जबीहुल्लाह मुजाहिद का दावा- इस्लामाबाद जानबूझकर अफगानिस्तान के साथ तनाव बढ़ा रहा है, ताकि सऊदी के साथ रक्षा समझौते की जिम्मेदारियों से बच सके
नई दिल्ली। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच तालिबान ने इस्लामाबाद पर गंभीर आरोप लगाए हैं। तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद का दावा है कि पाकिस्तान जानबूझकर अफगानिस्तान में सैन्य कार्रवाई कर रहा है, ताकि वह सऊदी अरब और तुर्की के साथ हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारियों से बचने का रास्ता तलाश सके।
मुजाहिद के इस बयान के बाद पाकिस्तान की अफगानिस्तान नीति और मक्का समझौते को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। हालांकि, पाकिस्तान की ओर से तालिबान के इस दावे को लेकर अलग रुख सामने आया है। इस्लामाबाद लगातार अफगानिस्तान पर आतंकवादी संगठनों को अपनी जमीन का इस्तेमाल करने देने का आरोप लगाता रहा है।
क्या है मक्का संयुक्त रक्षा समझौता?
7 अगस्त 2026 को सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच मक्का में संयुक्त रक्षा समझौता हुआ था। समझौते का उद्देश्य तीनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करना है।
समझौते के तहत तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला होने की स्थिति में उसे सामूहिक सुरक्षा के नजरिए से देखा जाना है। इसी प्रावधान को लेकर अब तालिबान ने पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
तालिबान ने पाकिस्तान पर क्या आरोप लगाया?
कंधार में एक धार्मिक मदरसे के कार्यक्रम में बोलते हुए जबीहुल्लाह मुजाहिद ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान अफगानिस्तान के साथ जानबूझकर संघर्ष की स्थिति बनाए रखना चाहता है।
मुजाहिद के मुताबिक, इस्लामाबाद अफगानिस्तान में सैन्य कार्रवाई को इस तरह पेश कर रहा है, जैसे वह वहां चल रहे संघर्ष में उलझा हुआ है। तालिबान का आरोप है कि इसके जरिए पाकिस्तान मक्का समझौते के तहत सऊदी अरब के प्रति अपनी संभावित रक्षा प्रतिबद्धताओं से बचने की कोशिश कर रहा है।
हालांकि, ये आरोप तालिबान की ओर से लगाए गए हैं और पाकिस्तान ने अपनी सैन्य कार्रवाई को अलग कारणों से जायज ठहराया है।
अफगानिस्तान में 10 ठिकानों पर हमले का दावा
पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार, उसकी सेना ने अफगानिस्तान में करीब 10 ठिकानों को निशाना बनाया। कंधार, पक्तिया और खोस्त समेत कई इलाकों में कार्रवाई की बात सामने आई है।
अफगान अधिकारियों के मुताबिक, इन हवाई हमलों में चार नागरिकों की मौत हुई है। कंधार को खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा का प्रभाव क्षेत्र है।
पाकिस्तान का क्या कहना है?
पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की जमीन से उसके खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों और ड्रोन हमलों को अंजाम दिया जा रहा है। इस्लामाबाद का कहना है कि अफगानिस्तान में मौजूद कुछ आतंकी ठिकाने पाकिस्तान की सुरक्षा के लिए खतरा हैं और सैन्य कार्रवाई इसी संदर्भ में की जा रही है।
दूसरी ओर, काबुल इन आरोपों को खारिज करता रहा है।
क्यों बढ़ रहा है तनाव?
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा, आतंकवाद और सुरक्षा को लेकर लंबे समय से तनाव है। हालिया हवाई हमलों और जवाबी आरोपों ने दोनों देशों के रिश्तों को और तनावपूर्ण बना दिया है।
अब तालिबान की ओर से मक्का रक्षा समझौते को इस सैन्य कार्रवाई से जोड़ने के बाद मामला केवल पाकिस्तान-अफगानिस्तान विवाद तक सीमित नहीं रह गया है। इससे सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच हुए रक्षा समझौते की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
फिलहाल, तालिबान के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। आने वाले दिनों में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और समझौते से जुड़े अन्य पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रियाएं इस विवाद की दिशा को स्पष्ट कर सकती हैं।















