मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिका द्वारा ओमान की खाड़ी के पास एक ईरानी जहाज को जब्त किए जाने की घटना ने हालात को गंभीर बना दिया है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि अमेरिकी सेना ने नाकाबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहे ईरानी जहाज को पूरी तरह अपने कब्जे में ले लिया है।
ईरान ने हमले की पुष्टि, बताया ‘समुद्री डकैती’
ईरान के खातम अल-अनबिया केंद्रीय मुख्यालय ने इस घटना की पुष्टि करते हुए अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
ईरान का कहना है कि अमेरिकी सेना ने युद्धविराम का उल्लंघन करते हुए जहाज पर गोलीबारी की, सैनिकों को तैनात किया और जहाज के नेविगेशन सिस्टम को निष्क्रिय कर दिया।
तेहरान ने इसे “समुद्री डकैती” करार देते हुए कड़ी चेतावनी दी है कि वह जल्द ही इस कार्रवाई का जवाब देगा।
क्या हुआ समुद्र में?
अमेरिकी सेना की कमान सेंटकॉम के मुताबिक, यह घटना होर्मुज जलडमरूमध्य के पास हुई, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम मार्ग है।
जहाज बंदर अब्बास की ओर जा रहा था
करीब 17 समुद्री मील प्रति घंटे की गति से चल रहा था
6 घंटे तक कई बार चेतावनी दी गई
लेकिन जहाज ने निर्देशों का पालन नहीं किया
अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई
चेतावनियों के बावजूद जहाज न रुकने पर अमेरिकी युद्धपोत USS Spruance ने कार्रवाई की:
इंजन रूम खाली करने का निर्देश दिया
इंजन को निष्क्रिय कर जहाज को रोका गया
31वीं मरीन यूनिट के सैनिकों ने जहाज पर चढ़कर कब्जा कर लिया
फिलहाल यह जहाज अमेरिकी हिरासत में है।
क्यों अहम है यह मामला?
यह घटना ऐसे समय हुई है जब ईरानी बंदरगाहों के आसपास नाकाबंदी लागू है।
अमेरिका के अनुसार, अब तक 25 से ज्यादा जहाजों को वापस लौटाया जा चुका है, लेकिन यह पहला मामला है जब किसी जहाज को जब्त किया गया।
आगे क्या?
ईरान की जवाबी कार्रवाई की चेतावनी के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है।
अगर हालात बिगड़ते हैं, तो इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पड़ सकता है।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस टकराव पर टिकी है कि यह विवाद आगे बढ़ता है या कूटनीतिक समाधान निकलता है।














