“असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का बड़ा दावा—पश्चिम बंगाल सिर्फ एक राज्य का चुनाव नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर और राष्ट्रीय सुरक्षा की दिशा तय करने वाला राजनीतिक युद्ध; TMC पर सीमा सुरक्षा रोकने का आरोप”
कोलकाता/गुवाहाटीपश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने ऐसा बयान दिया है जिसने चुनावी माहौल को और अधिक ध्रुवीकृत कर दिया है। हिमंत ने साफ कहा कि यह चुनाव सिर्फ बंगाल की सत्ता बदलने का सवाल नहीं, बल्कि भारत की सीमाओं, जनसंख्या संतुलन और पूर्वोत्तर की सुरक्षा का निर्णायक मोड़ है। उनका दावा है कि बांग्लादेशी घुसपैठ अब केवल सीमावर्ती जिलों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका असर असम, त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम, बिहार और झारखंड तक महसूस किया जा रहा है।
“हर भारतीय का हित जुड़ा है बंगाल चुनाव से” — हिमंत का सीधा संदेश
कोलकाता में मीडिया से बात करते हुए हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि पश्चिम बंगाल का यह चुनाव सामान्य लोकतांत्रिक मुकाबला नहीं है, बल्कि “सभ्यतागत और राष्ट्रीय अस्तित्व का संघर्ष” है। उनका कहना है कि यदि सीमापार से हो रही अवैध घुसपैठ पर अभी कठोर नियंत्रण नहीं लगाया गया, तो आने वाले वर्षों में पश्चिम बंगाल और असम दोनों की सामाजिक संरचना पूरी तरह बदल सकती है।
उन्होंने दावा किया कि सीमावर्ती इलाकों में मतदाता संख्या में असामान्य वृद्धि इसी बदलाव का संकेत है और इसका असर आने वाले दशकों की राजनीति पर पड़ेगा।
बांग्लादेशी मुस्लिम आबादी और जनसांख्यिकीय बदलाव का मुद्दा गर्माया
असम सीएम ने अपने बयान में कहा कि असम में मुस्लिम आबादी तेजी से बढ़कर करीब 40 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है और अगर यही रफ्तार बनी रही तो यह केवल चुनावी गणित नहीं, बल्कि शासन व्यवस्था की दिशा भी बदल सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि “जब घुसपैठिए संगठित वोट बैंक बन जाते हैं, तब सीमा सुरक्षा का सवाल सीधे कानून व्यवस्था और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ जाता है।”
हिमंत ने संकेत दिया कि बंगाल के सीमावर्ती जिलों में हो रहा जनसंख्या विस्तार भविष्य में बड़े राजनीतिक पुनर्संतुलन की वजह बन सकता है। इस बयान के बाद Trinamool Congress ने इसे सांप्रदायिक और भड़काऊ बताते हुए चुनाव आयोग में शिकायत भी दर्ज कराई है।
TMC पर सबसे बड़ा आरोप — “सीमा पर बाड़ नहीं लगने दे रही सरकार”
हिमंत बिस्वा सरमा ने सबसे तीखा हमला मुख्यमंत्री Mamata Banerjee और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस पर बोला। उन्होंने कहा:
“असम में 100% बाड़ लग चुकी है, त्रिपुरा में काम तेजी से चल रहा है, लेकिन पश्चिम बंगाल एकमात्र ऐसा राज्य है जहां अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बाड़ लगाने में लगातार राजनीतिक बाधा डाली जा रही है।”
उनका आरोप है कि उत्तर दिनाजपुर, मालदा, मुर्शिदाबाद, नदिया, कूच बिहार और 24 परगना जैसे सीमावर्ती जिलों में घुसपैठियों के लिए एक ‘सॉफ्ट कॉरिडोर’ तैयार हो गया है, जिसका इस्तेमाल सिर्फ बंगाल में बसने के लिए नहीं बल्कि पूरे भारत में फैलने के लिए किया जा रहा है।
“बंगाल खुला रहा तो पूर्वोत्तर सुरक्षित नहीं रह सकता”
हिमंत ने कहा कि असम, त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम और पश्चिम बंगाल को अलग-अलग राजनीतिक इकाई मानकर नहीं देखा जा सकता क्योंकि सीमा की एक कमजोर कड़ी पूरे पूर्वोत्तर की सुरक्षा को प्रभावित करती है।
उन्होंने ऐलान किया कि यदि बंगाल में भाजपा सरकार बनती है तो वे केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah से अनुरोध करेंगे कि पांच राज्यों के मुख्यमंत्रियों का एक संयुक्त टास्क फोर्स बनाया जाए जो अवैध घुसपैठ, फर्जी दस्तावेज और सीमा पार नेटवर्क पर समन्वित कार्रवाई करे।
चुनावी गणित भी साधा: BJP को 200+ सीट का दावा
सिर्फ सुरक्षा नहीं, हिमंत ने चुनावी आंकड़ों को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि पहले चरण में लगभग 93% मतदान यह संकेत देता है कि बंगाल में “भय का वातावरण टूट चुका है” और लोग खुलकर भाजपा के समर्थन में मतदान कर रहे हैं। असम सीएम ने दावा किया कि:
असम में BJP 100+ सीटें पार करेगी
बंगाल में 200 सीटें जीतना भी चौंकाने वाला नहीं होगा
यह बयान भाजपा के आक्रामक आत्मविश्वास को दर्शाता है और साफ संकेत देता है कि पार्टी इस चुनाव को वैचारिक बनाम अस्तित्व की लड़ाई के रूप में पेश कर रही है।
राजनीतिक बयान या सुनियोजित ध्रुवीकरण?
हिमंत बिस्वा सरमा के बयानों ने बंगाल चुनाव को एक बार फिर घुसपैठ बनाम तुष्टिकरण, सीमा सुरक्षा बनाम वोट बैंक, और जनसंख्या संतुलन बनाम पहचान की राजनीति के फ्रेम में ला खड़ा किया है।
जहां भाजपा इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बता रही है, वहीं TMC और विपक्ष इसे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की चुनावी रणनीति करार दे रहे हैं। यही वजह है कि हिमंत का हर भाषण अब सिर्फ प्रचार नहीं, बल्कि बंगाल की चुनावी दिशा तय करने वाला बड़ा नैरेटिव बन चुका है।
सीधा सवाल जो हिमंत ने देश के सामने रखा
क्या पश्चिम बंगाल सिर्फ एक राज्य का चुनाव लड़ रहा है,
या भारत अपनी पूर्वी सीमा का भविष्य तय कर रहा है?
इसी सवाल को केंद्र में रखकर हिमंत बिस्वा सरमा बंगाल में भाजपा का सबसे धारदार चेहरा बने हुए हैं।














