कर्नाटक के बेल्लारी सेंट्रल जेल में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां बीड़ी और सिगरेट न मिलने से नाराज कैदियों ने जेल कर्मचारियों और जेलर पर हमला कर दिया। इस घटना ने राज्य की जेल व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, जेल के कुछ कैदियों ने बीड़ी और सिगरेट की मांग की थी। जब जेल कर्मचारियों ने उनकी मांग पूरी करने से इनकार कर दिया तो कैदी भड़क गए और उन्होंने कर्मचारियों के साथ मारपीट शुरू कर दी। इसी दौरान कैदियों की जेलर अशोक होसमानी से भी तीखी बहस हो गई, जिसके बाद कैदियों ने उन पर भी हमला कर दिया।
बताया जा रहा है कि इस हमले में अल्ताफ और राशिद समेत पांच कैदी शामिल थे। घटना के बाद मामले की शिकायत ब्रूसपेट पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई है और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
इस घटना ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर जेल को वह स्थान माना जाता है जहां अपराधियों को अपने अपराध की सजा काटने के साथ-साथ सुधार का मौका मिलता है, लेकिन हाल के दिनों में सामने आ रही घटनाएं इसके उलट तस्वीर पेश कर रही हैं।
सूत्रों के मुताबिक, कई जेलों में कैदी पैसे के बल पर अपनी मनचाही चीजें मंगाने में सक्षम हो जाते हैं, जिससे जेल के अंदर अनुशासन कमजोर पड़ रहा है। ऐसे आरोप भी लगते रहे हैं कि कुछ कैदी जेलों में विलासितापूर्ण जीवन जी रहे हैं और कई बार जेल कर्मचारियों को धमकाने से भी नहीं हिचकते।
इससे पहले भी कर्नाटक की जेलों में इस तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। परप्पना अग्रहारा जेल में मोबाइल फोन की जांच करने पहुंचे कर्मचारियों को कैदियों द्वारा धमकाने की घटना सामने आई थी।
इसी तरह कुछ महीने पहले Karwar Jail में भी कैदियों ने तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों के इस्तेमाल की अनुमति न मिलने पर तीन जेल कर्मचारियों और एक जेलर पर हमला कर दिया था। उस मामले में मंगलुरु के रहने वाले मोहम्मद अब्दुल, फयान और कौशिक निहाल समेत कई कैदियों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी।
ताजा घटना के बाद एक बार फिर जेलों में सुरक्षा व्यवस्था, कैदियों की गतिविधियों पर नियंत्रण और सुधारात्मक व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जेलों में अनुशासन और निगरानी को मजबूत नहीं किया गया तो ऐसी घटनाएं आगे भी सामने आती रहेंगी।














