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शताब्दी के जश्न के बाद RSS की असली परीक्षा! इंदौर में जुटेगा संघ का शीर्ष नेतृत्व, अब संगठन की नई चाल और भविष्य की दिशा पर मंथन

“408 दिग्गजों की मौजूदगी में तीन दिन चलेगा महामंथन, शाखाओं के विस्तार से लेकर संगठनात्मक चुनाव तक तय होंगे अगले दौर के बड़े फैसले; युवाओं, महिलाओं और नशामुक्ति को लेकर भी बनेगी रणनीति”

इंदौर, 31 अक्टूबर।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ वर्ष पूरे होने का उत्सव अब एक नए मोड़ पर पहुंच रहा है। देशभर में शताब्दी वर्ष के दौरान हुए आयोजनों, सम्मेलनों और जनसंपर्क अभियानों के बाद अब सवाल केवल उपलब्धियों का नहीं, बल्कि आगे की दिशा का है। संघ अपने अगले सौ वर्षों की वैचारिक और संगठनात्मक जमीन किस तरह तैयार करना चाहता है, समाज में अपनी भूमिका को कैसे विस्तार देगा और बदलते सामाजिक परिवेश में युवाओं की भागीदारी को किस रूप में जोड़ेगा? इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए इंदौर में 2 से 4 नवंबर तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल जुटने जा रहा है।

ऊपरी तौर पर यह बैठक शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की समीक्षा और आगामी कार्ययोजना तय करने का संगठनात्मक आयोजन दिखाई देती है, लेकिन इसके एजेंडे में कई ऐसे विषय हैं जो संघ की आने वाली कार्यशैली और प्राथमिकताओं की तस्वीर सामने ला सकते हैं। संगठनात्मक ढांचे में संभावित बदलाव, शाखाओं का विस्तार, समाज के विभिन्न वर्गों से संवाद, नशे के विरुद्ध अभियान और पंच परिवर्तन को जनजीवन का हिस्सा बनाने जैसे मुद्दे इस बैठक को खास बना रहे हैं।

बैठक में करीब 408 वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के शामिल होने की अपेक्षा है। सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, सभी सह सरकार्यवाह, अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य और देश के 11 क्षेत्रों तथा 46 प्रांतों के प्रमुख पदाधिकारी इसमें शामिल होंगे। यानी यह केवल शीर्ष नेतृत्व की बैठक नहीं, बल्कि देशभर में फैले संघ के संगठनात्मक तंत्र की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक होगी।

शताब्दी वर्ष के आयोजनों का हिसाब, अब उपलब्धियों को स्थायी विस्तार में बदलने की चुनौती

संघ के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि शताब्दी वर्ष के दौरान समाज में बनी सक्रियता को स्थायी संगठनात्मक और सामाजिक सहभागिता में कैसे बदला जाए। विजयादशमी 2025 से विजयादशमी 2026 तक देशभर में अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें हिंदू सम्मेलन, गृह संपर्क अभियान, प्रमुख नागरिकों के साथ संवाद और युवाओं के लिए विशेष आयोजन शामिल रहे।

संघ की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में देशभर में 1,01,151 दैनिक शाखाएं संचालित हो रही हैं। साप्ताहिक मिलन और अन्य गतिविधियों को जोड़ दें तो संघ का कार्य लगभग 1,10,849 स्थानों तक पहुंच चुका है। पिछले वर्ष अक्टूबर की तुलना में 13 हजार से अधिक नई दैनिक शाखाओं का शुरू होना संगठन के विस्तार का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

लेकिन इस विस्तार के साथ एक बड़ी चुनौती भी जुड़ी है। शाखाओं की संख्या बढ़ाना एक पहलू है, जबकि उनमें नियमित सहभागिता, वैचारिक प्रशिक्षण और स्थानीय समाज के साथ स्थायी जुड़ाव बनाए रखना दूसरा। इंदौर की बैठक में पिछले तीन वर्षों की विस्तार योजना के अनुभवों और उपलब्धियों की समीक्षा इसी दृष्टि से महत्वपूर्ण होगी।

65 हजार से अधिक हिंदू सम्मेलन: भीड़ से आगे सामाजिक स्वीकार्यता की तलाश

शताब्दी वर्ष के दौरान देशभर में 65,660 हिंदू सम्मेलनों का आयोजन हुआ। शहरों में बस्ती स्तर पर और ग्रामीण क्षेत्रों में मंडल स्तर पर आयोजित इन सम्मेलनों में समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी रही। गृह संपर्क अभियान में भी बड़ी संख्या में लोगों ने सहभागिता की।

इन आयोजनों को संघ केवल कार्यक्रमों की संख्या के रूप में नहीं देखना चाहता, बल्कि इनके माध्यम से बने सामाजिक संपर्क को आगे बढ़ाने की योजना है। संगठन की मंशा है कि स्वयंसेवक समाज की संस्थाओं, संगठनों और स्थानीय समूहों के साथ मिलकर समाजहित के कार्यों में सहयोग करें।

यही वह बिंदु है जहां संघ की आगामी रणनीति का एक महत्वपूर्ण पहलू दिखाई देता है। संगठनात्मक विस्तार के साथ सामाजिक संस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाना और स्वयंसेवकों को स्थानीय समस्याओं के समाधान से जोड़ना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल होता नजर आ रहा है।

संगठन की अंदरूनी संरचना में बदलाव के संकेत, मार्च में शुरू होगा चुनावी चरण

इंदौर की बैठक का एक महत्वपूर्ण पहलू संघ की संगठनात्मक रचना में प्रस्तावित परिवर्तन हैं। इस विषय पर विचार-विमर्श के बाद मार्च में नागपुर में होने वाली अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा से पहले संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

यह प्रक्रिया जिला, विभाग, प्रांत और क्षेत्र स्तर से होते हुए आगे बढ़ेगी। इसी क्रम में मार्च में सरकार्यवाह का निर्वाचन भी होना है।

संघ जैसे व्यापक संगठन में पदाधिकारियों की जिम्मेदारियों, कार्यविभाजन और संगठनात्मक संरचना का महत्व काफी बड़ा है। इसलिए प्रस्तावित बदलावों को केवल प्रशासनिक फेरबदल के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। इनका असर संगठन के कामकाज, जिम्मेदारियों के वितरण और भविष्य की कार्ययोजना पर भी पड़ सकता है।

हालांकि, इंदौर बैठक में किन पदों या व्यवस्थाओं में किस प्रकार का बदलाव प्रस्तावित है, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है। ऐसे में इस विषय पर बैठक के निष्कर्ष और मार्च की प्रतिनिधि सभा पर विशेष नजर रहेगी।

महिलाओं और युवाओं पर फोकस, नई पीढ़ी से संवाद की तैयारी

संघ की आगामी रणनीति में युवाओं और महिलाओं की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। शताब्दी वर्ष के दौरान गृह संपर्क, प्रमुख जन गोष्ठियों और हिंदू सम्मेलनों में महिलाओं की उल्लेखनीय सहभागिता रही। ग्रामीण क्षेत्रों, विश्वविद्यालय परिसरों और अन्य स्थानों पर युवाओं तथा युवतियों के लिए आयोजित कार्यक्रमों में भी अच्छी भागीदारी देखने को मिली।

अब संघ इन आयोजनों से मिले अनुभवों के आधार पर आगे की दिशा तय करना चाहता है। युवाओं की आकांक्षाएं क्या हैं, वे देश और समाज के सामने मौजूद चुनौतियों को किस नजर से देखते हैं और उनकी ओर से किस तरह के सुझाव सामने आ रहे हैं, इन विषयों पर चर्चा होगी।

दरअसल, बदलती जीवनशैली, डिजिटल दुनिया, रोजगार की चुनौतियां और सामाजिक बदलावों के बीच नई पीढ़ी से संवाद किसी भी बड़े सामाजिक संगठन के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है। इंदौर की बैठक में इस संवाद को अधिक प्रभावी बनाने के उपायों पर विचार होना इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है।

नशे के खिलाफ अभियान: अब सामाजिक संगठनों को साथ जोड़ने की तैयारी

बैठक के एजेंडे में नशीले पदार्थों का बढ़ता चलन भी प्रमुखता से शामिल है। विशेषकर युवाओं में नशे की प्रवृत्ति को लेकर संघ सामाजिक और शैक्षणिक संस्थाओं के सहयोग से व्यापक जनजागरण अभियान चलाने की योजना पर विचार करेगा।

इस मुद्दे को केवल व्यक्तिगत आदत या कानून-व्यवस्था की समस्या के रूप में नहीं, बल्कि परिवार, शिक्षा और समाज से जुड़े विषय के रूप में देखने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है। संघ की योजना में सामाजिक संस्थाओं, शिक्षण संस्थानों और अन्य संगठनों की भागीदारी के जरिए युवाओं को नशे से दूर रखने का प्रयास शामिल है।

यह अभियान कितना व्यापक होगा, इसकी कार्ययोजना और स्वरूप पर बैठक में चर्चा होने की संभावना है।

पंच परिवर्तन को घर-घर पहुंचाने की रणनीति

संघ की विचारधारा और सामाजिक कार्ययोजना में पंच परिवर्तन का विशेष महत्व है। सामाजिक समरसता, पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली, कुटुंब प्रबोधन, स्व का बोध और नागरिक कर्तव्य इन पांच विषयों को समाज के व्यवहार में उतारने पर जोर दिया जा रहा है।

शताब्दी वर्ष में इन विषयों को लेकर देशभर में जागरूकता के प्रयास हुए। अब संघ की कोशिश है कि इन्हें केवल भाषणों, सम्मेलनों और आयोजनों तक सीमित न रखकर समाज के दैनिक जीवन से जोड़ा जाए।

इसके लिए विभिन्न सामाजिक संस्थाओं और संगठनों के साथ मिलकर नए कार्यक्रम और अभियान चलाने की योजना बनाई जाएगी। यानी आने वाले समय में संघ का जोर केवल स्वयंसेवकों के माध्यम से गतिविधियां संचालित करने पर नहीं, बल्कि समाज के दूसरे संगठनों को भी इन विषयों से जोड़ने पर रहेगा।

विदेशों में संवाद की समीक्षा, भारत के विचार को वैश्विक मंच पर आगे बढ़ाने की तैयारी

इंदौर बैठक में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के अमेरिका, कनाडा और इंग्लैंड प्रवास के दौरान हुए वैश्विक संवाद की भी समीक्षा होगी। इन प्रवासों में भारत के चिंतन, हिंदुत्व की सही समझ और विश्व कल्याण में भारत की भूमिका जैसे विषयों पर चर्चा हुई थी।

संघ अब इन संवादों को आगे बढ़ाने के तरीकों पर विचार करेगा। यह पहल ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारतीय समाज, संस्कृति और विचार पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा लगातार बढ़ रही है। इसके साथ ही संत रविदास जी की 650वीं जयंती के कार्यक्रमों की समीक्षा और आगामी आयोजनों की योजना भी बैठक के एजेंडे में शामिल है।

तकनीक पर विरोध नहीं, उसके उपयोग को लेकर समाज को जागरूक करने पर जोर

पत्रकारों से बातचीत में अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने स्पष्ट किया कि संघ किसी नई तकनीक का विरोध नहीं करता। उनका कहना था कि तकनीक का उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है, इस पर मनुष्य और समाज को विचार करना आवश्यक है।

उन्होंने शताब्दी वर्ष के दौरान संघ के वैचारिक विमर्श के प्रमुख सवालों का भी उल्लेख किया। हिंदुत्व क्या है, भारत क्या है, भारत को भविष्य में किस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए और समाज में भ्रम पैदा करने वाले तत्व कौन हैं—इन विषयों पर संवाद को महत्वपूर्ण बताया।

आंबेकर ने कहा कि पिछले सौ वर्षों से संघ और हिंदुत्व के विचार पर विमर्श चल रहा है और संघ इस विमर्श के लिए हमेशा खुला है। सरसंघचालक से लेकर अन्य पदाधिकारी संवाद के लिए तैयार रहते हैं।

4 नवंबर को खुलेगा बैठक के फैसलों का पूरा ब्यौरा

तीन दिवसीय बैठक का समापन 4 नवंबर को होगा। इसी दिन सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले पत्रकार वार्ता के माध्यम से बैठक में हुए विचार-विमर्श, शताब्दी वर्ष की समीक्षा और आगामी कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी देंगे। वे पत्रकारों के सवालों का जवाब भी देंगे।

इंदौर की बैठक से निकलने वाला संदेश केवल बीते एक वर्ष के आयोजनों का लेखा-जोखा नहीं होगा। असली महत्व इस बात का रहेगा कि सौ वर्ष की यात्रा के बाद संघ अपने संगठनात्मक विस्तार, सामाजिक सहभागिता, नई पीढ़ी से संवाद और वैचारिक कार्यों को किस दिशा में ले जाना चाहता है।

शताब्दी वर्ष ने संघ को देशभर में बड़े पैमाने पर कार्यक्रमों और संपर्क का अवसर दिया है। अब चुनौती उस संपर्क को निरंतरता देने की है। इंदौर में होने वाला महामंथन इसी सवाल का जवाब तलाशेगा कि उत्सव के बाद संगठन की अगली पारी कैसी होगी और आने वाले वर्षों में संघ किन मुद्दों को अपनी प्राथमिकता बनाएगा।

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VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
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