मध्य प्रदेश के डबरा में उस समय एक दिलचस्प और थोड़ी व्यंग्यात्मक स्थिति बन गई, जब सड़क पर चल रही मजिस्ट्रेट चेकिंग के दौरान कांग्रेस विधायक सुरेश राजे की लग्जरी एसयूवी को रोक लिया गया। गाड़ी पर नियमों के खिलाफ लगा हूटर शायद यह मानकर बज रहा था कि सड़क अपने आप खाली हो जाएगी, लेकिन इस बार मामला उल्टा पड़ गया।
दरअसल, आमतौर पर सड़कों पर पुलिस की चेकिंग देखने को मिलती है, जहां कई बार प्रभावशाली लोग अपनी पहचान बताकर निकल भी जाते हैं। लेकिन डबरा में नजारा कुछ अलग था। यहां जिला एवं सत्र न्यायालय के जज खुद सड़क पर चेकिंग अभियान की निगरानी कर रहे थे।
हूटर ने ही करवा दी मुश्किल
जैसे ही सफेद रंग की चमचमाती एसयूवी वहां से गुजरी, उस पर लगा हूटर जजों की नजर में आ गया। गाड़ी को तुरंत रुकवाया गया। जब जांच शुरू हुई तो पता चला कि वाहन में अवैध रूप से हूटर लगाया गया है।
विधायक ने अपनी पहचान बताने की कोशिश की, लेकिन इस बार पहचान से ज्यादा महत्व कानून को दिया गया। जजों ने साफ शब्दों में कहा कि सड़क पर नियम सबके लिए एक जैसे हैं, चाहे आम नागरिक हो या जनप्रतिनिधि।
सड़क पर ही उतर गया ‘रुतबा’
बताया जाता है कि विधायक सुरेश राजे को करीब आधे घंटे तक सड़क पर ही खड़ा रहना पड़ा। इस दौरान मौके पर मौजूद लोग भी पूरे घटनाक्रम को दिलचस्पी से देखते रहे। अंततः जजों के निर्देश पर कार से वहीं हूटर उतरवाया गया।
इतना ही नहीं, नियमों का उल्लंघन करने पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
कानून के सामने सब बराबर
इस पूरे घटनाक्रम ने एक तरह से यह संदेश दे दिया कि सड़क पर कानून का ‘हूटर’ सबसे ऊंचा होता है, न कि गाड़ियों पर लगा हुआ।
डबरा की यह घटना अब इलाके में चर्चा का विषय बन गई है। लोग इसे इस बात की मिसाल मान रहे हैं कि कानून के सामने न पद चलता है, न पहचान—यहां सब बराबर हैं।
कुछ लोगों ने मजाकिया अंदाज में कहा कि “इस बार हूटर ने रास्ता नहीं साफ किया, बल्कि खुद ही रास्ते से हटना पड़ा।”
इस तरह डबरा की यह चेकिंग सिर्फ नियमों की कार्रवाई नहीं रही, बल्कि वीआईपी संस्कृति पर एक हल्का-सा व्यंग्य भी बन गई।














