पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन से पहले ही केंद्र सरकार ने राज्य के विकास को लेकर बड़ा एक्शन प्लान तैयार करना शुरू कर दिया है। शनिवार को नई सरकार के शपथ ग्रहण से पहले दिल्ली में हलचल तेज हो गई है और अब उन तमाम केंद्रीय योजनाओं और परियोजनाओं को दोबारा गति देने की तैयारी शुरू हो चुकी है, जो पिछले कई वर्षों से केंद्र और राज्य सरकार के टकराव के कारण अटकी हुई थीं।
सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में साफ संदेश दिया कि “पश्चिम बंगाल को विकसित राज्य बनाना है।” इसके बाद केंद्र सरकार ने हर मंत्रालय से ऐसी योजनाओं की सूची मांगी है, जिनका काम पिछले 10-12 वर्षों में धीमा पड़ा या पूरी तरह रुक गया था।
राजनाथ सिंह को मिला समन्वय का जिम्मा
इन अटकी योजनाओं को फिर से पटरी पर लाने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। बताया जा रहा है कि उन्होंने सभी केंद्रीय मंत्रियों से सीधे संपर्क कर उनके मंत्रालयों की रुकी परियोजनाओं और योजनाओं की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
अब मंत्रालयों की ओर से उन योजनाओं की सूची तैयार की जा रही है—
जिन्हें राज्य सरकार से मंजूरी नहीं मिली,
जिनके लिए जमीन आवंटित नहीं हुई,
या जिनमें प्रशासनिक स्तर पर बाधाएं खड़ी की गईं।
केंद्र सरकार इन सभी अड़चनों को दूर कर तेजी से काम शुरू करने की तैयारी में है।
12 साल के टकराव के बाद अब बदलने जा रही तस्वीर?
केंद्र सरकार का मानना है कि ममता बनर्जी सरकार के दौरान कई केंद्रीय योजनाओं को या तो लागू नहीं होने दिया गया या उनका नाम और स्वरूप बदल दिया गया।
दिल्ली और कोलकाता के बीच लंबे समय तक चले राजनीतिक टकराव का असर विकास परियोजनाओं पर भी पड़ा। कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट, बॉर्डर फेंसिंग, स्वास्थ्य और आवास योजनाएं वर्षों तक अधर में लटकी रहीं।
अब बीजेपी की संभावित “डबल इंजन सरकार” बनने के बाद केंद्र इन परियोजनाओं को मिशन मोड में पूरा करने की तैयारी कर रहा है।
किन योजनाओं में आएगी सबसे ज्यादा तेजी?
1.आयुष्मान भारत योजना
ममता सरकार ने केंद्र की आयुष्मान भारत योजना लागू करने से इनकार कर दिया था। राज्य सरकार का कहना था कि उसकी “स्वास्थ्य साथी” योजना ज्यादा बेहतर है।
अब केंद्र सरकार पांच लाख रुपये तक के स्वास्थ्य बीमा वाली इस योजना को पश्चिम बंगाल में तेजी से लागू कर सकती है।
2.पीएम आवास योजना
पश्चिम बंगाल सरकार ने पीएम आवास योजना का नाम बदलकर “बांग्ला आवास योजना” कर दिया था, जिसके बाद केंद्र ने 2022 में फंड रोक दिया था।
अब नई सरकार बनने के बाद इस योजना को दोबारा शुरू किए जाने की संभावना बढ़ गई है।
3.शिक्षा क्षेत्र की योजनाएं
केंद्र सरकार अब पश्चिम बंगाल में—
पीएम श्री स्कूल योजना,
नई शिक्षा नीति,
और उल्लास जैसी योजनाओं
को तेजी से लागू करना चाहती है।
4.प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY)
ग्रामीण सड़कों से जुड़ी कई परियोजनाएं मंजूरी और समन्वय की कमी के कारण रुकी हुई थीं। अब इन्हें फास्ट ट्रैक पर लाने की तैयारी है।
5.पीएम मत्स्य संपदा योजना
केंद्र का आरोप रहा कि पश्चिम बंगाल ने इस योजना को लॉन्च के दो साल बाद तक पूरी तरह लागू नहीं किया और आवंटित फंड का सीमित उपयोग किया।
नई सरकार के बाद मत्स्य क्षेत्र में बड़े निवेश और योजनाओं के विस्तार की उम्मीद है।
6.जल जीवन मिशन
ग्रामीण इलाकों तक हर घर नल से जल पहुंचाने की योजना में भी पश्चिम बंगाल का प्रदर्शन कमजोर माना गया।
अब केंद्र इस मिशन को बड़े स्तर पर लागू करने की तैयारी में है।
7.नमामि गंगे परियोजना
गंगा सफाई अभियान के तहत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) लगाने के लिए राज्य सरकार पर जमीन न देने के आरोप लगते रहे।
केंद्र सरकार का कहना था कि जमीन नहीं मिलने के कारण कई प्रोजेक्ट समय पर पूरे नहीं हो पाए। अब इन परियोजनाओं को गति देने का फैसला लिया गया है।
सबसे बड़ा फोकस: बॉर्डर फेंसिंग
भारत-बांग्लादेश सीमा पर बॉर्डर फेंसिंग लंबे समय से केंद्र और राज्य के बीच विवाद का विषय रही।
सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार अब अगले 45 दिनों में बॉर्डर फेंसिंग के बड़े हिस्से को पूरा करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसके लिए जमीन अधिग्रहण और सुरक्षा मंजूरियों की प्रक्रिया तेज की जाएगी।
‘विकसित बंगाल’ मिशन पर केंद्र की नजर
नई सरकार के गठन के साथ ही केंद्र सरकार पश्चिम बंगाल को इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण विकास और सुरक्षा के मोर्चे पर तेज गति से आगे बढ़ाने की रणनीति बना रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह सिर्फ विकास का एजेंडा नहीं, बल्कि 2029 के राष्ट्रीय राजनीतिक समीकरणों की भी बड़ी तैयारी है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि—














