नई दिल्ली। पुरानी दिल्ली के ऐतिहासिक बाजार चांदनी चौक में अवैध अतिक्रमण को लेकर विवाद अब सियासी रंग ले चुका है। अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के बीच निकाले गए एक जुलूस में लगे नारे—“जो जमीन सरकारी है, वह जमीन हमारी है”—ने नई बहस छेड़ दी है।
इस मुद्दे पर प्रवीण शंकर कपूर ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और उपराज्यपाल को पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
टाउन हॉल से लाल किला तक मार्च पर आपत्ति
चांदनी चौक नागरिक मंच के महासचिव और भाजपा प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि करीब 300 लोगों ने टाउन हॉल से Red Fort तक विरोध मार्च निकाला। मंच का दावा है कि जिन लोगों पर सड़कों और फुटपाथों पर अवैध कब्जे के आरोप हैं, उन्हें जुलूस निकालने की अनुमति दी गई।
पत्र में यह भी कहा गया है कि मार्च के दौरान “सरकारी जमीन हमारी है” जैसे नारे लगाए गए, जो कानून व्यवस्था और सार्वजनिक संपत्ति के प्रति गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
पुलिस की भूमिका पर सवाल
मंच ने यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय कोतवाली थाना पुलिस ने जुलूस को सुरक्षा प्रदान की। उनका कहना है कि पुलिस को ऐसे मामलों में सख्ती दिखानी चाहिए थी, न कि सुरक्षा उपलब्ध करानी चाहिए थी।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
इस पूरे विवाद के बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने भी हाल ही में चांदनी चौक और जामा मस्जिद क्षेत्र में बढ़ते अतिक्रमण पर चिंता जताई थी। अदालत ने नगर निगम को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
अदालत की टिप्पणी के बाद कुछ इलाकों में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी की गई, लेकिन व्यापारियों और प्रशासन के बीच तनातनी जारी है।
बढ़ता प्रशासनिक दबाव
प्रवीण शंकर कपूर ने अपने पत्र में मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं, ताकि सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
चांदनी चौक जैसे ऐतिहासिक और व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में अतिक्रमण का मुद्दा अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस का विषय बन चुका है। हाईकोर्ट की चिंता और राजनीतिक दबाव के बीच अब देखना होगा कि प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है।














