पर्दाफाश न्यूज़ | विशेष रिपोर्ट
नोएडा शहर के रिहायशी इलाकों में तेजी से फैल रहा कबाड़ कारोबार अब लोगों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। कागज, प्लास्टिक, कपड़ा, रबर और अन्य ज्वलनशील सामग्री का भारी मात्रा में भंडारण उन क्षेत्रों में किया जा रहा है, जहां चारों ओर मकान, संकरी गलियां, बाजार और हजारों लोगों की आवाजाही रहती है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई स्थानों पर बिना पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था और आवश्यक अनुमति के कबाड़ गोदाम संचालित किए जा रहे हैं। यदि किसी दिन आग जैसी बड़ी घटना हो जाए, तो हालात भयावह हो सकते हैं।
एक चिंगारी और मच सकती है तबाही
विशेषज्ञों के अनुसार कागज, प्लास्टिक और रबर जैसी सामग्री अत्यधिक ज्वलनशील होती है। ऐसे गोदामों में अक्सर खुले बिजली तार, ओवरलोड कनेक्शन और सुरक्षा मानकों की अनदेखी देखने को मिलती है।
घनी आबादी वाले इलाकों में आग लगने की स्थिति में दमकल वाहनों का घटनास्थल तक पहुंचना भी मुश्किल हो सकता है। ऐसे में कुछ ही मिनटों में आग कई मकानों को अपनी चपेट में ले सकती है।
रिहायशी मकानों को बनाया जा रहा गोदाम?
सूत्रों के अनुसार कुछ मकान मालिक अधिक किराया कमाने के लिए अपने रिहायशी भवनों को कबाड़ गोदामों में बदल रहे हैं। कई जगह मकानों के बेसमेंट, खाली प्लॉट और बहुमंजिला इमारतों में भारी मात्रा में कबाड़ जमा किया जा रहा है।
यदि यह सही है, तो सवाल केवल किरायेदारों पर नहीं बल्कि भवन मालिकों की जिम्मेदारी पर भी खड़ा होता है। क्या भवन किराये पर देने से पहले सुरक्षा मानकों और कानूनी नियमों का पालन सुनिश्चित किया गया?
क्या अग्निशमन विभाग की अनुमति ली गई?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन भवनों में कबाड़ का भंडारण किया जा रहा है, क्या उनके पास अग्निशमन विभाग की अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) है?
क्या नगर निगम, विकास प्राधिकरण और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इन गतिविधियों की अनुमति दी है?
क्या इन स्थलों पर अग्निशमन यंत्र उपलब्ध हैं?
क्या आपातकालीन निकासी की कोई व्यवस्था है?
यदि नहीं, तो यह स्थिति सीधे तौर पर जनसुरक्षा के साथ खिलवाड़ मानी जाएगी।
स्वास्थ्य और पर्यावरण पर भी खतरा
कबाड़ गोदाम केवल आग का खतरा ही नहीं बढ़ाते, बल्कि प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को भी जन्म देते हैं। प्लास्टिक और ई-वेस्ट से निकलने वाला धुआं आसपास रहने वाले लोगों के लिए गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक ऐसे वातावरण में रहने से सांस और त्वचा संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
अब सवाल प्रशासनिक व्यवस्था पर भी खड़े हो रहे हैं—
- क्या शहर में संचालित कबाड़ गोदामों का कभी सर्वे हुआ?
- कितनों के पास वैध लाइसेंस है?
- कितने गोदामों के पास अग्निशमन सुरक्षा प्रमाणपत्र मौजूद है?
- यदि नियमों का उल्लंघन हो रहा है, तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई इलाकों में वर्षों से यह कारोबार चल रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की ओर से प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आती।
“पर्दाफाश न्यूज़”की मांग
संयुक्त जांच अभियान चलाकर हो सख्त कार्रवाई
‘पर्दाफाश न्यूज़’ प्रशासन से मांग करता है कि नगर निगम, अग्निशमन विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, बिजली विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम बनाकर शहरभर में विशेष अभियान चलाया जाए।
सभी कबाड़ गोदामों और भंडारण स्थलों की जांच कर यह सुनिश्चित किया जाए कि वे सुरक्षा मानकों और कानूनी नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं। जहां भी बिना अनुमति ज्वलनशील सामग्री का भंडारण मिले, वहां तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की जाए।
क्योंकि सवाल केवल नियमों का नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की सुरक्षा और जीवन का है|














