HomeNCR Newsनोएडा में दफ्तरों से बाहर निकले प्राधिकरण की पूरी अफसरशाही!

नोएडा में दफ्तरों से बाहर निकले प्राधिकरण की पूरी अफसरशाही!

“CEO से ACO और फिर GM Civil तक अधिकारी महीने में एक दिन सेक्टरों में पहुंचें—सेक्टर-49 से उठी मांग को पूरे नोएडा के लिए बनाया जाए प्रशासनिक मॉडल”

पर्दाफाश न्यूज़ | नोएडा

नोएडा की पहचान एक सुनियोजित और आधुनिक शहर के रूप में होती है, लेकिन किसी भी शहर की वास्तविक व्यवस्था का मूल्यांकन उसके दफ्तरों और फाइलों से नहीं, बल्कि उसकी सड़कों, पार्कों, नालियों, फुटपाथों, जलनिकासी व्यवस्था और नागरिक सुविधाओं की जमीनी स्थिति से होता है। यही कारण है कि अब समय आ गया है कि नोएडा प्राधिकरण की शीर्ष प्रशासनिक व्यवस्था भी नियमित रूप से फाइलों से निकलकर फील्ड में दिखाई दे।

सेक्टर-49 में लंबे समय से नोएडा प्राधिकरण के स्तर पर आधिकारिक स्थलीय निरीक्षण नहीं होने की स्थानीय शिकायत के बीच सांसद डॉ. महेश शर्मा के राजनीतिक सलाहकार प्रशांत त्यागी ने नोएडा प्राधिकरण के महाप्रबंधक (सिविल) श्री एस.पी. सिंह को पत्र भेजकर सेक्टर-49 का आधिकारिक निरीक्षण कराने का अनुरोध किया है।

लेकिन पर्दाफाश न्यूज़ इस स्थानीय मांग को केवल जीएम सिविल तक सीमित नहीं मानता।

जरूरत इससे कहीं बड़ी है।

नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) से लेकर ACO, फिर GM Civil और उसके बाद SM तथा अन्य संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों के लिए एक नियमित सेक्टर फील्ड विजिट कार्यक्रम बनाया जाना चाहिए।

ऐसा कार्यक्रम जिसमें महीने में कम से कम एक दिन अधिकारी किसी न किसी सेक्टर में पहुंचें, जनता की समस्याएं सीधे सुनें, मौके पर वास्तविक स्थिति देखें और संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध समाधान के निर्देश दें।

क्योंकि जिस समस्या को अधिकारी अपनी आंखों से देख लेते हैं, उसकी गंभीरता समझने के लिए किसी लंबी फाइल की जरूरत नहीं पड़ती।


पहली जिम्मेदारी CEO की—पूरे सिस्टम को फील्ड में उतारने की

नोएडा प्राधिकरण के शीर्ष स्तर से अगर इस तरह की व्यवस्था शुरू होती है तो इसका सबसे बड़ा संदेश यही होगा कि प्रशासन जनता से दूरी बनाकर नहीं, बल्कि जनता के बीच रहकर काम करना चाहता है।

इसलिए सबसे पहले CEO स्तर पर एक व्यापक ‘सेक्टर फील्ड विजिट प्रोग्राम’ तैयार किया जाना चाहिए।

इस कार्यक्रम के तहत पूरे नोएडा के सेक्टरों का चरणबद्ध तरीके से निरीक्षण कराया जा सकता है।

CEO स्वयं समय-समय पर प्रमुख सेक्टरों का निरीक्षण करें और साथ ही संबंधित विभागों के अधिकारियों को भी मौके पर मौजूद रहने के निर्देश दें।

इससे एक तरफ स्थानीय समस्याओं की वास्तविक स्थिति सामने आएगी, वहीं दूसरी तरफ विभागीय अधिकारियों में भी यह संदेश जाएगा कि फील्ड में होने वाले काम की समीक्षा केवल कागजों के आधार पर नहीं होगी।


ACO की भूमिका भी हो बेहद महत्वपूर्ण

CEO के बाद ACO स्तर पर नियमित सेक्टर मॉनिटरिंग की व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए।

ACO द्वारा निर्धारित सेक्टरों में जाकर यह देखा जा सकता है कि पूर्व में दिए गए निर्देशों पर कितना काम हुआ, कौन-सी समस्याएं अभी लंबित हैं और किन मामलों में विभागीय स्तर पर कार्रवाई अपेक्षित है।

अगर किसी सेक्टर में सड़क, जलनिकासी, पार्क, फुटपाथ, स्ट्रीट लाइट, सीवर, सफाई, हरित क्षेत्र या अन्य नागरिक सुविधाओं से संबंधित समस्या सामने आती है तो मौके पर ही संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए जा सकते हैं।

इससे प्रशासनिक निगरानी सिर्फ फाइलों तक सीमित नहीं रहेगी।


इसके बाद GM Civil की जिम्मेदारी—सेक्टर-49 का निरीक्षण प्राथमिकता में

CEO और ACO स्तर पर व्यापक फील्ड मॉनिटरिंग की व्यवस्था के साथ ही GM Civil की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

सेक्टर-49 को लेकर वर्तमान में जो मांग सामने आई है, उसमें स्थानीय नागरिकों और आरडब्ल्यूए की अपेक्षा है कि GM Civil स्वयं सेक्टर का आधिकारिक स्थलीय निरीक्षण करें।

सांसद डॉ. महेश शर्मा के राजनीतिक सलाहकार प्रशांत त्यागी द्वारा GM Civil एस.पी. सिंह को भेजे गए पत्र में भी सेक्टर की विभिन्न नागरिक समस्याओं और सिविल विभाग से संबंधित जनशिकायतों को देखते हुए स्थलीय निरीक्षण का अनुरोध किया गया है।

ऐसे में सेक्टर-49 का निरीक्षण केवल एक अधिकारी का दौरा न होकर एक मॉडल फील्ड इंस्पेक्शन बन सकता है।

निरीक्षण के दौरान आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों और स्थानीय निवासियों से सीधे समस्याएं सुनी जाएं तथा संबंधित अधिकारियों को मौके पर आवश्यक निर्देश दिए जाएं।


सेक्टर-49 का सवाल, लेकिन समाधान पूरे नोएडा का

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सेक्टर-49 में उठी मांग को सिर्फ एक सेक्टर की समस्या मानकर समाप्त नहीं किया जाना चाहिए।

नोएडा के लगभग हर सेक्टर में समय-समय पर अलग-अलग प्रकार की नागरिक समस्याएं सामने आती हैं।

कहीं सड़क की मरम्मत की जरूरत है।

कहीं जलनिकासी व्यवस्था पर सवाल हैं।

कहीं पार्कों के रखरखाव को लेकर शिकायतें हैं।

कहीं फुटपाथ और पैदल मार्ग की स्थिति चिंता का विषय हो सकती है।

कहीं स्ट्रीट लाइट से जुड़ी समस्या हो सकती है।

कहीं सीवर या जलभराव की शिकायतें सामने आ सकती हैं।

कहीं नागरिक सुविधाओं के रखरखाव की जरूरत हो सकती है।

इन समस्याओं की वास्तविक स्थिति जानने का सबसे बेहतर तरीका है—अधिकारी स्वयं मौके पर पहुंचें।


महीने में एक दिन तय हो—‘फील्ड डे’

पर्दाफाश न्यूज़ की ओर से यह महत्वपूर्ण सुझाव है कि नोएडा प्राधिकरण हर महीने कम से कम एक दिन ‘सेक्टर फील्ड डे’ के रूप में निर्धारित करने पर विचार करे।

इस दिन CEO, ACO, GM Civil,SM और अन्य संबंधित वरिष्ठ अधिकारी अलग-अलग निर्धारित सेक्टरों में जाएं।

जरूरत के अनुसार विभागवार टीमें बनाई जाएं।

पहले से आरडब्ल्यूए को सूचना दी जाए।

स्थानीय निवासियों से प्रमुख समस्याओं की सूची ली जाए।

अधिकारी मौके पर समस्याओं का निरीक्षण करें।

और फिर हर समस्या के सामने स्पष्ट रूप से दर्ज हो—

समस्या क्या है?

किस विभाग की जिम्मेदारी है?

कौन अधिकारी जिम्मेदार है?

समाधान कब तक होगा?

यही चार सवाल किसी भी शिकायत को वास्तविक कार्रवाई में बदल सकते हैं।


फाइलों में निस्तारण नहीं, जमीन पर समाधान चाहिए

किसी भी प्रशासनिक व्यवस्था में शिकायतों का आंकड़ा महत्वपूर्ण होता है, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है शिकायत का वास्तविक समाधान।

अगर किसी नागरिक ने सड़क की समस्या बताई और फाइल में उसे ‘निस्तारित’ कर दिया गया, लेकिन मौके पर सड़क की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया, तो आम नागरिक के लिए वह शिकायत निस्तारित नहीं हुई।

इसी तरह यदि जलभराव की शिकायत का समाधान कागज पर दर्ज हो जाए, लेकिन अगली बारिश में वही समस्या फिर सामने आ जाए, तो प्रशासन को अपनी कार्यप्रणाली की समीक्षा करनी चाहिए।

इसलिए फील्ड विजिट के बाद फॉलोअप निरीक्षण भी जरूरी है।


आरडब्ल्यूए और जनता को मिले सीधे संवाद का अवसर

सेक्टरों में अधिकारियों के दौरे का सबसे बड़ा फायदा यही होगा कि स्थानीय निवासी अपनी बात सीधे संबंधित अधिकारियों तक पहुंचा सकेंगे।

आरडब्ल्यूए के पदाधिकारी सेक्टर की सामूहिक समस्याओं का विवरण दे सकते हैं।

स्थानीय निवासी व्यक्तिगत या मोहल्ला स्तर की समस्याएं बता सकते हैं।

अधिकारी मौके पर जाकर यह तय कर सकते हैं कि कौन-सी शिकायत तत्काल समाधान चाहती है और कौन-सी समस्या के लिए विस्तृत तकनीकी प्रक्रिया आवश्यक है।

इससे जनता और प्राधिकरण के बीच संवाद मजबूत होगा।


SM स्तर पर भी तय हो जिम्मेदारी

CEO, ACO और GM Civil के साथ-साथ SM तथा अन्य संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी स्पष्ट होनी चाहिए।

जो समस्या जिस विभाग से जुड़ी हो, उसके वरिष्ठ अधिकारी को निरीक्षण में शामिल किया जाए।

सिर्फ एक अधिकारी के दौरे से कई बार समस्या का समाधान संभव नहीं होता, क्योंकि एक ही क्षेत्र में सिविल, उद्यान, जल, सफाई, बिजली या अन्य विभागों से जुड़े विषय एक साथ सामने आ सकते हैं।

ऐसे में जरूरत के अनुसार संयुक्त फील्ड निरीक्षण कराया जाना चाहिए।

इससे ‘यह मामला हमारे विभाग का नहीं है’ जैसी स्थिति को कम किया जा सकता है और नागरिकों को अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने से राहत मिल सकती है।


हर सेक्टर की बने ‘समस्या डायरी’

प्राधिकरण चाहे तो प्रत्येक सेक्टर के लिए एक डिजिटल ‘समस्या डायरी’ भी विकसित कर सकता है।

निरीक्षण के दौरान सामने आई प्रत्येक समस्या उसमें दर्ज हो।

उसका फोटो या निरीक्षण विवरण हो।

संबंधित विभाग का नाम दर्ज हो।

जिम्मेदार अधिकारी का नाम दर्ज हो।

समाधान की समय सीमा दर्ज हो।

और अगली फील्ड विजिट में उसकी समीक्षा हो।

इस व्यवस्था से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि अधिकारी भी यह देख सकेंगे कि उनके स्तर पर दिए गए निर्देश वास्तव में लागू हुए या नहीं।


जनता को अधिकारी दिखें—यही भरोसे की पहली सीढ़ी

प्रशासन और जनता के बीच विश्वास तभी मजबूत होता है जब नागरिकों को यह महसूस हो कि उनकी समस्या सुनने वाला कोई है।

यदि महीने में एक दिन अधिकारी नियमित रूप से सेक्टरों में पहुंचते हैं तो इसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी सकारात्मक होगा।

लोगों को लगेगा कि प्राधिकरण केवल नोटिस, पत्र और ऑनलाइन शिकायतों तक सीमित नहीं है।

बल्कि अधिकारी खुद उनके बीच आकर समस्याओं को देख रहे हैं।

यह व्यवस्था नोएडा की प्रशासनिक संस्कृति में एक सकारात्मक बदलाव ला सकती है।


सेक्टर-49 बने शुरुआत, लक्ष्य हो पूरा नोएडा

सेक्टर-49 में GM Civil के निरीक्षण की मांग तत्काल पूरी की जानी चाहिए—यह स्थानीय निवासियों की अपेक्षा है।

लेकिन इसके साथ ही इस अवसर का उपयोग एक बड़े प्रशासनिक मॉडल को लागू करने के लिए किया जा सकता है।

CEO से शुरुआत हो।

ACO स्तर पर निगरानी हो।

GM Civil तकनीकी और सिविल समस्याओं का स्थलीय निरीक्षण करें।

SE और SM संबंधित कार्यों की जिम्मेदारी संभालें।

और जरूरत पड़ने पर अन्य सभी संबंधित विभागों के अधिकारी मौके पर मौजूद रहें।

यानी व्यवस्था ऐसी हो कि समस्या सामने आने के बाद अधिकारी यह न कहें कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी।


पर्दाफाश न्यूज़ का सवाल—क्या नोएडा अब ‘ऑफिस टू फील्ड’ मॉडल अपनाएगा?

सेक्टर-49 से उठी यह मांग दरअसल पूरे नोएडा के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा करती है।

क्या नोएडा प्राधिकरण महीने में एक दिन ऐसा निर्धारित कर सकता है जब वरिष्ठ अधिकारी नियमित रूप से अलग-अलग सेक्टरों में जाकर जनता की समस्याएं सुनें?

क्या CEO स्तर से इसका वार्षिक कैलेंडर बनाया जा सकता है?

क्या ACO स्तर पर इसकी नियमित मॉनिटरिंग हो सकती है?

क्या GM Civil सहित SE, SM और अन्य विभागीय अधिकारी मौके पर समस्याओं का निरीक्षण कर सकते हैं?

क्या प्रत्येक समस्या के लिए समय सीमा तय कर उसकी अगली बैठक में समीक्षा हो सकती है?

अगर ऐसा होता है तो यह केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं होगा, बल्कि जनता और प्राधिकरण के बीच जवाबदेही की नई व्यवस्था बन सकती है।

सेक्टर-49 का निरीक्षण एक शुरुआत हो सकता है।

लेकिन लक्ष्य होना चाहिए—नोएडा का कोई भी सेक्टर ऐसा न रहे जहां अधिकारी सिर्फ फाइलों के आधार पर स्थिति जानें।

अधिकारी जाएं, देखें, सुनें, समझें और फिर समाधान कराएं।

क्योंकि नोएडा की वास्तविक तस्वीर कार्यालय की फाइलों में नहीं, सेक्टरों की जमीन पर दिखाई देती है।

और अगर प्राधिकरण को अपनी कार्यप्रणाली को और बेहतर बनाना है तो अब वक्त है कि ‘फाइल से फील्ड’ और ‘शिकायत से समाधान’ की दिशा में ठोस कदम उठाया जाए।

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VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
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