“राजधानी के सभी 12 जोनों में चला व्यापक अभियान, 22 कारण बताओ नोटिस और 4 ध्वस्तीकरण आदेश जारी; PG भवनों के सर्वे में अब तक 1,243 इमारतें चिन्हित”
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में अनधिकृत निर्माण, भवन नियमों के उल्लंघन और जर्जर व खतरनाक इमारतों के खिलाफ नगर निगम दिल्ली (MCD) ने अपना प्रवर्तन अभियान तेज कर दिया है। दिल्ली के सभी 12 जोनों में चलाए गए व्यापक अभियान के दौरान निगम की टीमों ने 34 भवनों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की, जबकि 17 संपत्तियों को सील कर दिया गया। इसके साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वाले संपत्ति मालिकों के खिलाफ 22 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए और 4 ध्वस्तीकरण आदेश भी पारित किए गए।
MCD अधिकारियों के मुताबिक, अभियान का मकसद केवल अवैध निर्माण हटाना नहीं, बल्कि राजधानी में ऐसे भवनों की पहचान कर उन पर कार्रवाई करना भी है, जो अपनी जर्जर या असुरक्षित स्थिति के कारण आम लोगों के लिए खतरा बन सकते हैं। निगम ने साफ संकेत दिया है कि अनधिकृत निर्माण और सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाली संपत्तियों के खिलाफ कार्रवाई आने वाले दिनों में भी जारी रहेगी।
एक दिन पहले भी 17 संपत्तियों पर चला था बुलडोजर
MCD की कार्रवाई का सिलसिला यहीं नहीं रुका। इससे एक दिन पहले भी राजधानी के विभिन्न इलाकों में व्यापक प्रवर्तन अभियान चलाया गया था। उस दौरान दिल्ली के मास्टर प्लान और भवन उपनियमों का उल्लंघन करने वाली 17 संपत्तियों को ध्वस्त किया गया था। वहीं, 5 अन्य संपत्तियों को सील किया गया था।
निगम के अनुसार, अभियान के दौरान ऐसे मामलों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जहां बिना अनुमति निर्माण किया गया है, संपत्ति का इस्तेमाल स्वीकृत उद्देश्य के विपरीत किया जा रहा है या भवन की स्थिति जर्जर और खतरनाक हो चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की संपत्तियों की पहचान कर चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई की जा रही है।
जामा मस्जिद से द्वारका तक कार्रवाई
ताजा अभियान के दौरान दिल्ली के कई प्रमुख इलाकों में निगम की टीमें पहुंचीं। जामा मस्जिद इलाके की गली गोंडनी वाली, कूचा चेलन स्थित संपत्ति संख्या 1412 पर ध्वस्तीकरण कार्रवाई की गई। यहां ग्राउंड फ्लोर की छत के दो पैनल और एक पार्टिशन दीवार को पुलिस की मौजूदगी में तोड़ा गया।
इसी तरह बाजार सीताराम स्थित संपत्ति संख्या 3881, सड़क प्रेम नारायण में भी अनधिकृत निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की गई। निगम की टीमों ने मौके पर पहुंचकर नियमों के विपरीत किए गए निर्माण को हटाया।
इसके अलावा विकास नगर और सेक्टर-17, द्वारका में खतरनाक घोषित की गई संपत्तियों पर भी कार्रवाई की गई। MCD के मुताबिक, इन भवनों को लेकर सुरक्षा संबंधी जोखिम सामने आया था, जिसके बाद निगम की प्रवर्तन टीमों ने मौके पर पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई की।
राणा प्रताप बाग में RCC छत के पैनल तोड़े
राजधानी के राणा प्रताप बाग इलाके में भी निगम की कार्रवाई काफी व्यापक रही। संपत्ति संख्या C-1/19 में ध्वस्तीकरण के दौरान तीसरी मंजिल की RCC छत के चार पैनल और पहली मंजिल के RCC स्लैब के एक पैनल को तोड़ा गया।
कार्रवाई के दौरान गैस कटर की मदद से सरिया काटा गया। इसके अलावा दूसरी मंजिल की ईंट की दीवारों को भी हटाया गया। निगम की टीमों ने भवन के उन हिस्सों को निशाना बनाया, जो अनधिकृत निर्माण या भवन की सुरक्षा से जुड़े नियमों के दायरे में आ रहे थे।
मॉडल टाउन में भी तोड़े गए RCC स्लैब
इसी क्रम में मॉडल टाउन के सरदार नगर में स्थित संपत्ति संख्या D-2A पर भी निगम की टीम ने कार्रवाई की। यहां RCC स्लैब के तीन पैनल ध्वस्त किए गए और गैस कटर की सहायता से सरिया काटा गया।
MCD अधिकारियों के मुताबिक, इस तरह की कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य उन निर्माणों को हटाना है, जो भवन नियमों का उल्लंघन करने के साथ-साथ संरचनात्मक सुरक्षा के लिए भी चिंता पैदा करते हैं।
अब PG भवन भी MCD के रडार पर
खतरनाक और अनधिकृत भवनों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ MCD ने राजधानी में पेइंग गेस्ट (PG) आवासीय भवनों का व्यापक सर्वे भी शुरू किया है। इस सर्वे का उद्देश्य दिल्ली में संचालित PG भवनों का व्यवस्थित डेटाबेस तैयार करना और ऐसे भवनों की पहचान करना है, जहां बड़ी संख्या में लोगों के रहने के कारण सुरक्षा संबंधी जोखिम अधिक हो सकता है।
अब तक किए गए सर्वे में करीब 1,243 भवनों की पहचान हुई है, जहां PG की सुविधा संचालित हो रही है। इन भवनों में लगभग 24 हजार लोग रह रहे हैं। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के एक साथ रहने के कारण भवनों की संरचनात्मक स्थिति और सुरक्षा मानकों की जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
MCD का यह सर्वे खास तौर पर उन इमारतों पर केंद्रित है, जहां भवन की ऊंचाई, निर्माण की प्रकृति या संरचनात्मक स्थिति के कारण जोखिम की आशंका अधिक हो सकती है।
पांच से ज्यादा मंजिल वाली इमारतों पर खास नजर
सर्वे के दौरान MCD ऐसे PG भवनों को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित कर रहा है, जो संरचनात्मक रूप से अधिक संवेदनशील हो सकते हैं। इनमें RCC फ्रेम वाली पांच से अधिक मंजिल की इमारतें और लोड-बेयरिंग ईंट की दीवारों वाली चार से अधिक मंजिल की इमारतें शामिल हैं।
निगम की टीमें सर्वे के दौरान भवनों की मौजूदा स्थिति का आकलन कर उन्हें अलग-अलग श्रेणियों में रख रही हैं। इनमें ऐसे भवन शामिल हैं जिन्हें देखने में सुरक्षित पाया गया है, ऐसे भवन जिन्हें मामूली मरम्मत की जरूरत है, व्यापक मरम्मत की आवश्यकता वाले भवन और वे भवन जो संवेदनशील अथवा खतरनाक श्रेणी में आते हैं।
इस वर्गीकरण का उद्देश्य यह तय करना है कि किस भवन में केवल निगरानी या मामूली सुधार की जरूरत है और किन इमारतों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई आवश्यक है।
10 सितंबर तक पूरा करना है PG भवनों का सर्वे
MCD को दिल्लीभर में PG भवनों का सर्वे 10 सितंबर 2026 तक पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। सर्वे पूरा होने के बाद सामने आने वाली रिपोर्ट के आधार पर संवेदनशील और नियमों का उल्लंघन करने वाली संपत्तियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी।
निगम के मुताबिक, जिन भवनों में अनधिकृत निर्माण, भवन उपनियमों का उल्लंघन, संरचनात्मक कमजोरी या सुरक्षा से जुड़ी गंभीर समस्या पाई जाएगी, उनके खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर ऐसे भवनों को सील करने, निर्माण हटाने या अन्य वैधानिक कदम उठाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
सिर्फ निर्माण नहीं, लोगों की सुरक्षा भी फोकस में
MCD के इस अभियान को राजधानी में भवन सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले शहर में कई इलाकों में पुराने भवनों के साथ-साथ तेजी से हुए अनधिकृत निर्माण भी चिंता का विषय रहे हैं। ऐसे में निगम की कार्रवाई का सीधा असर भवन मालिकों के साथ उन लोगों की सुरक्षा पर भी पड़ेगा, जो इन इमारतों में रहते या काम करते हैं।
खास तौर पर PG भवनों में बड़ी संख्या में लोगों के रहने के कारण सुरक्षा जांच का महत्व और बढ़ जाता है। किसी भवन में संरचनात्मक कमजोरी होने की स्थिति में हादसे का खतरा केवल संपत्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसमें रहने वाले लोगों की जान भी जोखिम में पड़ सकती है।
MCD अधिकारियों का कहना है कि प्रवर्तन अभियान के तहत नियमों का उल्लंघन करने वाली संपत्तियों पर कार्रवाई के साथ-साथ लगातार निगरानी भी की जा रही है। निगम का लक्ष्य ऐसे भवनों की समय रहते पहचान करना है, जिनमें भविष्य में गंभीर हादसे की आशंका हो सकती है।
आने वाले दिनों में और तेज होगा अभियान
MCD ने संकेत दिया है कि राजधानी में खतरनाक, जर्जर और अवैध भवनों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। अलग-अलग जोनों में चिन्हित संपत्तियों की स्थिति की निगरानी की जा रही है और जहां नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा, वहां कार्रवाई की जाएगी।
ताजा अभियान में 34 भवनों का ध्वस्तीकरण, 17 संपत्तियों की सीलिंग, 22 कारण बताओ नोटिस और 4 ध्वस्तीकरण आदेश इस बात का संकेत हैं कि निगम ने भवन नियमों के उल्लंघन के मामलों में सख्ती बढ़ा दी है। अब PG भवनों का सर्वे पूरा होने के बाद सामने आने वाली रिपोर्ट पर भी नजर रहेगी।
कुल मिलाकर, MCD का मौजूदा अभियान दिल्ली में अवैध निर्माण पर कार्रवाई के साथ-साथ भवन सुरक्षा को लेकर भी बड़ा कदम है। 10 सितंबर तक PG भवनों के सर्वे के बाद तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है कि राजधानी में कितनी इमारतें सुरक्षित हैं और कितनी को मरम्मत, निगरानी या कड़ी कार्रवाई की जरूरत है।














