Sunday, April 19, 2026
Your Dream Technologies
HomeWest Bengal.बंगाल के रण में ‘झालमुड़ी मोमेंट’: झारग्राम में अचानक रुके पीएम मोदी,...

बंगाल के रण में ‘झालमुड़ी मोमेंट’: झारग्राम में अचानक रुके पीएम मोदी, सड़क किनारे लिया स्वाद—रैली के बीच बदला माहौल

झारग्राम, पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल की गरमाई सियासत के बीच रविवार को चुनावी माहौल उस वक्त अचानक बदल गया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का काफिला झारग्राम के एक छोटे से बाजार में थम गया। हाई-वोल्टेज रैलियों के बीच प्रधानमंत्री ने आम लोगों के बीच उतरकर बंगाल के मशहूर स्ट्रीट फूड झालमुड़ी का स्वाद लिया।


अचानक रुके, बोले—“मुझे झालमुड़ी खिलाओ”

चुनावी भाषणों की तीखी धार के बीच यह एक हल्का लेकिन असरदार पल था। पीएम मोदी सीधे एक दुकान पर पहुंचे और दुकानदार से कहा—
“मुझे झालमुड़ी खिलाओ”

दुकानदार पहले तो हिचकिचाया, पैसे लेने से मना भी किया, लेकिन प्रधानमंत्री ने मुस्कुराते हुए खुद भुगतान किया। आसपास मौजूद लोगों के लिए यह पल किसी सरप्राइज से कम नहीं था—सुरक्षा घेरे के बीच अचानक ऐसा आम-सा दृश्य, जिसने माहौल को मानो थाम लिया।


“प्याज खाते हैं… दिमाग नहीं”—एक लाइन, और ठहाके

जब दुकानदार ने पूछा—“क्या आप प्याज खाते हैं?”
तो पीएम मोदी ने तुरंत जवाब दिया—
“हां, प्याज खाते हैं… दिमाग नहीं।”

बस फिर क्या था—भीड़ में हंसी की लहर दौड़ गई, और कुछ पल के लिए चुनावी तनाव एक हल्के, मानवीय अंदाज में बदल गया।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

प्रधानमंत्री ने खुद इस पूरे पल का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। वीडियो में दुकानदार कहता दिखता है—“आप आ गए, यही काफी है,” लेकिन पीएम मोदी पैसे थमाते नजर आते हैं।

यह वीडियो अब तेजी से वायरल हो रहा है और इसे जमीनी जुड़ाव की झलक के तौर पर देखा जा रहा है।

रैली में TMC पर तीखा हमला

हालांकि, इस हल्के पल से पहले और बाद में पीएम मोदी का तेवर पूरी तरह राजनीतिक रहा। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC) और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर जमकर निशाना साधा।

झारग्राम की रैली में उन्होंने कहा—
“न पढ़ाई, न कमाई, न दवाई—अब TMC को जाना ही होगा।”

उन्होंने राज्य में तुष्टिकरण की राजनीति, आदिवासी समुदायों की अनदेखी और विकास की कमी को लेकर सरकार पर सवाल उठाए।

आदिवासी बेल्ट में बड़ा सियासी संदेश

झारग्राम और आसपास के आदिवासी इलाकों में पीएम मोदी का यह दौरा सिर्फ रैली तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सीधे लोगों से जुड़ने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि ऐसे “झालमुड़ी मोमेंट” चुनावी रणनीति में भावनात्मक कनेक्ट बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

हाई-वोल्टेज भाषणों और आरोप-प्रत्यारोप के बीच झारग्राम का यह छोटा सा ठहराव बड़ा संदेश दे गया—
सियासत सिर्फ मंच से नहीं, सड़क किनारे की दुकानों से भी जुड़ती है।

और इस बार, बंगाल के चुनाव में झालमुड़ी भी एक सियासी कहानी बन गई।

- Advertisement -
Your Dream Technologies
VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
VIKAS TRIPATHI भारत देश की सभी छोटी और बड़ी खबरों को सामने दिखाने के लिए "पर्दाफास न्यूज" चैनल को लेके आए हैं। जिसके लोगो के बीच में करप्शन को कम कर सके। हम देश में समान व्यवहार के साथ काम करेंगे। देश की प्रगति को बढ़ाएंगे।
RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments

Call Now Button