उत्तर प्रदेश में आयोजित उत्तर प्रदेश पुलिस की उपनिरीक्षक (SI) भर्ती परीक्षा के पहले दिन पूछे गए एक प्रश्न को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। प्रश्नपत्र में ‘पंडित’ शब्द को अवसरवादिता से जोड़कर पेश किए जाने पर कई लोगों ने आपत्ति जताई है। अब इस मामले में राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आने लगी है।
सुरेश पासी, जो अमेठी के जगदीशपुर विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के विधायक और पूर्व राज्य मंत्री हैं, ने इस सवाल को अनुचित और आपत्तिजनक बताया है। उन्होंने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए राज्य सरकार से जांच और कार्रवाई की मांग की है।
विधायक ने उठाया सवाल
सुरेश पासी ने कहा कि परीक्षा में इस तरह का प्रश्न पूछना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके अनुसार ‘पंडित’ शब्द भारतीय समाज में एक सम्मानित और बौद्धिक वर्ग से जुड़ा हुआ माना जाता है। ऐसे में इसे अवसरवादिता से जोड़ना समाज के एक बड़े वर्ग की भावनाओं को आहत करने जैसा है।
उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रश्न न केवल सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकते हैं, बल्कि यह प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता और गंभीरता पर भी सवाल खड़े करते हैं।
मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
इस पूरे मामले को लेकर सुरेश पासी ने योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि प्रश्नपत्र तैयार करने वाली कमेटी के सदस्यों की जांच कराई जाए और यदि किसी प्रकार की लापरवाही या जानबूझकर की गई गलती सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
सुरेश पासी ने अपने पत्र में यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश जैसी बड़ी और संवेदनशील आबादी वाले राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नों का चयन बेहद सावधानी और जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए।
सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस सवाल को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस शुरू हो गई है। कई लोगों ने इसे अनुचित बताते हुए परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठाए हैं, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि प्रश्न के संदर्भ को पूरी तरह समझे बिना विवाद खड़ा किया जा रहा है।
हालांकि, भाजपा विधायक के इस मुद्दे को उठाने के बाद यह मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया है। राजनीतिक हलकों में भी इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
निष्पक्ष परीक्षा पर जोर
विधायक सुरेश पासी ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में ऐसे सवालों से बचना चाहिए जो किसी भी वर्ग या समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाते हों। उन्होंने सरकार से यह सुनिश्चित करने की मांग की कि भविष्य में प्रश्नपत्र तैयार करते समय इस तरह की संवेदनशीलता का विशेष ध्यान रखा जाए।
फिलहाल यह मामला प्रशासन और सरकार के संज्ञान में आ चुका है। अब देखना होगा कि सरकार इस विवाद पर क्या कदम उठाती है और प्रश्नपत्र तैयार करने वाली समिति के खिलाफ कोई कार्रवाई होती है या नहीं।














