गाजीपुर – करंडा क्षेत्र के कटरिया गांव में बुधवार को उस समय हालात बिगड़ गए जब समाजवादी पार्टी (सपा) का प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचा। निर्धारित समय सुबह 11 बजे की बजाय प्रतिनिधिमंडल करीब 12 बजे गांव पहुंचा, जहां पहले से मौजूद ग्रामीणों ने उन्हें गांव के बाहर ही रोक लिया। इस पर नाराज सपा नेता वहीं धरने पर बैठ गए और पुलिस से पीड़ित परिवार से मिलने की अनुमति मांगने लगे।
स्थिति को संभालने के लिए प्रशासन ने परिवार की एक महिला को बातचीत के लिए बुलाया, लेकिन इसी दौरान माहौल अचानक हिंसक हो गया। ग्रामीणों ने पथराव शुरू कर दिया, जिससे अफरा-तफरी मच गई और देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच जमकर पत्थरबाजी होने लगी। इस घटना में सपा के पूर्व मंत्री रामआसरे विश्वकर्मा, विधायक डॉ. वीरेंद्र यादव, नेता सत्येंद्र यादव ‘सत्या’ समेत दो महिला कार्यकर्ता रीना यादव और बिंदु घायल हो गईं। सभी घायलों को गाजीपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है।
हैरानी की बात यह रही कि मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल मौजूद होने के बावजूद स्थिति तुरंत नियंत्रित नहीं हो सकी। पथराव में करंडा थानाध्यक्ष और कोतवाली प्रभारी को भी सिर में चोट लगने की सूचना है। घटना के बाद हालात को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल और पीएसी की तैनाती कर दी गई है।
गौरतलब है कि 14-15 अप्रैल की रात 16 वर्षीय निशा विश्वकर्मा का शव गंगा नदी में मिलने के बाद से गांव में तनाव बना हुआ है। इस मामले में पुलिस ने दो आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर एक को गिरफ्तार भी किया है। वहीं, सोशल मीडिया पर जातीय टिप्पणियों ने भी माहौल को और बिगाड़ दिया।
इस घटना के विरोध में 20 अप्रैल को सपा ने प्रदर्शन कर सख्त कार्रवाई, पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा, और पीड़ित परिवार को सुरक्षा व मुआवजा देने की मांग की थी। ताजा पथराव की घटना ने जिले में कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।














