“पैसे देने के बावजूद वाहन की सुरक्षा पर सवाल, पार्किंग कर्मी पर चाभी सौंपने से पहले सत्यापन न करने का आरोप”
नोएडा। नोएडा के सबसे व्यस्त और प्रमुख व्यावसायिक केंद्र सेक्टर-18 में पार्किंग व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। बीकानेर के पास स्थित सरफेस पार्किंग में एक युवती की कार कथित तौर पर उस समय गायब हो गई, जब वह इंटरव्यू देने गई थी। युवती का आरोप है कि उसने पार्किंग में बाकायदा अपनी गाड़ी खड़ी की, पार्किंग कर्मी को चाभी सौंपी और निर्धारित शुल्क देकर पार्किंग की पर्ची ली। इसके बाद वह इंटरव्यू देने चली गई। लेकिन लौटकर आने पर उसकी कार वहां मौजूद नहीं थी।
मामले में सबसे गंभीर सवाल यह है कि युवती की गैरमौजूदगी में आखिर उसकी कार पार्किंग से बाहर कैसे चली गई और पार्किंग कर्मी ने किस आधार पर किसी व्यक्ति को कार की चाभी सौंप दी?
पार्किंग कर्मी के पास थी चाभी, फिर कार बाहर कैसे गई?
युवती के मुताबिक, जब वह इंटरव्यू देकर वापस लौटी तो उसकी कार पार्किंग स्थल पर नहीं मिली। काफी तलाश करने के बाद उसने पार्किंग कर्मचारियों से पूछताछ की। आरोप है कि इसी दौरान उसे जानकारी मिली कि कोई व्यक्ति पार्किंग कर्मी से चाभी लेकर उसकी कार लेकर चला गया।
युवती का आरोप है कि चाभी लेने वाले व्यक्ति का यह सत्यापन नहीं किया गया कि वह वास्तव में वाहन का मालिक है या नहीं। न तो उसकी पहचान की जांच की गई और न ही कथित तौर पर वाहन सौंपने से पहले पार्किंग पर्ची अथवा किसी अन्य प्रमाण का पर्याप्त सत्यापन किया गया।
अब सवाल यह है कि पार्किंग में वाहन जमा कराने वाले व्यक्ति की गैरमौजूदगी में उसकी कार किसी दूसरे व्यक्ति को किस प्रक्रिया के तहत सौंप दी गई?
पार्किंग शुल्क दिया, पर्ची ली और भरोसे के साथ चली गई युवती
बताया जा रहा है कि युवती अपने जरूरी काम के सिलसिले में सेक्टर-18 पहुंची थी। उसने अपनी कार सरफेस पार्किंग में खड़ी की और पार्किंग कर्मी को चाभी सौंप दी। इसके बदले उसे पार्किंग की पर्ची दी गई और उसने निर्धारित शुल्क भी अदा किया।
पार्किंग शुल्क देने के बाद युवती इंटरव्यू देने चली गई। उसे उम्मीद थी कि पार्किंग में खड़ी उसकी कार सुरक्षित रहेगी और इंटरव्यू खत्म होने के बाद वह सामान्य रूप से अपनी कार लेकर वापस चली जाएगी।
लेकिन लौटने पर कार गायब मिली।
घटना की जानकारी मिलते ही पार्किंग स्थल पर हड़कंप मच गया। युवती ने पार्किंग कर्मचारियों से कार के बारे में जानकारी मांगी। आरोप है कि इसी दौरान चाभी किसी अन्य व्यक्ति को सौंपे जाने की बात सामने आई।
MG Infra Solution के जिम्मे है पार्किंग की जिम्मेदारी
जानकारी के मुताबिक, संबंधित पार्किंग की जिम्मेदारी MG Infra Solution के पास है। युवती के आरोपों के बाद पार्किंग कंपनी की कार्यप्रणाली और कर्मचारियों की जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं।
यदि पार्किंग कर्मी के पास वाहन की चाभी थी और किसी दूसरे व्यक्ति ने कथित तौर पर उसी कर्मी से चाभी लेकर कार निकाल ली, तो कंपनी की ओर से वाहन सुपुर्द करने की निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया क्या थी?
क्या चाभी लेने वाले व्यक्ति से पार्किंग पर्ची मांगी गई? क्या उसकी पहचान की गई? क्या वाहन मालिक से संपर्क करने का प्रयास किया गया? क्या वाहन को पार्किंग से बाहर निकालते समय कोई रिकॉर्ड दर्ज किया गया?
इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
CCTV फुटेज और पार्किंग रिकॉर्ड हो सकते हैं अहम
पूरे मामले में पार्किंग परिसर में लगे CCTV कैमरों की फुटेज महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। यदि घटना के समय CCTV कैमरे चालू थे और रिकॉर्डिंग सुरक्षित है, तो यह पता लगाया जा सकता है कि कार पार्किंग से किस समय निकली और उसे कौन व्यक्ति लेकर गया।
इसके अलावा पार्किंग में वाहन के प्रवेश और निकास का रिकॉर्ड भी जांच का अहम हिस्सा हो सकता है। पार्किंग पर्ची से वाहन के पार्क किए जाने का समय तथा अन्य जानकारी सामने आ सकती है।
जांच में उस समय ड्यूटी पर तैनात पार्किंग कर्मचारियों से पूछताछ और चाभी सौंपे जाने की परिस्थितियों की पड़ताल भी महत्वपूर्ण होगी।
पुलिस का कहना—अभी वाहन मालिक की ओर से शिकायत नहीं
वहीं, इस मामले में नोएडा पुलिस का कहना है कि वाहन मालिक की ओर से अभी तक पुलिस को कोई शिकायत नहीं दी गई है।
पुलिस के मुताबिक, चूंकि मामला कथित तौर पर पार्किंग कर्मियों की लापरवाही से जुड़ा बताया जा रहा है, इसलिए वाहन मालिक और पार्किंग मैनेजमेंट के बीच बातचीत के जरिए मामले को सुलझाने की बात कही गई है।
पुलिस के इस रुख के बाद मामले में एक नया सवाल भी सामने आया है कि यदि वाहन पार्किंग कर्मियों की कथित लापरवाही के चलते गायब हुआ है, तो वाहन मालिक को हुए नुकसान की जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?
हालांकि, फिलहाल पुलिस के पास औपचारिक शिकायत नहीं होने के कारण मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
सुरक्षा के नाम पर आखिर किस बात का शुल्क?
यह मामला केवल एक कार के गायब होने तक सीमित नहीं है। इससे उन तमाम वाहन मालिकों की सुरक्षा और भरोसे का सवाल जुड़ा है, जो पार्किंग शुल्क देकर अपनी गाड़ी पार्किंग में खड़ी करते हैं।
जब वाहन मालिक अपनी कार पार्किंग कर्मी को सौंपता है और उसकी चाभी भी कर्मचारी के पास रहती है, तो स्वाभाविक रूप से उससे वाहन की सुरक्षा की उम्मीद की जाती है।
लेकिन यदि किसी दूसरे व्यक्ति को कथित तौर पर उसी कार की चाभी सौंप दी जाए और उसके मालिक होने की पुष्टि तक न की जाए, तो पूरी पार्किंग व्यवस्था की सुरक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठना लाजिमी है।
नोएडा प्राधिकरण की निगरानी पर भी सवाल
घटना के बाद नोएडा प्राधिकरण की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। सवाल यह है कि पार्किंग संचालकों और उनके कर्मचारियों के लिए वाहन सुरक्षा से जुड़े कौन-कौन से नियम लागू हैं और उनकी निगरानी किस स्तर पर होती है।
क्या पार्किंग कर्मचारी के लिए वाहन निकालने वाले व्यक्ति की पहचान सत्यापित करना अनिवार्य है? क्या पार्किंग पर्ची की जांच की जाती है? क्या CCTV और वाहन प्रवेश-निकास रिकॉर्ड को नियमित रूप से सुरक्षित रखा जाता है?
यदि इन व्यवस्थाओं का पालन अनिवार्य है तो उनका पालन क्यों नहीं हुआ—और यदि कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं है तो पार्किंग में वाहन खड़ा करने वाले लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?
पार्किंग कंपनी की जवाबदेही का सवाल
युवती के आरोपों और पुलिस के बयान के बीच फिलहाल मामले का अगला कदम वाहन मालिक की शिकायत पर निर्भर दिखाई दे रहा है। पुलिस का कहना है कि अभी तक वाहन मालिक की ओर से कोई शिकायत नहीं दी गई है और पार्किंग कर्मियों की कथित लापरवाही को देखते हुए वाहन मालिक तथा पार्किंग मैनेजमेंट के बीच बातचीत से मामले को सुलझाने की बात कही गई है।
लेकिन सवाल यह है कि क्या किसी वाहन मालिक को पार्किंग शुल्क देने के बाद अपनी कार की सुरक्षा को लेकर खुद ही पार्किंग प्रबंधन से विवाद सुलझाना चाहिए?
यदि पार्किंग कर्मी की लापरवाही साबित होती है तो जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया क्या होगी? क्या पार्किंग कंपनी वाहन की क्षतिपूर्ति करेगी? और क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किया जाएगा?
कार गायब होने से ज्यादा बड़ा है भरोसा टूटने का सवाल
सेक्टर-18 नोएडा का प्रमुख व्यावसायिक केंद्र है, जहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग खरीदारी, नौकरी, कारोबार और अन्य कामों के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में पार्किंग व्यवस्था में सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक होनी चाहिए।
इस मामले ने वाहन मालिकों के सामने सीधा सवाल खड़ा कर दिया है—अगर पार्किंग शुल्क देने के बाद वाहन की चाभी भी पार्किंग कर्मी को सौंप दी जाए, फिर भी वाहन की सुरक्षा की गारंटी न हो तो आखिर भरोसा किस पर किया जाए?
फिलहाल वाहन मालिक की ओर से पुलिस को शिकायत दिए जाने की बात सामने नहीं आई है। पुलिस के अनुसार, पार्किंग कर्मियों की कथित लापरवाही को देखते हुए वाहन मालिक और पार्किंग मैनेजमेंट आपसी बातचीत से मामले को सुलझा सकते हैं।
अब देखना यह होगा कि कार बरामद होती है या नहीं, वाहन मालिक की ओर से औपचारिक शिकायत की जाती है या नहीं और यदि पार्किंग कर्मियों की लापरवाही सामने आती है तो MG Infra Solution तथा संबंधित कर्मचारियों की जवाबदेही किस तरह तय की जाती है।
क्योंकि असली सवाल सिर्फ कार के गायब होने का नहीं है—सवाल उस भरोसे का है, जिसके नाम पर वाहन मालिक पार्किंग शुल्क देता है और अपनी कार की चाभी पार्किंग कर्मी के हाथ में सौंपता है।














