रूस के प्रथम उप-प्रधानमंत्री डेनिस मेंटुरोव की दो दिवसीय भारत यात्रा ने भारत-रूस संबंधों को नई दिशा और गति देने का संकेत दिया है। इस महत्वपूर्ण दौरे का उद्देश्य दोनों देशों के बीच आर्थिक, रणनीतिक और तकनीकी सहयोग को और मजबूत करना रहा।
मेंटुरोव ने अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल से मुलाकात की। इन बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करने तथा नए सहयोग क्षेत्रों को विकसित करने पर व्यापक चर्चा हुई।
IRIGC-TEC के तहत सहयोग पर जोर
मेंटुरोव भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग (IRIGC-TEC) के सह-अध्यक्ष भी हैं, जो व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को समन्वित करने का प्रमुख मंच है। विदेश मंत्री S. Jaishankar के साथ उनकी विस्तृत द्विपक्षीय बैठक में कई अहम क्षेत्रों पर बातचीत हुई।
इस बैठक में व्यापार, उद्योग, ऊर्जा, उर्वरक आपूर्ति, कनेक्टिविटी, मोबिलिटी, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।
Я был рад встретиться с первым заместителем председателя правительства России Денисом Мантуровым. Мы обсудили наше взаимовыгодное сотрудничество в сферах торговли, поставок удобрений, связей между людьми наших стран и взаимосвязанности. Я приветствую последовательные усилия,… pic.twitter.com/3qCrQ6kXoX
— Narendra Modi (@narendramodi) April 2, 2026
वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा
दोनों पक्षों ने दिसंबर 2025 में आयोजित भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के निर्णयों के क्रियान्वयन की समीक्षा की। साथ ही पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उसके वैश्विक प्रभावों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
उभरते क्षेत्रों में बढ़ेगा सहयोग
यह दौरा केवल एक औपचारिक कूटनीतिक यात्रा नहीं रहा, बल्कि भारत-रूस साझेदारी के अगले चरण की रूपरेखा तय करने वाला साबित हुआ। दोनों देशों ने पारंपरिक क्षेत्रों—जैसे ऊर्जा और रक्षा—से आगे बढ़ते हुए टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग गहराने का संकेत दिया।
व्यापार बढ़ाने पर खास ध्यान
गौरतलब है कि रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin ने पहले ही मेंटुरोव को भारत-रूस व्यापार बढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी थी, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक व्यापार परिस्थितियों में बदलाव आ रहा है और भारत नए निर्यात बाजारों की तलाश कर रहा है।
कुल मिलाकर, यह यात्रा वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी को अधिक व्यावहारिक, बहुआयामी और भविष्य उन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।














