“पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोले चोटों के चौंकाने वाले राज—सिर में फ्रैक्चर, पसलियां टूटीं, फेफड़ा फटा, शरीर पर कई गंभीर घाव; प्राइवेट पार्ट अलग मिलने से जांच की दिशा पर सवाल”
हेमोरेजिक शॉक से मौत, लेकिन आखिर इतनी गंभीर चोटें कैसे आईं?
पर्दाफाश न्यूज़ | विशेष रिपोर्ट
मथुरा के वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की संदिग्ध मौत का मामला अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद और भी गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है। जिस मौत को शुरुआती जांच में पुलिस ने प्रथम दृष्टया आत्महत्या की संभावना से जोड़कर देखा था, उसमें पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने शरीर पर मौजूद चोटों की जो तस्वीर सामने रखी है, उसने पूरे घटनाक्रम की गहन और वैज्ञानिक जांच की जरूरत को और बढ़ा दिया है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दीपक के शरीर पर सिर, होंठ, ठोड़ी, पैर, पसलियों, फेफड़े और प्राइवेट पार्ट सहित कई हिस्सों में गंभीर चोटों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार मौत का कारण हेमोरेजिक शॉक यानी अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उत्पन्न शॉक बताया गया है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि यह मौत आत्महत्या से जुड़ी घटना थी, तो शरीर पर इतनी गंभीर और अलग-अलग स्थानों पर चोटें किस परिस्थितियों में आईं? क्या ये चोटें गिरने के कारण हुईं, किसी अन्य प्रक्रिया से जुड़ी थीं या घटनास्थल पर ऐसा कुछ हुआ जिसे जांच में अभी पूरी तरह समझा जाना बाकी है? इन सवालों का अंतिम उत्तर जांच एजेंसियों की फॉरेंसिक और अन्य साक्ष्यों के आधार पर होने वाली जांच से ही सामने आएगा।
सिर के पिछले हिस्से में गंभीर चोट, खोपड़ी में हेयरलाइन फ्रैक्चर
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर के पिछले हिस्से पर गंभीर चोट का उल्लेख किया गया है। चोट वाली जगह पर खून जमा होने की बात सामने आई है। जांच में खोपड़ी में हेयरलाइन फ्रैक्चर यानी बारीक दरार भी दर्ज की गई है।
रिपोर्ट में सिर पर मौजूद घाव पर 14 टांके लगाए जाने का उल्लेख है। इसके अलावा निचले होंठ के बाएं हिस्से और ठोड़ी पर भी कटे हुए घाव पाए गए, जिन पर टांके लगाए गए थे।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इन चोटों को मृत्यु से पहले लगी चोटों के तौर पर दर्ज किया गया है। ऐसे में जांच के लिए यह महत्वपूर्ण हो जाता है कि इन चोटों की प्रकृति क्या थी और वे किस परिस्थिति में लगीं।
शरीर के दो हिस्सों में मिलने का उल्लेख, प्राइवेट पार्ट की चोट ने बढ़ाई गंभीरता
इस मामले का सबसे संवेदनशील और गंभीर पहलू पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया प्राइवेट पार्ट से संबंधित चोट है।
रिपोर्ट में शरीर के दो हिस्सों में मिलने का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक पेनिस शरीर से अलग मिला था, जबकि उसके मूल हिस्से पर भी टांके लगा हुआ घाव पाया गया।
यही वह बिंदु है जिसने जांच को और पेचीदा बना दिया है। पुलिस को उस कमरे से ग्राइंडर मशीन भी मिली थी, जिसके बारे में बताया गया कि दीपक वहां रहते थे। पुलिस और फॉरेंसिक टीम इस मशीन समेत घटनास्थल से मिले अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है।
हालांकि, केवल किसी वस्तु के घटनास्थल से बरामद होने के आधार पर घटना की परिस्थितियों का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। यह फॉरेंसिक जांच का विषय है कि बरामद मशीन का घटना से कोई संबंध था या नहीं।
पैर में घाव, हड्डी में फ्रैक्चर—छाती की पसलियां भी टूटीं
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पैर पर लगभग 5×1 सेंटीमीटर का घाव मिलने की जानकारी दर्ज है। इसके नीचे की हड्डी में फ्रैक्चर भी पाया गया।
लेकिन चोटों की सूची यहीं खत्म नहीं होती।
छाती की जांच में बाईं तरफ की पांचवीं से आठवीं पसली तक फ्रैक्चर पाया गया। इसके साथ ही बायां फेफड़ा भी फटा हुआ था। फेफड़े के आसपास की कैविटी में खून और खून के थक्के पाए गए।
इससे यह संकेत मिलता है कि शरीर के अंदर भी गंभीर रक्तस्राव हुआ था। यही तथ्य मौत के कारण से जुड़े पोस्टमार्टम निष्कर्ष को महत्वपूर्ण बनाता है।
मौत का कारण: अत्यधिक रक्तस्राव से हुआ हेमोरेजिक शॉक
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक मौत का कारण हेमोरेजिक शॉक बताया गया है।
सरल शब्दों में इसका अर्थ है कि गंभीर चोटों के कारण शरीर में अत्यधिक रक्तस्राव हुआ और रक्त की भारी कमी से शरीर शॉक की स्थिति में चला गया। यह स्थिति जानलेवा हो सकती है।
रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि मौत पोस्टमार्टम से करीब एक दिन पहले हुई थी।
अब जांचकर्ताओं के सामने केवल यह पता लगाना पर्याप्त नहीं है कि मौत रक्तस्राव के कारण हुई। असली सवाल यह है कि वह रक्तस्राव किन चोटों से हुआ और वे चोटें किन परिस्थितियों में आईं?
यही वह कड़ी है, जिसे घटनास्थल, CCTV फुटेज, फॉरेंसिक साक्ष्य, मोबाइल फोन और अन्य उपलब्ध तथ्यों से जोड़कर देखना होगा।
चौथी मंजिल से गिरने की CCTV तस्वीर, लेकिन सवालों का सिलसिला बरकरार
पुलिस की ओर से 27 सितंबर को सामने आई जानकारी के अनुसार CCTV फुटेज में 25 सितंबर की सुबह करीब 10:36 बजे दीपक के चौथी मंजिल से गिरने की घटना दिखाई देने की बात कही गई थी।
पुलिस ने प्रथम दृष्टया आत्महत्या की संभावना जताई थी।
लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद जांच के सामने अब कई ऐसे तथ्य हैं, जिनकी अलग-अलग कोणों से पड़ताल जरूरी हो गई है।
क्या चौथी मंजिल से गिरने की घटना ही शरीर पर मिली सभी चोटों की पर्याप्त व्याख्या करती है? क्या सभी चोटों का पैटर्न गिरने की घटना से मेल खाता है? क्या घटनास्थल पर मिले साक्ष्य पोस्टमार्टम निष्कर्षों के साथ पूरी तरह संगत हैं?
इन सवालों का जवाब अनुमान से नहीं, बल्कि विशेषज्ञ फॉरेंसिक जांच से निकलना चाहिए।
ग्राइंडर मशीन ने बढ़ाया रहस्य, फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार
जिस कमरे में दीपक रहते थे, वहां से ग्राइंडर मशीन बरामद होना भी जांच का अहम हिस्सा बन गया है। पुलिस ने मशीन को कब्जे में लेकर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे जाने की जानकारी दी है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मशीन पर कोई जैविक या अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य मिलता है या नहीं और उसका घटना से कोई प्रत्यक्ष संबंध स्थापित होता है या नहीं।
किसी भी जांच में घटनास्थल से बरामद वस्तु तभी निर्णायक बनती है, जब वैज्ञानिक परीक्षण और अन्य साक्ष्यों से उसका संबंध स्थापित हो।
इसलिए इस मामले में फॉरेंसिक रिपोर्ट की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है।
परिजन पूछ रहे सवाल—क्या हर पहलू की होगी निष्पक्ष जांच?
दीपक लोधी के परिवार की ओर से भी उनकी मौत की परिस्थितियों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। परिवार ने मामले की गहन जांच की मांग की है।
परिजनों के सवालों को केवल भावनात्मक प्रतिक्रिया मानकर नजरअंदाज करने के बजाय जांच एजेंसियों के लिए जरूरी है कि उपलब्ध प्रत्येक तथ्य को रिकॉर्ड पर लेकर उसकी वैज्ञानिक तरीके से जांच की जाए।
मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई हो या दुर्घटना अथवा आत्महत्या से जुड़ी हो—हर स्थिति में निष्पक्ष जांच का मूल उद्देश्य यही होना चाहिए कि घटनाक्रम की पूरी कड़ी सामने आए और किसी भी महत्वपूर्ण तथ्य की अनदेखी न हो।
सवाल सिर्फ मौत का नहीं, मौत तक पहुंचने वाली पूरी कड़ी का है
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल अब केवल यह नहीं है कि दीपक की मौत कैसे हुई। सवाल यह भी है कि मौत से पहले उनके शरीर पर दर्ज इतनी गंभीर चोटें किन परिस्थितियों में आईं?
सिर में चोट और खोपड़ी में फ्रैक्चर।
होंठ और ठोड़ी पर घाव।
पैर में चोट और हड्डी में फ्रैक्चर।
पांचवीं से आठवीं पसली तक फ्रैक्चर।
फेफड़े का फटना।
शरीर के अंदर रक्तस्राव।
और प्राइवेट पार्ट से जुड़ी गंभीर चोट।
इन सभी तथ्यों को एक साथ रखकर देखना जांच के लिए बेहद जरूरी है।
साथ ही यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि किसी भी संभावना को जांच पूरी होने से पहले अंतिम सत्य न माना जाए।
पुलिस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती: हर साक्ष्य को जोड़ना
CCTV में चौथी मंजिल से गिरने की घटना, कमरे से बरामद ग्राइंडर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज चोटें, मोबाइल फोन, घटनास्थल की स्थिति और फॉरेंसिक साक्ष्य—इन सभी को एक ही जांच-श्रृंखला में रखकर देखा जाना जरूरी है।
यदि कोई चोट गिरने से आई है तो उसका वैज्ञानिक आधार क्या है? यदि कोई चोट गिरने से नहीं समझाई जा सकती, तो उसकी वजह क्या थी? घटनास्थल की स्थिति क्या पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मेल खाती है? CCTV में घटना से पहले और बाद की गतिविधियां क्या बताती हैं?
ऐसे सवालों का जवाब ही इस मामले की वास्तविक तस्वीर सामने ला सकता है।
पर्दाफाश न्यूज़ का सवाल: संदेह नहीं, सच्चाई चाहिए
दीपक लोधी की मौत ने कई सवाल खड़े किए हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने मौत का चिकित्सकीय कारण तो बताया है, लेकिन घटनाक्रम की पूरी कहानी अभी जांच के दायरे में है।
हेमोरेजिक शॉक मौत का कारण बताया गया है, लेकिन अत्यधिक रक्तस्राव तक पहुंचाने वाली परिस्थितियां क्या थीं—यह सवाल अभी बाकी है।
पुलिस ने आत्महत्या की संभावना की बात कही है, वहीं परिवार ने गहन जांच की मांग की है। ऐसे में जरूरी है कि जांच किसी एक प्रारंभिक संभावना तक सीमित न रहे और उपलब्ध सभी साक्ष्यों की वैज्ञानिक तरीके से पड़ताल हो।
वृंदावन जैसे धार्मिक और संवेदनशील क्षेत्र में हुई इस घटना में सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि सच सामने आए—न कम, न ज्यादा।
न किसी निर्दोष पर सवाल उठे और न किसी संभावित तथ्य को दबाया जाए।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट, CCTV फुटेज, फॉरेंसिक साक्ष्य, मोबाइल डेटा और घटनास्थल की वैज्ञानिक जांच—इन सभी को एक साथ जोड़कर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की मौत के पीछे वास्तव में क्या परिस्थितियां थीं।
अब निगाह जांच की अगली कड़ी पर है।















