वृंदावन/बरेली: बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट और 2019 बैच के पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने के बाद अब औपचारिक रूप से राजनीति में कदम रख दिया है। श्रीकृष्ण की नगरी वृंदावन से उन्होंने नई राजनीतिक पार्टी ‘राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा’ के गठन की घोषणा की और पार्टी का चुनाव चिन्ह भी जारी किया।
रविवार को मीडिया से बातचीत में अलंकार ने कहा कि उन्होंने सबसे पहले बांके बिहारी जी के दर्शन और पूजा-अर्चना के बाद पार्टी के नाम की घोषणा करने का संकल्प लिया था। उन्होंने इसे “समाज के अधिकारों और सम्मान की लड़ाई” बताया।
UGC एक्ट को बताया ‘काला कानून’
अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफे का मुख्य कारण यूजीसी एक्ट और संत समाज से जुड़े मुद्दों को बताया। उन्होंने यूजीसी एक्ट को ‘काला कानून’ करार देते हुए कहा कि यह व्यवस्था समाज को बांटने वाली है। उन्होंने संतों के अपमान पर गहरी नाराजगी जताई और कहा कि माघ मेले के दौरान संतों और बटुकों के साथ अन्याय हुआ। उनके अनुसार, “बटुकों की शिखा खींची गई और उन्हें गिराकर पीटा गया, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।”
उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर भी तीखा हमला बोला और उसे “ब्राह्मण और संत विरोधी” करार दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने पार्टी को ‘विदेशी जनता पार्टी’ तक कह दिया।
ब्राह्मण जनप्रतिनिधियों पर साधा निशाना
अलंकार ने ब्राह्मण वर्ग के सांसदों और विधायकों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जो जनप्रतिनिधि ब्राह्मण समाज का प्रतिनिधित्व करने का दावा करते हैं, वे “कॉरपोरेट कर्मचारियों की तरह काम कर रहे हैं” और आलाकमान पर निर्भर होकर चुप्पी साधे हुए हैं।
उन्होंने आशंका जताई कि यदि वर्तमान नीतियां जारी रहीं तो समाज जातियों में बंट जाएगा और भविष्य में “सिविल वॉर जैसी स्थिति” पैदा हो सकती है।
डीएम पर लगाए गंभीर आरोप
इस्तीफे के बाद अलंकार अग्निहोत्री ने बरेली के जिलाधिकारी अविनाश सिंह पर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि उन्हें 20 मिनट तक बंधक बनाए रखा गया और दो घंटे के भीतर आवास खाली करने का निर्देश दिया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि डीएम को लखनऊ से फोन आया था।
अलंकार ने कहा, “मैंने अपने इस्तीफा पत्र में स्पष्ट रूप से कारणों का उल्लेख किया है। अपने समाज के साथ हो रहे अन्याय को मैं बर्दाश्त नहीं कर सकता।”
आगे की रणनीति
‘राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा’ के जरिए अलंकार अग्निहोत्री ने सामाजिक और धार्मिक मुद्दों को राजनीतिक मंच पर उठाने का संकेत दिया है। फिलहाल पार्टी की संगठनात्मक संरचना और आगामी चुनावी रणनीति को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन उनके बयानों से स्पष्ट है कि वे सामाजिक न्याय और सांस्कृतिक अस्मिता को केंद्र में रखकर राजनीति करने की तैयारी में हैं।
अब देखना होगा कि प्रशासनिक सेवा से राजनीति में आए अलंकार अग्निहोत्री का यह कदम प्रदेश की राजनीति में कितना प्रभाव डाल पाता है।














