नौ गाजा पीर दरगाह के पास नए निर्माण पर रोक, एक हफ्ते में बाड़ लगाने के निर्देश
दिल्ली हाईकोर्ट ने यमुना बाढ़ क्षेत्र में अवैध निर्माण को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कहा है कि कब्रिस्तान के नाम पर या किसी भी अन्य बहाने से बाढ़ क्षेत्र में घर, मकान या शेड बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने नौ गाजा पीर दरगाह (Nau Gaza Peer Dargah) के आसपास किसी भी तरह के नए निर्माण पर तत्काल रोक लगा दी है और पूरे इलाके में बाड़ लगाने के निर्देश दिए हैं।
जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ ने यमुना नदी तट पर दरगाह और उससे सटे कब्रिस्तान के पास कथित अवैध निर्माण को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश जारी किया।
डीडीए और एलएंडडीओ को एक हफ्ते में बाड़ लगाने का आदेश
कोर्ट ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) को निर्देश दिया कि वे एक सप्ताह के भीतर कब्रिस्तान क्षेत्र में बाड़ लगाएं, ताकि भविष्य में किसी भी तरह के अतिक्रमण को रोका जा सके। इसके साथ ही कोर्ट ने दोनों एजेंसियों को भूमि की मौजूदा स्थिति को लेकर संयुक्त हलफनामा दाखिल करने को भी कहा है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बाड़ लगाए जाने के बाद इलाके की तस्वीरें अगली सुनवाई से पहले कोर्ट के रिकॉर्ड पर रखी जाएंगी, और इस दौरान क्षेत्र में कोई नया निर्माण नहीं होगा।
“मुद्दा गंभीर, बाढ़ क्षेत्र में रहने की अनुमति नहीं”
22 दिसंबर को दिए गए अपने आदेश में कोर्ट ने कहा,“यह मामला बेहद गंभीर है। बाढ़ क्षेत्र में लोगों को कब्रिस्तान या किसी अन्य उद्देश्य के नाम पर घर, मकान या शेड बनाने की इजाजत नहीं दी जा सकती।”
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि कब्रिस्तान से सटी नौ गाजा पीर दरगाह के पास की जमीन का लगातार इस्तेमाल किया जा रहा था, जहां करीब 100 से अधिक परिवार रह रहे थे।
कोर्ट ने तस्वीरें देखकर जताई नाराज़गी
दरगाह की देखरेख करने वाले की ओर से दलील दी गई कि यह जमीन कब्रिस्तान के लिए आवंटित है। इस दौरान मस्जिद और कब्रिस्तान की कुछ तस्वीरें भी कोर्ट के सामने पेश की गईं। तस्वीरें देखने के बाद बेंच ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा,“तस्वीरें बेहद चिंताजनक स्थिति दिखाती हैं। बड़े-बड़े पेड़ उखाड़ दिए गए हैं, जिससे साफ जाहिर होता है कि जमीन पर लगातार निर्माण गतिविधियां हो रही थीं।”
कब्जाधारकों को 10 जनवरी तक सामान हटाने का वक्त
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि दरगाह की देखरेख करने वाले व्यक्ति समेत किसी को भी नौ गाजा पीर दरगाह से सटी जमीन पर रहने की अनुमति नहीं होगी। कोर्ट ने सभी कब्जाधारकों को 10 जनवरी तक अपना सामान हटाने का समय दिया है।
इस मामले में अगली सुनवाई 27 जनवरी को होगी।
दफनाने को लेकर भी स्पष्ट निर्देश
कोर्ट ने कहा कि यदि किसी शव को दफनाया जाना है, तो वह केवल बाड़े वाले निर्धारित क्षेत्र के भीतर ही किया जाएगा। दफनाने के बाद किसी भी व्यक्ति को वहां रुकने या ठहरने की अनुमति नहीं होगी। यह व्यवस्था अदालत के अगले आदेश तक लागू रहेगी।














