लखनऊ/हमीरपुर, उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग द्वारा लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर अब बड़ा विवाद बनते जा रहे हैं। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से उपभोक्ताओं द्वारा तेज रीडिंग और बढ़े हुए बिजली बिलों की शिकायतें सामने आ रही हैं। इसी मुद्दे ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है, जहां विपक्ष ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
जनता में बढ़ता आक्रोश
हमीरपुर में स्मार्ट मीटर के खिलाफ लोगों का गुस्सा सड़कों पर देखने को मिला। लक्ष्मीबाई तिराहा स्थित कांशीराम कॉलोनी में बड़ी संख्या में महिलाएं प्रदर्शन के लिए उतर आईं।
महिलाओं ने स्मार्ट मीटर को लेकर विरोध जताया
कई प्रदर्शनकारियों ने मीटर को अधिकारियों के सामने फेंका
आरोप लगाया कि मीटर तेज चल रहे हैं और बिल अनावश्यक रूप से बढ़ रहे हैं
प्रदर्शनकारी महिलाएं तहसील दिवस पर पहुंचीं और अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की।
अखिलेश यादव का सरकार पर हमला
इस मुद्दे पर अखिलेश यादव ने राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि:
“स्मार्ट मीटर के नाम पर बिजली की ठगी हो रही है और जनता का गुस्सा बढ़ता जा रहा है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि ठेके देने से पहले ही कंपनियों से एडवांस कमीशन लिया जाता है, जिसकी भरपाई के लिए मीटरों को तेज चलने के लिए सेट किया जाता है।
EVM से तुलना कर बढ़ाया विवाद
अखिलेश यादव ने विवाद को और तीखा करते हुए कहा कि:
“भाजपा के बिजली मीटर भी EVM मशीन की तरह हेराफेरी करते हैं।”
उन्होंने महंगी बिजली और गैस को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा और दावा किया कि यही मुद्दे भविष्य में सत्ता परिवर्तन का कारण बनेंगे।
स्मार्ट मीटर के नाम पर चल रही बिजली की ठगी के ख़िलाफ़ उप्र की जनता के गुस्से का मीटर हाई है क्योंकि उसे पता चल गया है कि बेवजह ज़रूरत से ज़्यादा मीटर रीडिंग आने और बिजली का खर्चा बेतहाशा बढ़ने का असली कारण भाजपा का भ्रष्टाचार है। जनता समझ गयी है कि भाजपाई ठेके देने से पहले ही… pic.twitter.com/CE1GqJMXq9
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) April 19, 2026
सरकार पर बढ़ता दबाव
स्मार्ट मीटर को लेकर उठ रहे सवालों ने सरकार के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।
एक ओर सरकार इसे डिजिटल और पारदर्शी व्यवस्था का हिस्सा बता रही है
वहीं दूसरी ओर उपभोक्ता इसे महंगे बिलों का कारण मान रहे हैं
विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्ट मीटर तकनीक में पारदर्शिता बढ़ाने की क्षमता है, लेकिन ग्राउंड लेवल पर शिकायतों का समाधान जरूरी है, ताकि लोगों का भरोसा बना रहे।
उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर का मुद्दा अब सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि जनता बनाम व्यवस्था और सियासत बनाम सिस्टम की बहस बन चुका है।
आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि सरकार इन शिकायतों का समाधान कैसे करती है और क्या यह मुद्दा चुनावी राजनीति में बड़ा असर डालता है।














