Monday, July 6, 2026
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अमेरिकी दबाव में खामेनेई की अंतिम विदाई से 13 देशों ने बनाई दूरी? ईरान की रिपोर्ट ने बढ़ाई वैश्विक कूटनीतिक हलचल

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम विदाई केवल एक धार्मिक और राष्ट्रीय आयोजन नहीं रही, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीति का नया केंद्र बन गई है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम ने दावा किया है कि अमेरिका के कूटनीतिक दबाव के कारण 13 देशों ने अंतिम विदाई समारोह में भाग लेने का फैसला बदल दिया। कुछ देशों ने अपना प्रतिनिधिमंडल पूरी तरह रद्द कर दिया, जबकि कुछ ने वरिष्ठ नेताओं के बजाय निचले स्तर के अधिकारियों को भेजने का प्रयास किया।

हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक किसी अंतरराष्ट्रीय एजेंसी या संबंधित देशों ने नहीं की है। इसके बावजूद यह रिपोर्ट दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गई है क्योंकि इससे अमेरिका, ईरान और अन्य देशों के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव की झलक मिलती है।

अंतिम विदाई बनी अंतरराष्ट्रीय राजनीति का मंच

तेहरान स्थित इमाम खुमैनी ग्रैंड मुसल्ला में आयोजित अंतिम विदाई कार्यक्रम में लाखों ईरानी नागरिकों के साथ कई देशों के प्रतिनिधिमंडल पहुंचे। लेकिन तस्नीम के अनुसार कई ऐसे देश भी थे जिन्होंने अंतिम समय में अपनी भागीदारी वापस ले ली।

रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिका ने विभिन्न देशों से आग्रह किया कि वे इस कार्यक्रम में शामिल न हों क्योंकि इससे अमेरिका के साथ उनके संबंध प्रभावित हो सकते हैं।

अमेरिकी विदेश मंत्री पर गंभीर आरोप

तस्नीम की रिपोर्ट के अनुसार, 26 जून को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दुनिया भर में स्थित अमेरिकी दूतावासों और कूटनीतिक मिशनों को विशेष निर्देश भेजे।

इन निर्देशों में कथित तौर पर कहा गया कि जिन देशों में अमेरिकी दूतावास मौजूद हैं, वहां की सरकारों को समझाया जाए कि यदि वे खामेनेई के अंतिम संस्कार में भाग लेते हैं तो अमेरिका इसे एक “गैर-मित्रवत कदम” मानेगा।

रिपोर्ट का दावा है कि कई देशों को यह संदेश भी दिया गया कि इससे भविष्य में अमेरिका के साथ उनके द्विपक्षीय संबंध प्रभावित हो सकते हैं।

हालांकि अमेरिका की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

विकास सहायता कम करने की चेतावनी?

ईरानी रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि अफ्रीका के कुछ देशों में अमेरिकी राजदूतों ने यह संकेत दिया कि यदि उनके नेता समारोह में शामिल होते हैं तो विकास सहायता (Development Aid) में कटौती की जा सकती है।

इसके अलावा रिपोर्ट में कहा गया कि मार्को रुबियो ने कम से कम पांच अरब देशों के विदेश मंत्रियों से व्यक्तिगत स्तर पर संपर्क किया और उन्हें कार्यक्रम से दूर रहने की सलाह दी।

इन दावों की पुष्टि स्वतंत्र रूप से नहीं हुई है।

किन देशों ने बनाई दूरी?

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कुल 13 देशों ने अपना फैसला बदला।

इनमें शामिल बताए गए हैं—

पूर्वी यूरोप के 3 देश

अफ्रीका के 5 देश

फारस की खाड़ी के 2 अरब देश

पूर्वी एशिया के 2 प्रमुख देश

एक अन्य देश

हालांकि किसी भी देश का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया।

यही कारण है कि इस रिपोर्ट की सत्यता पर कई विशेषज्ञ सवाल भी उठा रहे हैं।

कुछ देशों ने प्रतिनिधिमंडल का स्तर घटाया

रिपोर्ट के अनुसार कई देशों ने पूरी तरह अनुपस्थित रहने के बजाय वरिष्ठ नेताओं की जगह छोटे स्तर के अधिकारियों को भेजने का प्रयास किया।

लेकिन ईरानी अधिकारियों ने कथित तौर पर इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।

कुछ देशों ने जिनेवा और न्यूयॉर्क स्थित अपने मिशनों के माध्यम से ईरान को अपनी अनुपस्थिति का कारण भी बताया।

लाखों लोगों ने दी अंतिम विदाई

रविवार को तेहरान में अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके परिवार के चार सदस्यों के लिए सार्वजनिक अंतिम नमाज़ अदा की गई।

शनिवार से उनका पार्थिव शरीर इमाम खुमैनी ग्रैंड मुसल्ला में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था।

दूसरे दिन भी लाखों लोग अंतिम श्रद्धांजलि देने पहुंचे।

सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रखी गई थी।

नया सुप्रीम लीडर कौन?

खामेनेई के निधन के बाद उनके बेटे मुज्तबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर बनाए जाने की जानकारी सामने आई है।

रिपोर्टों के अनुसार इजराइल से लगातार मिल रही सुरक्षा चुनौतियों और संभावित हमलों के खतरे को देखते हुए मुज्तबा सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रहे।

बताया गया कि वे छह दिनों तक चलने वाले अंतिम विदाई कार्यक्रमों में भी सुरक्षा कारणों से शामिल नहीं हुए।

अमेरिका और ईरान के रिश्ते फिर चर्चा में

ईरान और अमेरिका के बीच दशकों से तनावपूर्ण संबंध रहे हैं।

परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध, क्षेत्रीय संघर्ष, इजराइल का मुद्दा और मध्य-पूर्व की राजनीति दोनों देशों के बीच लगातार टकराव का कारण बने हुए हैं।

ऐसे में यदि ईरानी एजेंसी का दावा सही साबित होता है तो यह अमेरिका द्वारा कूटनीतिक दबाव के एक बड़े उदाहरण के रूप में देखा जाएगा।

हालांकि अभी तक अमेरिका या कथित 13 देशों में से किसी ने इन दावों की पुष्टि नहीं की है।

अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

विदेश नीति के जानकारों का मानना है कि बड़े नेताओं के अंतिम संस्कार अक्सर केवल श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं होते, बल्कि वे वैश्विक कूटनीति का महत्वपूर्ण मंच भी बन जाते हैं।

किस देश का प्रतिनिधि किस स्तर पर शामिल होता है, इससे राजनीतिक संदेश भी निकलते हैं।

इसी वजह से ऐसे आयोजनों में भागीदारी या दूरी दोनों को अंतरराष्ट्रीय संकेत माना जाता है।

सत्यापन अभी बाकी

तस्नीम की रिपोर्ट में कई बड़े दावे किए गए हैं, लेकिन इनमें शामिल देशों के नाम नहीं बताए गए हैं और न ही अमेरिका या अन्य देशों ने इन आरोपों की पुष्टि की है।

इसलिए फिलहाल इन दावों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं माना जा सकता।

आने वाले दिनों में यदि संबंधित देशों या अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से आधिकारिक बयान आता है, तो इस पूरे मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

खामेनेई की अंतिम विदाई ने केवल ईरान ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। ईरानी मीडिया का दावा है कि अमेरिका के दबाव में 13 देशों ने समारोह से दूरी बनाई, लेकिन इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी यह घटनाक्रम इस बात का संकेत देता है कि मध्य-पूर्व की राजनीति और वैश्विक कूटनीति में अमेरिका, ईरान और उनके सहयोगियों के बीच तनाव अब भी गहरा बना हुआ है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं और आधिकारिक बयान वैश्विक राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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