“पंडाल में सो रहे युवाओं पर टूटा बिजली का कहर, चार की मौत से गांव में मातम—मुख्यमंत्री ने 4-4 लाख की सहायता का ऐलान, मंत्री संपतिया उइके मौके पर पहुंचीं”
पर्दाफाश न्यूज़: नैनपुर/मंडला
मंडला जिले के नैनपुर थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत हीरापुर में गणेश विसर्जन के बाद जो हुआ, उसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। जिस गणेश पंडाल में कुछ घंटे पहले तक भक्ति, उत्साह और उल्लास का माहौल था, वही पंडाल अलसुबह मौत का मंजर बन गया। पंडाल में सो रहे युवाओं के करंट की चपेट में आने से चार युवाओं की मौत हो गई, जबकि कई अन्य को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। हादसे की सूचना फैलते ही पूरे गांव में चीख-पुकार मच गई और देखते ही देखते उत्सव का माहौल मातम में बदल गया।
ताजा रिपोर्टों के अनुसार, हादसा गणेश प्रतिमा विसर्जन के बाद हुआ, जब कुछ युवक पंडाल में ही सो गए थे। पुलिस ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा है कि करंट कैसे फैला और बिजली व्यवस्था में क्या खामी थी, इसकी जांच की जा रही है। बिजली विभाग की तकनीकी जांच से यह स्पष्ट किया जाना है कि हादसा बिजली लाइन टूटने, शॉर्ट सर्किट या किसी अन्य विद्युत कारण से हुआ।
कुछ घंटे पहले था उत्सव, सुबह पसरा मातम
बताया गया कि गणेश प्रतिमा के विसर्जन के बाद रात में युवक वापस लौटे और पंडाल में बने मंच पर सो गए। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक करीब आठ युवक वहां मौजूद थे। अलसुबह अचानक पंडाल में करंट फैल गया। कुछ युवाओं ने झटका महसूस होने के बाद बाहर निकलकर अपनी जान बचाई, लेकिन चार युवक करंट की चपेट से बाहर नहीं निकल सके।
घटना सुबह के समय हुई, जब अधिकांश लोग नींद में थे। यही वजह रही कि हादसे की जानकारी तत्काल आसपास के लोगों को नहीं हो सकी। जब तक परिजन और ग्रामीण मौके तक पहुंचे, स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी थी। ग्रामीणों ने अपने साधनों से प्रभावित युवाओं को नैनपुर के सिविल अस्पताल पहुंचाया।
पुलिस और प्रशासन ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और मामले की जांच शुरू की। रिपोर्टों के अनुसार, घटनास्थल पर बिजली विभाग की टीम भी तकनीकी कारणों की जांच कर रही है।
चार नौजवान चले गए, चार परिवारों की दुनिया उजड़ गई
हादसे में मृतकों के रूप में कृष्ण पिता दिलीप भावरे, वीरेंद्र पिता सोनू भावरे, जेनू पिता मुकेश भावरे और रवि झारिया पिता कल्लू झारिया के नाम सामने आए हैं। उपलब्ध स्थानीय जानकारी के अनुसार सभी की उम्र कम थी और वे अपने परिवारों के लिए महत्वपूर्ण सहारा थे।
कृष्ण भावरे को लेकर बताया गया कि वह घर में भाइयों में अकेला था और उसकी एक बड़ी बहन है। जेनू मुकेश भावरे भी अपने परिवार में अकेला भाई था और उसकी दो बहनें हैं। परिवार के माता-पिता के दिव्यांग होने की जानकारी भी सामने आई है।
रवि झारिया दो भाइयों में छोटा था। बताया गया कि उसके पिता कल्लू झारिया गांव में कोटवार हैं और रवि की मां का पहले ही निधन हो चुका था। वीरेंद्र भावरे दो भाइयों में बड़ा था। इन चारों परिवारों के लिए यह केवल चार मौतों की खबर नहीं, बल्कि भविष्य के सहारे के अचानक छिन जाने की त्रासदी है।
ताजा मीडिया रिपोर्टों में भी चार मृतकों की पुष्टि की गई है, हालांकि उम्र के आंकड़ों में अलग-अलग रिपोर्टों में अंतर दिखाई देता है। इसलिए अंतिम उम्र और अन्य व्यक्तिगत विवरणों की पुष्टि आधिकारिक अभिलेखों से किया जाना जरूरी है।
सवाल बड़ा है—पंडाल में करंट पहुंचा कैसे?
इस हादसे का सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर पंडाल में करंट फैला कैसे?
फिलहाल किसी व्यक्ति या संस्था को हादसे के लिए जिम्मेदार ठहराना जल्दबाजी होगी। पुलिस और बिजली विभाग की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि विद्युत लाइन टूटकर पंडाल के संपर्क में आई, शॉर्ट सर्किट हुआ या बिजली व्यवस्था में किसी अन्य तकनीकी खामी के कारण करंट फैला।
यही जांच इस हादसे की वास्तविक वजह सामने लाएगी। लेकिन सवाल यह जरूर है कि धार्मिक आयोजनों के दौरान बिजली व्यवस्था की सुरक्षा जांच कितनी गंभीरता से की जाती है? क्या आयोजन स्थल पर अर्थिंग, वायरिंग, कनेक्शन और सुरक्षा उपकरणों की पर्याप्त जांच हुई थी? क्या आयोजकों को विद्युत सुरक्षा से जुड़े आवश्यक निर्देश दिए गए थे?
इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही मिलेंगे, लेकिन हीरापुर की घटना ने सार्वजनिक और धार्मिक आयोजनों में विद्युत सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जरूर खड़ी कर दी है।
मंडला विधानसभा क्षेत्र के नैनपुर थाना अंतर्गत ग्राम हीरापुर में गणेश पंडाल में करंट फैलने से चार लोगों के निधन का समाचार अत्यंत हृदयविदारक है।
इस दुखद घटना में दिवंगत हुए लोगों को विनम्र श्रद्धांजलि,शोकाकुल परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं।— Faggan Singh Kulaste (@fskulaste) September 26, 2026
मंत्री संपतिया उइके पहुंचीं हीरापुर, परिवारों से जताई संवेदना
हादसे की खबर मिलते ही मंडला विधायक एवं मंत्री श्रीमती संपतिया उइके हीरापुर पहुंचीं। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण किया और गणेश पंडाल को देखा। चार युवाओं की मौत से दुखी मंत्री ने परिजनों और ग्रामीणों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घटना पर शोक व्यक्त किया है और मृतकों के परिवारों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है। हादसे में घायल लोगों के लिए भी सरकारी सहायता की बात कही गई है। उपलब्ध रिपोर्टों में मुख्यमंत्री की ओर से मृतक परिवारों को चार-चार लाख रुपये की सहायता की पुष्टि होती है।
मंत्री की ओर से यह भी बताया गया कि मृतक परिवारों के चार सदस्यों को आउटसोर्स के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराने की प्रक्रिया की जाएगी। इस संबंध में आगे की प्रशासनिक कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी, ताकि घोषणा वास्तविक सहायता में बदल सके।
तत्काल सहायता के तौर पर पांच-पांच हजार रुपये
मंत्री संपतिया उइके ने चारों मृतकों के परिजनों को तत्काल अंत्येष्टि सहायता के रूप में पांच-पांच हजार रुपये प्रदान किए। इसके अलावा मुख्यमंत्री द्वारा घोषित चार-चार लाख रुपये की सहायता अलग से दी जानी है।
घायल युवाओं के उपचार के लिए भी प्रशासन की ओर से व्यवस्था की गई है। स्थानीय जानकारी के अनुसार प्रियांशु पिता परदेशी भावरे, उम्र लगभग 22 वर्ष, को बेहतर इलाज के लिए जबलपुर रेफर किया गया। अन्य घायल युवाओं की स्थिति उपचार के बाद बेहतर बताई गई है।
कुछ रिपोर्टों में घायलों की संख्या दो और कुछ में तीन बताई गई है, इसलिए घायलों की अंतिम संख्या और उनकी मेडिकल स्थिति की आधिकारिक पुष्टि महत्वपूर्ण रहेगी।
मंत्री से लेकर पुलिस-प्रशासन तक पहुंचा पूरा अमला
हादसे के बाद मंडला पुलिस अधीक्षक श्री राजेश रघुवंशी, नैनपुर एसडीएम, एसडीओपी, विभिन्न थाना प्रभारियों और राजस्व अमले सहित प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। जनप्रतिनिधियों, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने भी पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताई।
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजे जाने और हादसे की परिस्थितियों की पड़ताल किए जाने की जानकारी सामने आई है।
मंडला जिले के हीरापुर गांव में गणेश पंडाल में हुए दुर्भाग्यपूर्ण हादसे में चार युवकों के असमय निधन का समाचार अत्यंत पीड़ादायक है।
दुख की इस घड़ी में आज उनके गृह ग्राम पहुंचकर दिवंगतों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान शोकाकुल परिवारजनों से भेंट कर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त… pic.twitter.com/RoSfCTiG0H
— Sampatiya Uikey (@SampatiyaUikey) September 26, 2026
एक साथ उठीं चार अर्थियां, रो पड़ा हीरापुर
चार युवाओं की एक साथ अंतिम यात्रा ने पूरे हीरापुर को रुला दिया। हजारों की संख्या में लोग अंतिम संस्कार में शामिल हुए। जिस गांव में गणेश उत्सव के बाद खुशियां होनी चाहिए थीं, वहां चार घरों से उठी अर्थियों ने हर आंख को नम कर दिया।
यह दृश्य केवल एक गांव के शोक का दृश्य नहीं था। यह उन परिवारों की पीड़ा थी, जिन्होंने अपने बेटों को खो दिया। किसी घर का अकेला भाई चला गया, किसी परिवार का बड़ा बेटा, किसी का छोटा बेटा और किसी घर का वह सदस्य जिसकी मौजूदगी ही परिवार के भविष्य की उम्मीद थी।
सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने जताया गहरा दुख
घटना पर मंडला क्षेत्र के सांसद श्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने भी गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए इस दर्दनाक हादसे पर शोक प्रकट किया।
मुआवजा जरूरी, लेकिन हादसे की वजह का जवाब भी जरूरी
सरकार की आर्थिक सहायता संकट की घड़ी में परिवारों के लिए सहारा बन सकती है। तत्काल राहत, इलाज और रोजगार संबंधी सहायता भी महत्वपूर्ण है। लेकिन हीरापुर की त्रासदी का सबसे अहम हिस्सा जांच है।
चार परिवारों ने अपने बेटे खो दिए हैं। इसलिए जांच केवल औपचारिकता नहीं होनी चाहिए। बिजली का करंट पंडाल तक किन परिस्थितियों में पहुंचा, विद्युत व्यवस्था किसने लगाई थी, सुरक्षा मानकों का पालन हुआ या नहीं, घटना से पहले कोई तकनीकी चेतावनी थी या नहीं—इन तमाम बिंदुओं की तथ्यात्मक जांच जरूरी है।
किसी पर आरोप लगाने से पहले जांच पूरी होनी चाहिए, लेकिन जांच के नाम पर सवाल दबने भी नहीं चाहिए।
हीरापुर आज शोक में है। चार घरों के चिराग बुझ चुके हैं। अब प्रशासन और जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी है कि हादसे की वास्तविक वजह सामने आए, जिम्मेदारी यदि किसी स्तर पर तय होती है तो नियमानुसार कार्रवाई हो और भविष्य में किसी दूसरे गांव में ऐसा दर्दनाक हादसा दोबारा न हो।
गणेश उत्सव की खुशियों के बीच आई यह त्रासदी एक कड़ा सबक छोड़ गई है—धार्मिक आयोजन आस्था का विषय हैं, लेकिन सुरक्षा में किसी भी स्तर की लापरवाही की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।
पर्दाफाश न्यूज़ का सवाल सीधा है: चार जिंदगियां चली गईं—अब जांच बताएगी कि आखिर वह करंट पंडाल तक पहुंचा कैसे?















