Thursday, April 30, 2026
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हज यात्रियों से अतिरिक्त वसूली पर भड़के ओवैसी, बोले- ‘ये इबादत नहीं, शोषण बन गया… सरकार तुरंत सर्कुलर वापस ले’

असदुद्दीन ओवैसी ने हज यात्रा पर जाने वाले हजारों भारतीय मुसलमानों से अतिरिक्त ₹10,000 वसूलने के फैसले पर केंद्र सरकार और हज कमेटी पर तीखा हमला बोला है। ओवैसी ने इसे “सरासर शोषण” करार देते हुए कहा कि जो लोग सालों की बचत के बाद अल्लाह के घर की ज़ियारत के लिए निकलते हैं, उनसे इस तरह आखिरी वक्त में अतिरिक्त रकम मांगना नाइंसाफी है।

दरअसल, Haj Committee of India की ओर से जारी एक सर्कुलर में 2026 के हज यात्रियों से ‘डिफरेंशियल एयरफेयर’ यानी हवाई किराए में अंतर के नाम पर ₹10,000 अतिरिक्त जमा कराने को कहा गया है। यह राशि 15 मई तक जमा करनी होगी।

ओवैसी ने सवाल उठाया कि जब मुंबई एम्बार्केशन प्वाइंट से रवाना होने वाले हर यात्री से कुछ महीने पहले ही ₹90,844 लिए जा चुके हैं, तो अब अतिरिक्त ₹10,000 किस आधार पर मांगे जा रहे हैं? उन्होंने कहा कि यह रकम आम यात्रियों के मौजूदा हवाई किराए से लगभग दोगुनी बैठती है।


‘क्या हज कमेटी से जाना गुनाह है?’ — ओवैसी का बड़ा सवाल

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए ओवैसी ने कहा,

“क्या हज यात्री हज कमेटी के जरिए जाने की सजा भुगत रहे हैं? यह इबादत का सफर है, कमाई का जरिया नहीं। ज्यादातर हज यात्री अमीर नहीं होते, वे बरसों तक पैसे जोड़कर इस मुकद्दस यात्रा पर निकलते हैं।”

ओवैसी ने सरकार से मांग की कि यह सर्कुलर तुरंत वापस लिया जाए और हज यात्रियों से अतिरिक्त वसूली गई रकम लौटाई जाए।


सरकार ने क्यों बढ़ाया किराया?

अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव और एविएशन सेक्टर में बढ़ी लागत के कारण हज उड़ानों के किराए में अतिरिक्त बोझ आया है। इसी वजह से सभी एम्बार्केशन प्वाइंट—चाहे Mumbai हो, Delhi हो या देश का कोई अन्य शहर—से जाने वाले यात्रियों पर यह ₹10,000 अतिरिक्त शुल्क लागू किया गया है।

हालांकि, सवाल यह उठ रहा है कि क्या इस बढ़ी लागत का बोझ सीधे उन श्रद्धालुओं पर डालना उचित है, जिन्होंने पहले ही तय पैकेज के तहत पूरी रकम जमा कर दी थी?


हज यात्रियों में नाराजगी, आखिरी समय में बढ़ा आर्थिक दबाव

हज यात्रा पर जाने वाले कई यात्रियों और उनके परिजनों का कहना है कि वे पहले से तय खर्च के हिसाब से तैयारी करते हैं। ऐसे में अंतिम समय में ₹10,000 की अतिरिक्त मांग उनके बजट पर सीधा असर डाल रही है। खासकर निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों के लिए यह रकम कम नहीं है।

यही वजह है कि अब यह मुद्दा सिर्फ किराया वृद्धि का नहीं, बल्कि धार्मिक यात्रा के नाम पर आर्थिक दबाव का बनता जा रहा है।


मामले ने पकड़ा राजनीतिक रंग

ओवैसी के बयान के बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। विपक्षी दल सरकार से पूछ रहे हैं कि यदि हवाई किराए में वृद्धि हुई भी है तो उसका पारदर्शी हिसाब क्यों नहीं दिया गया? और यात्रियों से पहले पूरी राशि लेने के बाद अचानक अतिरिक्त मांग क्यों की गई?


सवाल जो अब सरकार के सामने हैं

₹90,844 लेने के बाद अतिरिक्त ₹10,000 क्यों?

क्या हज कमेटी ने पहले किराया सही अनुमान से तय नहीं किया?

क्या मिडिल ईस्ट संकट का पूरा बोझ यात्रियों पर डालना जायज है?

क्या सरकार यह फैसला वापस लेगी?

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VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
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