केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर नई दिल्ली के भारत मंडपम में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की, जिसमें NDA के विभिन्न दलों के शीर्ष नेताओं ने भाग लिया और पिछले 12 वर्षों की उपलब्धियों, चुनौतियों तथा भविष्य की रणनीति पर विचार-विमर्श किया।
यह बैठक केवल एक राजनीतिक आयोजन नहीं थी, बल्कि भारत की बदलती राजनीतिक संस्कृति, शासन प्रणाली और विकास मॉडल पर एक व्यापक विमर्श के रूप में भी देखी जा रही है। NDA नेताओं ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व को देश में राजनीतिक स्थिरता, निर्णायक प्रशासन, विकासोन्मुख नीतियों और वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा का प्रमुख आधार बताया।
“पॉलिटिक्स ऑफ परफॉर्मेंस” का नया राजनीतिक मॉडल
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय राजनीति को जातिवाद, वंशवाद और तुष्टिकरण की राजनीति से निकालकर “पॉलिटिक्स ऑफ परफॉर्मेंस” अर्थात् प्रदर्शन आधारित राजनीति की दिशा में अग्रसर किया है।
यह टिप्पणी भारतीय लोकतंत्र में आए उस परिवर्तन को दर्शाती है, जिसमें मतदाता अब केवल राजनीतिक नारों या पारंपरिक सामाजिक समीकरणों के आधार पर नहीं, बल्कि सरकार के कार्यों, योजनाओं और परिणामों के आधार पर निर्णय लेने लगे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी लगातार तीसरी बार केंद्र की सत्ता में लौटे हैं, जो इस बात का संकेत माना जा रहा है कि जनता ने उनके शासन मॉडल को व्यापक स्वीकृति प्रदान की है।
चंद्रबाबू नायडू का संदेश: “मोदी इस सदी का नेतृत्व कर रहे हैं”
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे केवल भारत ही नहीं, बल्कि 21वीं सदी के वैश्विक नेतृत्व की दिशा को भी प्रभावित कर रहे हैं।
नायडू ने विशेष रूप से बुनियादी ढांचे, डिजिटल परिवर्तन, गरीब कल्याण और प्रशासनिक सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि मोदी सरकार ने विकास के नए मानदंड स्थापित किए हैं। उनका वक्तव्य इस तथ्य की ओर संकेत करता है कि NDA के सहयोगी दल भी मोदी नेतृत्व को राष्ट्रीय विकास के केंद्रीय स्तंभ के रूप में देख रहे हैं।
राजनीतिक स्थिरता: 12 वर्षों की सबसे बड़ी उपलब्धि
स्वतंत्र भारत के राजनीतिक इतिहास में गठबंधन सरकारों का दौर अक्सर अस्थिरता, नीति-गतिरोध और अल्पकालिक निर्णयों से जुड़ा रहा है। इसके विपरीत, मोदी सरकार के 12 वर्षों को नीति निरंतरता, निर्णायक नेतृत्व और दीर्घकालिक योजनाओं के लिए याद किया जा रहा है।
The Union Cabinet celebrates a historic milestone.
Members greet PM Shri @narendramodi Ji with a standing ovation for becoming India's longest-serving elected Prime Minister and passes a resolution of congratulation. pic.twitter.com/QCTFi45Mxg
— Amit Shah (@AmitShah) June 10, 2026
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का कालखंड राजनीतिक स्थिरता, प्रभावी नीति निर्माण और उसके सफल क्रियान्वयन के लिए स्वर्णाक्षरों में दर्ज होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक स्थिरता ने बड़े आर्थिक सुधारों, आधारभूत संरचना परियोजनाओं, रक्षा आधुनिकीकरण और डिजिटल क्रांति को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
विकसित भारत 2047: केवल लक्ष्य नहीं, राष्ट्रीय संकल्प
बैठक का एक प्रमुख विषय “विकसित भारत 2047” रहा। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा प्रस्तुत यह दृष्टिकोण भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूर्ण होने तक देश को विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में पहुंचाने का रोडमैप माना जाता है।
इस लक्ष्य के अंतर्गत निम्न प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है—
विश्वस्तरीय आधारभूत संरचना
विनिर्माण एवं औद्योगिक विकास
तकनीकी आत्मनिर्भरता
कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं नवाचार
हरित ऊर्जा
कौशल विकास
महिला एवं युवा नेतृत्व
वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में भारत की भूमिका
अमित शाह ने कहा कि इस लक्ष्य ने भारतीय समाज में दशकों से मौजूद हीन भावना को समाप्त कर आत्मविश्वास और राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा को नई दिशा दी है।
वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा
पिछले 12 वर्षों में भारत की विदेश नीति में भी महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिला है। G20 की अध्यक्षता, वैश्विक संकटों में मध्यस्थ भूमिका, रणनीतिक साझेदारियों का विस्तार और विभिन्न देशों के साथ आर्थिक समझौतों ने भारत की अंतरराष्ट्रीय स्थिति को मजबूत किया है।
बैठक में यह दावा किया गया कि 32 देशों द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्रदान किया गया तथा 38 देशों के साथ व्यापारिक समझौते हुए हैं। यह भारत की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता और वैश्विक प्रभाव का संकेत माना जा रहा है।
आर्थिक परिवर्तन और स्टार्टअप क्रांति
NDA नेताओं ने भारत की अर्थव्यवस्था में आए बदलावों को भी रेखांकित किया। पिछले दशक में—
डिजिटल भुगतान व्यवस्था का अभूतपूर्व विस्तार हुआ।
स्टार्टअप इकोसिस्टम विश्व के सबसे बड़े नेटवर्कों में शामिल हुआ।
निर्यात में नए रिकॉर्ड स्थापित हुए।
उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) जैसी योजनाओं ने विनिर्माण क्षेत्र को नई गति दी।
प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) ने कल्याणकारी योजनाओं की पारदर्शिता बढ़ाई।
अमित शाह ने विशेष रूप से अनुसंधान एवं विकास (R&D) तथा स्टार्टअप क्षेत्र में बढ़ते निवेश को भारत की भविष्य की आर्थिक शक्ति का आधार बताया।
महिला और युवा शक्ति पर विशेष जोर
मोदी सरकार की नीतियों में महिलाओं और युवाओं को विकास प्रक्रिया के केंद्र में रखने पर विशेष बल दिया गया है।
NDA नेताओं ने कहा कि महिला सशक्तिकरण, उद्यमिता, शिक्षा, डिजिटल पहुंच और कौशल विकास के माध्यम से भारत की जनसांख्यिकीय शक्ति को आर्थिक शक्ति में बदलने का प्रयास किया जा रहा है।
युवाओं को रोजगार, नवाचार और स्टार्टअप अवसरों से जोड़ना तथा महिलाओं को नेतृत्वकारी भूमिकाओं में आगे बढ़ाना विकसित भारत के विजन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है।
आलोचनाओं और चुनौतियों का भी मूल्यांकन आवश्यक
हालांकि NDA बैठक में सरकार की उपलब्धियों पर जोर दिया गया, लेकिन लोकतांत्रिक दृष्टिकोण से यह भी आवश्यक है कि पिछले 12 वर्षों के दौरान सामने आई चुनौतियों और आलोचनाओं का भी निष्पक्ष मूल्यांकन किया जाए।
रोजगार सृजन, कृषि क्षेत्र की चुनौतियां, महंगाई, सामाजिक ध्रुवीकरण, संघीय ढांचे से जुड़े मुद्दे तथा संस्थागत स्वतंत्रता जैसे विषयों पर विपक्ष लगातार प्रश्न उठाता रहा है।
किसी भी लोकतंत्र की मजबूती इसी में निहित होती है कि उपलब्धियों के साथ-साथ चुनौतियों का भी वस्तुनिष्ठ विश्लेषण किया जाए।
मोदी सरकार के 12 वर्ष भारतीय राजनीति के एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में देखे जा रहे हैं। NDA नेताओं ने इसे राजनीतिक स्थिरता, विकासोन्मुख शासन, वैश्विक प्रतिष्ठा और “विकसित भारत 2047” के संकल्प का कालखंड बताया है।
यह अवधि भारतीय लोकतंत्र में नेतृत्व, नीति निरंतरता और विकास आधारित राजनीति के नए प्रयोगों की भी साक्षी रही है। आने वाले वर्षों में यह स्पष्ट होगा कि विकसित भारत का लक्ष्य किस हद तक मूर्त रूप लेता है, लेकिन इतना निश्चित है कि पिछले 12 वर्षों ने भारत की राजनीतिक और विकासात्मक दिशा को गहराई से प्रभावित किया है।














