Thursday, May 14, 2026
Your Dream Technologies
HomeNCR News“सत्ता खुद सड़क पर!” — नोएडा में BJP कार्यकर्ता ही कर रहे...

“सत्ता खुद सड़क पर!” — नोएडा में BJP कार्यकर्ता ही कर रहे प्रदर्शन, जनता पूछ रही: ‘जब सरकार अपनी है तो विरोध किससे?’

नोएडा। देश की हाईटेक सिटी कही जाने वाली नोएडा इन दिनों एक बेहद दिलचस्प और राजनीतिक रूप से विडंबनापूर्ण दौर से गुजर रही है। शहर में जगह-जगह धरने, प्रदर्शन, ज्ञापन और सोशल मीडिया अभियानों की बाढ़ आई हुई है, लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ये विरोध प्रदर्शन विपक्ष नहीं, बल्कि खुद सत्ता पक्ष के कार्यकर्ता कर रहे हैं।

सवाल अब जनता के बीच खुलकर उठने लगा है—जब सरकार अपनी है, विधायक अपने हैं, सांसद अपने हैं और प्राधिकरण पर भी राजनीतिक पकड़ अपनी ही है, तो आखिर ये विरोध किसके खिलाफ हो रहा है?

नोएडा की गलियों से लेकर सोशल मीडिया तक अब यही चर्चा है कि शहर में विपक्ष की भूमिका भी शायद “आउटसोर्स” हो चुकी है। क्योंकि जो पार्टी सत्ता में है, वही अब अपनी ही व्यवस्थाओं के खिलाफ मोर्चा खोले खड़ी दिखाई दे रही है।

जनता की समस्याएँ वही पुरानी, नाराज़गी नई नहीं

नोएडा की जनता वर्षों से जिन बुनियादी समस्याओं से जूझ रही है, वे आज भी जस की तस बनी हुई हैं।
कहीं सड़कें इतनी टूटी हुई हैं कि गड्ढों में सड़क ढूंढनी पड़ती है, तो कहीं जलभराव की स्थिति ऐसी हो जाती है कि सेक्टर “मिनी वेनिस” का दृश्य पेश करने लगते हैं।

फ्लैट खरीदारों की हालत भी अलग नहीं है। रजिस्ट्री का इंतजार अब लोगों को किसी वेब सीरीज़ के अगले सीजन जैसा लगने लगा है—हर बार सिर्फ एक ही संदेश मिलता है: “Coming Soon…”

लोगों का आरोप है कि चुनावी मंचों पर किए गए वादे और जमीनी हकीकत के बीच की दूरी लगातार बढ़ती जा रही है।

रिबन कटिंग की राजनीति बनाम जमीनी हकीकत

स्थानीय लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों की सक्रियता ज्यादातर उद्घाटन समारोहों, रिबन कटिंग, फूल-मालाओं और सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित दिखाई देती है।

शहर में विकास के बड़े-बड़े दावे जरूर किए जाते हैं, लेकिन रोजमर्रा की समस्याओं से जूझ रही जनता को राहत कम ही मिल पा रही है।

राजनीतिक गलियारों में यह तंज भी सुनाई देने लगा है कि कुछ नेताओं के लिए नोएडा अब “जनसेवा का क्षेत्र” कम और “वीकेंड हॉलिडे होम” ज्यादा बन गया है—जहाँ आओ, फोटो खिंचवाओ, ट्वीट करो और फिर वापस लौट जाओ।

सत्ता पक्ष के कार्यकर्ताओं की बढ़ती बेचैनी

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता पक्ष के कार्यकर्ता अब जनता के बढ़ते असंतोष को महसूस करने लगे हैं। उन्हें अंदेशा है कि अगर बुनियादी समस्याएँ ऐसे ही बनी रहीं, तो आने वाले चुनावों में जनता नाराज़गी दिखा सकती है।

यही कारण है कि अब कई कार्यकर्ता खुद जनता के साथ खड़े दिखना चाहते हैं, चाहे इसके लिए उन्हें अपनी ही सरकार और प्रशासन के खिलाफ आवाज क्यों न उठानी पड़े।

स्थिति अब ऐसी हो गई है कि नोएडा की राजनीति उस छात्र जैसी प्रतीत होने लगी है, जो खुद किताब भूल जाए और फिर खुद ही स्कूल प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन करने लग जाए।

जनता का साफ संदेश: भाषण नहीं, समाधान चाहिए

नोएडा की जनता अब राजनीतिक नारों और पोस्टरों से आगे निकल चुकी है। लोगों की मांग बिल्कुल स्पष्ट है—
उन्हें अब भाषण नहीं, परिणाम चाहिए।
उन्हें अब पोस्टर नहीं, बेहतर जल निकासी चाहिए।
उन्हें अब आश्वासन नहीं, फ्लैट रजिस्ट्री चाहिए।

शहर के नागरिकों का कहना है कि वोट देते समय लोग पार्टी जरूर देखते हैं, लेकिन रोजमर्रा की जिंदगी में वे सड़क, सीवर, पानी और सिस्टम की स्थिति से ही सरकार का मूल्यांकन करते हैं।

अब देखने वाली बात यह होगी कि सत्ता पक्ष का यह “आंतरिक विरोध” केवल राजनीतिक दबाव बनाने तक सीमित रहता है या वास्तव में नोएडा की जमीनी समस्याओं के समाधान की दिशा में कोई ठोस बदलाव भी लेकर आता है।

- Advertisement -
Your Dream Technologies
VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
VIKAS TRIPATHI भारत देश की सभी छोटी और बड़ी खबरों को सामने दिखाने के लिए "पर्दाफास न्यूज" चैनल को लेके आए हैं। जिसके लोगो के बीच में करप्शन को कम कर सके। हम देश में समान व्यवहार के साथ काम करेंगे। देश की प्रगति को बढ़ाएंगे।
RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments

Call Now Button