लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लंबे समय से पंचायत चुनावों को लेकर चल रहा राजनीतिक और प्रशासनिक असमंजस अब खत्म होने की ओर बढ़ता दिख रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में सरकार ने कुल 12 अहम प्रस्तावों को मंजूरी दे दी। इनमें सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण फैसला त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण से जुड़ा रहा, जिसके जरिए चुनाव प्रक्रिया पर मंडरा रहा कानूनी संकट काफी हद तक दूर होने की संभावना जताई जा रही है।
कैबिनेट के इस फैसले के बाद अब प्रदेश सरकार समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन करेगी। यह आयोग राज्य में ओबीसी आबादी, आरक्षण की वास्तविक स्थिति और प्रतिनिधित्व की समीक्षा करेगा तथा अपनी विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा। इसी रिपोर्ट के आधार पर पंचायत सीटों का आरक्षण और रोटेशन तय किया जाएगा। माना जा रहा है कि इस प्रक्रिया से सुप्रीम कोर्ट की ओर से निर्धारित ट्रिपल टेस्ट की शर्तें भी पूरी हो जाएंगी और पंचायत चुनावों को लेकर उठने वाली कानूनी आपत्तियों की गुंजाइश काफी कम हो जाएगी। प्रस्तावित आयोग की अध्यक्षता हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश को दिए जाने की बात सामने आई है, जबकि इसके अन्य सदस्य पिछड़ा वर्ग से जुड़े विषयों के विशेषज्ञ होंगे।
योगी सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि पंचायत चुनावों को पारदर्शी, संवैधानिक और कानूनी रूप से मजबूत आधार पर ही आगे बढ़ाया जाएगा। ओबीसी आरक्षण को लेकर पिछली बार सामने आई अड़चनों के बाद यह फैसला बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे चुनावी तैयारियों को एक स्पष्ट दिशा मिल सकती है।
कैबिनेट बैठक में लोकतंत्र सेनानियों को भी बड़ी राहत दी गई। आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वालों को अब मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत कैशलेस चिकित्सा सुविधा मिलेगी। यह सुविधा उनके आश्रितों तक भी विस्तारित की गई है। सरकार के इस निर्णय को सम्मान और संवेदनशीलता से जुड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे गंभीर बीमारियों के इलाज में आर्थिक बोझ कम होगा।
शहरी विकास और बुनियादी ढांचे के मोर्चे पर भी बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। लखनऊ मेट्रो के पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर से जुड़े एमओयू के मसौदे को मंजूरी दी गई, जबकि आगरा मेट्रो कॉरिडोर-2 के निर्माण के लिए भूमि हस्तांतरण प्रस्ताव को स्वीकृति मिली। इन फैसलों से दोनों शहरों में मेट्रो विस्तार की गति और तेज होने की उम्मीद है।
प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए सरकार ने हाथरस, बागपत और कासगंज में PPP मॉडल पर नए मेडिकल कॉलेज स्थापित करने के प्रस्ताव पर भी मुहर लगाई है। इससे ग्रामीण और अर्धशहरी इलाकों में चिकित्सा सेवाएं बेहतर होने की उम्मीद जताई जा रही है।
ग्रामीण विकास के क्षेत्र में भी सरकार ने सक्रिय रुख दिखाया है। ग्राम्य विकास विभाग और एचसीएल फाउंडेशन की ‘समुदाय परियोजना’ को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने का निर्णय लिया गया है। इस परियोजना के माध्यम से गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही टेक्सटाइल सेक्टर में युवाओं को रोजगार से जोड़ने और कौशल विकास को बढ़ावा देने वाली नई परियोजनाओं को भी कैबिनेट से मंजूरी मिली है।
बैठक में यूपी रोडवेज की वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए अतिरिक्त टैक्स को तर्कसंगत बनाने पर भी सहमति बनी। इसके अलावा जन्म-मृत्यु पंजीकरण नियमावली में संशोधन, यूपीपीएससी के कार्यक्षेत्र में बदलाव और ऊर्जा विभाग से जुड़े वित्तीय प्रस्तावों को भी स्वीकृति दी गई।
कुल मिलाकर, योगी कैबिनेट की यह बैठक पंचायत चुनावों से लेकर स्वास्थ्य, परिवहन, शहरी विकास और ग्रामीण रोजगार तक कई मोर्चों पर महत्वपूर्ण साबित हुई है। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा ओबीसी आरक्षण के लिए समर्पित आयोग के गठन की हो रही है, क्योंकि यही फैसला आने वाले पंचायत चुनावों की दिशा और दशा तय कर सकता है।














