अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने रविवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार किए गए सभी आठ आरोपियों के आवासों पर एक साथ छापेमारी की। स्थानीय मजिस्ट्रेटों की मौजूदगी में की गई इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, नकदी, आभूषण और संपत्ति से जुड़े कागजात बरामद किए हैं। बरामद सामग्री की जांच जारी है और पुलिस यह तय कर रही है कि आरोपियों की आगे पुलिस रिमांड ली जाएगी या नहीं।
किन-किन आरोपियों के यहां हुई छापेमारी?
पुलिस ने राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू, अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव, मनीष यादव और करुणेश पांडे के आवासों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। मिल्कीपुर क्षेत्र में स्थित अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा के पैतृक घरों की भी तलाशी ली गई।
सूत्रों के अनुसार, टिन्नू के घर से कुछ आभूषण, नकदी और संपत्ति से संबंधित दस्तावेज बरामद हुए हैं, जबकि अन्य आरोपियों के यहां से भी कई महत्वपूर्ण दस्तावेज पुलिस के हाथ लगे हैं। छापेमारी के दौरान आरोपियों के परिजनों के बयान भी दर्ज किए गए।
कैसे सामने आया मामला?
राम मंदिर में चढ़ावे की राशि में कथित गबन का मामला 7 जून को उस समय चर्चा में आया, जब समाजवादी पार्टी के नेता तेज नारायण ‘पवन’ पांडे ने आरोप लगाया कि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए लगभग 5 से 7.5 करोड़ रुपये तक के दान में अनियमितता हुई है।
इसके बाद मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। एसआईटी ने 15 से 20 जून के बीच प्रारंभिक जांच की, जिसमें दान की नकदी और मूल्यवान वस्तुओं के प्रबंधन में प्रथम दृष्टया अनियमितताओं के संकेत मिलने की बात सामने आई।
दर्ज हुई एफआईआर
जांच के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत आठ नामजद आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस अब वित्तीय लेन-देन, संपत्तियों और दस्तावेजों की विस्तृत जांच कर रही है।
राम मंदिर ट्रस्ट का बयान
राम मंदिर ट्रस्ट ने इस पूरे घटनाक्रम पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा है कि वह निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं को आश्वस्त किया कि दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए दान प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक मजबूत एवं पारदर्शी बनाया जाएगा।
जांच का अगला चरण
पुलिस बरामद दस्तावेजों, नकदी और अन्य सामग्रियों का मूल्यांकन कर रही है। इसके आधार पर आगे की पूछताछ, वित्तीय ऑडिट और आवश्यकता पड़ने पर आरोपियों की पुलिस रिमांड लेने पर निर्णय लिया जाएगा। जांच एजेंसियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित गबन की वास्तविक राशि कितनी थी, धन का उपयोग किस प्रकार किया गया और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
नोट: यह मामला अभी जांच के अधीन है। पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर और अब तक की जांच के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। आरोप सिद्ध होना अभी शेष है और अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।














