी तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर होनी चाहिए, न कि राजनीतिक आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति या अधिकारी को दोषी मान लिया जाए।

अखिलेश यादव का BJP पर हमला, आचार संहिता को लेकर सवाल

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी BJP पर चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन और अधिकारियों तथा स्कूल-कॉलेज प्रबंधन पर दबाव डालकर शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में जीत हासिल करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है।

इन आरोपों के बीच निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। आयोग तथा जिला निर्वाचन अधिकारियों को राजनीतिक दलों की शिकायतों पर समान मानदंडों के तहत कार्रवाई करनी होगी। यदि कोई शिकायत निराधार है, तो तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। यदि उल्लंघन प्रमाणित होता है, तो संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।

चुनावी निष्पक्षता का अर्थ केवल मतदान करा देना नहीं, बल्कि ऐसी परिस्थितियां उपलब्ध कराना भी है जिनमें मतदाता बिना किसी भय, दबाव या अनुचित प्रभाव के अपनी पसंद का उम्मीदवार चुन सके। निष्पक्षता को लेकर उठने वाले सवालों का सबसे प्रभावी जवाब पारदर्शी प्रक्रिया, शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण और स्पष्ट प्रशासनिक कार्रवाई ही है।

आगरा में मतदाता सूची पर सवाल, फॉर्म-17सी की भी मांग

आगरा खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में कथित तौर पर दोहरे नाम और नामों में त्रुटियों का मुद्दा भी सियासी विवाद का हिस्सा बना हुआ है। सपा ने आशंका जताई है कि ऐसी गड़बड़ियों से मतदाताओं को परेशानी हो सकती है। पार्टी ने मांग की है कि किसी भी पात्र मतदाता को मतदान से वंचित न किया जाए।

इसके साथ ही पार्टी ने मतदान समाप्त होने के बाद प्रत्येक बूथ पर पड़े मतों का विवरण देने वाला फॉर्म-17सी मतदान एजेंटों को उपलब्ध कराने की मांग भी की है। इस मांग के संदर्भ में संबंधित निर्वाचन के लिए लागू नियमों और आयोग के निर्देशों के अनुसार प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। पारदर्शिता के लिए आवश्यक अभिलेखों का उचित रखरखाव और अधिकृत प्रतिनिधियों को नियमानुसार जानकारी उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है।

मतदाता सूची की शुद्धता, मतदान केंद्रों पर प्रक्रिया का सही पालन और मतों की गिनती में पारदर्शिता—ये तीनों चुनाव की विश्वसनीयता के अहम आधार हैं। राजनीतिक दलों को शिकायतों के समाधान के लिए निर्धारित प्रक्रिया का उपयोग करना चाहिए और प्रशासन को किसी भी वैध शिकायत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

लखनऊ में शराब की दुकानें बंद, मुरादाबाद में स्कूलों को अवकाश

मतदान के मद्देनजर लखनऊ में 23 अक्टूबर को शुष्क दिवस घोषित किया गया है। जिला प्रशासन के आदेश के अनुसार शराब और अन्य मादक पदार्थों की बिक्री पर प्रतिबंध लागू रहेगा। यह आदेश संबंधित लाइसेंसधारकों और निर्धारित श्रेणियों के प्रतिष्ठानों पर भी लागू होगा।

वहीं, बरेली-मुरादाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मतदान के कारण मुरादाबाद जिले में नर्सरी से कक्षा 12वीं तक के स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। प्रशासन ने शिक्षण संस्थानों को आदेश का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया के दौरान लागू प्रशासनिक निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करना है। संबंधित संस्थानों और कारोबारियों को अपने क्षेत्र में लागू आदेशों का पालन करना होगा।

बिहार की आठ सीटों पर 150 उम्मीदवार, पटना स्नातक सीट चर्चा में

बिहार में विधान परिषद की आठ सीटों पर मतदान हो रहा है। इनमें चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं—पटना स्नातक, दरभंगा स्नातक, तिरहुत स्नातक, कोसी स्नातक, पटना शिक्षक, दरभंगा शिक्षक, तिरहुत शिक्षक और सारण शिक्षक।

उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के अनुसार, 5.33 लाख से अधिक मतदाता इस चुनाव में भाग लेने के पात्र हैं और कुल 150 उम्मीदवार मैदान में हैं। मतदान सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक होगा, जबकि मतगणना 27 अक्टूबर को निर्धारित है।

बिहार में पटना स्नातक सीट खास चर्चा में है। यहां जदयू उम्मीदवार नीरज सिंह के मुकाबले जन सुराज के उम्मीदवार अनुज सिंह के समर्थन में जदयू विधायक अनंत सिंह के सक्रिय होने की खबरों ने राजनीतिक समीकरण को दिलचस्प बना दिया है। इस घटनाक्रम को जदयू के लिए चुनौती के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि इसके वास्तविक चुनावी प्रभाव का आकलन नतीजों के बाद ही किया जा सकेगा।

महाराष्ट्र की पांच और कर्नाटक की चार सीटों पर भी मतदान

महाराष्ट्र में विधान परिषद की पांच सीटों के लिए मतदान हो रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 182 उम्मीदवार मैदान में हैं और 10,68,072 मतदाता 2,419 मतदान केंद्रों पर अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। चुनाव में सत्तारूढ़ महायुति और विपक्षी महा विकास अघाड़ी के बीच मुकाबला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

BJP ने नागपुर स्नातक, पुणे स्नातक और पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवार उतारे हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने छत्रपति संभाजीनगर स्नातक सीट से, जबकि शिवसेना ने अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार खड़ा किया है। इन सीटों पर नतीजे संबंधित दलों की स्थानीय राजनीतिक पकड़ और संगठनात्मक मजबूती के संकेत दे सकते हैं।

कर्नाटक में भी विधान परिषद की चार सीटों के लिए मतदान हो रहा है। इनमें दो स्नातक और दो शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। इन सीटों में से तीन पहले BJP और एक कांग्रेस के पास थी। ऐसे में मुकाबले को राज्य में कांग्रेस और NDA के बीच राजनीतिक ताकत की परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है।

आज का सबसे बड़ा सवाल: मतदाता बेखौफ वोट डाल पाएंगे?

चार राज्यों की 28 सीटों पर हो रहा मतदान राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन चुनाव की सबसे बड़ी कसौटी किसी पार्टी की जीत या हार से आगे जाती है। असली सवाल है कि क्या प्रत्येक पात्र मतदाता बिना दबाव के मतदान कर सकेगा, क्या शिकायतों पर निष्पक्ष कार्रवाई होगी और क्या पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के मुताबिक संपन्न होगी।

उत्तर प्रदेश में BJP और सपा के बीच बढ़ता टकराव इस चुनाव को अतिरिक्त राजनीतिक महत्व दे रहा है। बिहार में उम्मीदवारों के समीकरण, महाराष्ट्र में गठबंधन की ताकत और कर्नाटक में दलों की स्थिति भी परिणामों को दिलचस्प बना सकती है। लेकिन किसी भी राज्य में आरोपों को प्रमाणित तथ्य मानना या मतदान से पहले जीत-हार का फैसला सुना देना उचित नहीं होगा।

अब नजरें मतदान की प्रक्रिया, निर्वाचन अधिकारियों की कार्रवाई और मतगणना पर हैं। 27 अक्टूबर को निर्धारित मतगणना के बाद तस्वीर स्पष्ट होगी कि शिक्षक और स्नातक मतदाताओं ने किसे समर्थन दिया। फिलहाल लोकतंत्र की असली परीक्षा मतदान केंद्रों पर है—जहां नारे नहीं, बल्कि मतदाता का स्वतंत्र निर्णय सबसे महत्वपूर्ण होना चाहिए।

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VIKAS TRIPATHI
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