बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव एक विवादित बयान को लेकर गंभीर आलोचना का सामना कर रहे हैं। राजनीति में महिलाओं की भूमिका पर उनकी टिप्पणी ने राष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी है और कई नेताओं ने इसे “अपमानजनक” और “अस्वीकार्य” बताया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए Bihar State Women’s Commission ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सांसद को नोटिस जारी किया है और तीन दिनों के भीतर जवाब मांगा है।
क्या कहा था सांसद ने?
हाल ही में दिए गए एक बयान में पप्पू यादव ने दावा किया कि आज के समय में अधिकांश महिलाओं के लिए बिना “समझौते” के राजनीति में आगे बढ़ना मुश्किल है।
उन्होंने यह भी कहा कि बड़ी संख्या में महिला नेताओं को राजनीति में प्रवेश के लिए “पुरुष नेताओं के साथ निजी संबंध” बनाने पड़ते हैं।
यह बयान सामने आते ही व्यापक विवाद खड़ा हो गया और इसे महिलाओं की गरिमा और सम्मान के खिलाफ बताया गया।
नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया
प्रियंका चतुर्वेदी का हमला
शिवसेना (UBT) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने इस बयान को “बेहद शर्मनाक, घिनौना और आपत्तिजनक” करार दिया।
उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस तरह की सोच ही राजनीति में महिलाओं के खिलाफ नफरत और चरित्र हनन को बढ़ावा देती है।
Shameless, disgusting and a filthy comment from Lok Sabha MP Pappu Yadav. It is this sick mindset that gives wings to thousands of people who continue to judge women in politics and use slander & character assassination as a tool to silence them. pic.twitter.com/xoOCKrfpt6
— Priyanka Chaturvedi🇮🇳 (@priyankac19) April 22, 2026
चंद्रशेखर बावनकुले की नाराज़गी
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने भी इस बयान की कड़ी निंदा की।
उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणियां भारतीय संस्कृति और सामाजिक मूल्यों के खिलाफ हैं और महिलाओं की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं।
उन्होंने यह भी मांग की कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, चाहे आरोपी किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ा हो।
महिला आयोग का सख्त रुख
मामले को गंभीरता से लेते हुए Bihar State Women’s Commission ने सांसद को नोटिस जारी किया है।
आयोग की अध्यक्ष Apsara की ओर से भेजे गए नोटिस में कहा गया है कि:
यह बयान महिलाओं के आत्मसम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाता है
यह सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला है
आयोग ने सांसद से तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है और यह भी संकेत दिया है कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं हुआ, तो आगे कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है, जिसमें लोकसभा अध्यक्ष को अनुशंसा भी शामिल हो सकती है।
क्यों गंभीर है यह मामला?
यह विवाद कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उजागर करता है:
राजनीति में महिलाओं के प्रति पूर्वाग्रह और भेदभाव
सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्तियों की भाषा और जिम्मेदारी
महिला सम्मान और लैंगिक समानता का सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान न केवल महिलाओं की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि समाज में गलत संदेश भी देते हैं।
व्यापक संदर्भ
भारत में राजनीति में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है, लेकिन अभी भी यह संख्या सीमित है।
संसद और विधानसभाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अपेक्षाकृत कम है
कई महिलाएं सामाजिक और राजनीतिक बाधाओं का सामना करती हैं
ऐसे में इस तरह के बयान महिला सशक्तिकरण के प्रयासों को कमजोर कर सकते हैं।
आगे क्या?
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि:
सांसद नोटिस का क्या जवाब देते हैं
क्या आयोग आगे कोई सख्त कार्रवाई करता है
और क्या राजनीतिक दल इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाते हैं
यह मामला केवल एक बयान का विवाद नहीं है, बल्कि यह उस सोच और मानसिकता को उजागर करता है, जो आज भी राजनीति में महिलाओं के प्रति मौजूद है।
आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि इस पर केवल बयानबाजी होती है या वास्तव में जवाबदेही तय की जाती है।














