“मुठभेड़ के बाद इमाम नाजिम और उसका साला शावेज गिरफ्तार, दोनों के पैर में लगी गोली; पुलिस के मुताबिक CCTV, मोबाइल लोकेशन और बरामद सामान ने खोली वारदात की परतें”
पर्दाफाश न्यूज़ | मुजफ्फरनगर
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में करीब 20 वर्षीय LLB छात्र रोहन राठी की हत्या ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुरकाजी थाना क्षेत्र के हरेटी गांव के पास सड़क किनारे मिले छात्र के शव की जांच आगे बढ़ी तो पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों—मस्जिद के इमाम नाजिम और उसके साले शावेज—को गिरफ्तार करने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार दोनों की गिरफ्तारी मुठभेड़ के दौरान हुई, जिसमें उनके पैर में गोली लगी।
पुलिस का दावा है कि पूछताछ में दोनों आरोपियों ने वारदात से जुड़ी घटनाओं के बारे में जानकारी दी है। हालांकि, इस मामले में सामने आई कहानी अभी पुलिस जांच और आरोपियों से पूछताछ पर आधारित है और अदालत में आरोपों का परीक्षण होना बाकी है।
लेकिन जांच की अब तक की कड़ियां जिस तस्वीर की ओर इशारा कर रही हैं, वह बेहद गंभीर है—एक छात्र रात में बाइक से अपने घर लौट रहा था, रास्ते में एक घटना हुई, फिर कथित तौर पर उसे पहचान लिए जाने के डर ने मामले को हत्या तक पहुंचा दिया।
रात के अंधेरे में सड़क किनारे मिला था LLB छात्र का शव
पुलिस के मुताबिक 24 सितंबर को पुरकाजी थाना क्षेत्र के हरेटी गांव के पास करीब 20 वर्षीय रोहन राठी का शव मिला था। बताया गया कि रोहन रात में अपने एक दोस्त के यहां से बाइक पर घर लौट रहा था।
परिवार के लिए यह सामान्य रात अचानक भयावह खबर में बदल गई।
जांच के बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण गला दबाने यानी स्मूथरिंग से जुड़ा होने की बात सामने आई। इसके बाद पुलिस ने मामले को महज सड़क हादसा मानकर छोड़ने के बजाय हत्या के एंगल से जांच आगे बढ़ाई।
यहीं से जांच ने नया मोड़ लिया।
पुलिस ने मृतक की गतिविधियों, घटनास्थल के आसपास की गतिविधियों और उस रात वहां मौजूद संदिग्ध लोगों की जानकारी जुटानी शुरू की। तकनीकी साक्ष्यों को खंगाला गया और CCTV फुटेज की जांच की गई।
पुलिसिया जांच में सामने आया इमाम नाजिम का नाम
पुलिस के अनुसार जांच के दौरान पता चला कि घटना वाली रात नाजिम अपनी ससुराल जहीरपुर गांव जा रहा था।
बताया गया कि नाजिम की कार हरेटी-जहीरपुर मार्ग से गुजर रही थी। इसी दौरान सड़क के पास रोहन मौजूद था।
पुलिस के मुताबिक नाजिम ने रोहन को बदमाश समझ लिया और कथित तौर पर अपनी कार से उसे टक्कर मार दी।
यहीं से इस मामले की कहानी का वह हिस्सा शुरू होता है, जिसे पुलिस हत्या की मुख्य कड़ी मान रही है।
पुलिस का दावा है कि टक्कर के बाद नाजिम वहां से अपने साले शावेज के पास चला गया। कुछ समय बाद दोनों उसी रास्ते पर वापस लौटे। वहां कथित तौर पर रोहन घायल अवस्था में सड़क पर पड़ा मिला।
अगर पुलिस के दावे को जांच की मौजूदा कड़ी के तौर पर देखा जाए तो इसके बाद घटना ने बेहद गंभीर रूप ले लिया।
“पहचान लेगा” का डर बना हत्या की वजह?
पुलिस के मुताबिक नाजिम को आशंका हुई कि रोहन उसे पहचान सकता है और घटना की जानकारी पुलिस को दे सकता है।
पुलिस का दावा है कि इसी डर के कारण नाजिम और शावेज ने घायल रोहन का मुंह दबा दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।
यानी जांच के मुताबिक जिस घटना की शुरुआत कथित तौर पर एक टक्कर से हुई, वह बाद में एक छात्र की मौत तक पहुंच गई।
यह पुलिस की जांच का सबसे गंभीर हिस्सा है।
एक तरफ एक युवा छात्र था, जो रात में अपने घर लौट रहा था। दूसरी तरफ पुलिस के अनुसार ऐसे लोग थे जिन्हें आशंका थी कि घटना का सच सामने आ सकता है। इसी कथित डर ने स्थिति को और भयावह बना दिया।
हालांकि, यह पूरा घटनाक्रम फिलहाल पुलिस द्वारा पेश की गई जांच की कहानी है। अंतिम सत्य का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर होगा।
शव को नाली के पास ठिकाने लगाने का आरोप
पुलिस के अनुसार हत्या के बाद आरोपियों ने रोहन के शव को नाली और उसके आसपास ठिकाने लगाने की कोशिश की।
इसके बाद कथित तौर पर रोहन की मोटरसाइकिल, मोबाइल फोन और घड़ी अपने साथ ले जाने की बात सामने आई है।
पुलिस का दावा है कि मृतक की मोटरसाइकिल को बाद में हरिद्वार जिले के मंगलौर क्षेत्र में एक मस्जिद के पास छिपाकर रखा गया था।
यही बरामदगी अब पुलिस जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य मानी जा रही है।
सवाल यह भी है कि हत्या के बाद मृतक की चीजें क्यों ले जाई गईं और उन्हें कहां-कहां ले जाया गया? पुलिस इन सभी पहलुओं की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
CCTV और मोबाइल लोकेशन ने जांच को दी दिशा
हत्या के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी कि घटना के पीछे कौन है और रोहन की मौत किन परिस्थितियों में हुई।
पुलिस के मुताबिक इस दिशा में CCTV फुटेज, मोबाइल टावर लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की मदद ली गई।
जांच में कथित तौर पर आरोपियों की गतिविधियां CCTV में सामने आईं। इसके अलावा पुलिस के अनुसार मृतक और संदिग्ध आरोपियों की लोकेशन भी तकनीकी जांच के दौरान एक स्थान पर मिलने की बात सामने आई।
ऐसे मामलों में तकनीकी साक्ष्य जांच की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हालांकि, इन साक्ष्यों की वैधानिकता और अंतिम evidentiary value का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया में होगा।
फिर आई मुठभेड़ की कहानी—दोनों के पैर में गोली
पुलिस के मुताबिक आरोपियों की गिरफ्तारी भी सामान्य तरीके से नहीं हुई।
एसएसपी संजय कुमार वर्मा के अनुसार पुलिस टीम संदिग्ध बाइक सवारों की चेकिंग कर रही थी। पुलिस का दावा है कि दोनों संदिग्धों ने रुकने के बजाय पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी।
इसके बाद पुलिस की जवाबी कार्रवाई में दोनों के पैर में गोली लगने की बात कही गई है।
घायल होने के बाद दोनों को गिरफ्तार कर इलाज कराया गया।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से रोहन की मोटरसाइकिल, मोबाइल फोन और घड़ी, एक कार, दो तमंचे और कारतूस बरामद करने का दावा किया है।
अब इन बरामद वस्तुओं की फोरेंसिक जांच और अन्य साक्ष्यों से मिलान भी मामले में महत्वपूर्ण हो सकता है।
इमाम नाजिम कौन, शावेज क्या करता है?
पुलिस के अनुसार नाजिम लक्सर, हरिद्वार का निवासी है और एक मस्जिद में नमाज कराने का काम करता है।
उसका साला शावेज देवबंद क्षेत्र के जहीरपुर गांव का रहने वाला है और पढ़ाई कर रहा है।
पुलिस ने यह भी बताया है कि फिलहाल दोनों का कोई पूर्व आपराधिक इतिहास सामने नहीं आया है।
यही तथ्य इस मामले को जांच के नजरिए से और महत्वपूर्ण बनाता है। पुलिस को अब यह भी देखना होगा कि दोनों आरोपियों की आपसी भूमिका क्या थी, घटनास्थल पर किसकी क्या मौजूदगी थी और हत्या के आरोप को पुष्ट करने वाले साक्ष्य कितने मजबूत हैं।
अब असली परीक्षा जांच की—सवाल सिर्फ गिरफ्तारी का नहीं, साक्ष्यों का है
रोहन राठी की मौत ने कई सवाल छोड़े हैं।
क्या वास्तव में सड़क पर हुई कथित टक्कर के बाद उसे पहचान लिए जाने के डर से मारा गया?
क्या CCTV फुटेज आरोपियों की मौजूदगी और गतिविधियों की पुष्टि करता है?
क्या मोबाइल लोकेशन घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ती है?
क्या बरामद बाइक, मोबाइल और घड़ी वही हैं जो रोहन की थीं?
और सबसे महत्वपूर्ण—क्या फोरेंसिक तथा अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य पुलिस की कहानी की स्वतंत्र पुष्टि करते हैं?
इन सवालों के जवाब जांच के अगले चरण में सामने आएंगे।
“पर्दाफाश न्यूज़” का सवाल: एक परिवार का युवा सदस्य चला गया, अब सच पूरी तरह सामने आना चाहिए
रोहन राठी सिर्फ एक हत्या के केस की फाइल का नाम नहीं है। वह एक युवा छात्र था, जो रात में अपने दोस्त के यहां से बाइक से घर लौट रहा था। कुछ घंटों के भीतर उसका परिवार उस खबर के सामने खड़ा था, जिसे कोई भी परिवार सुनना नहीं चाहता।
पुलिस ने दो गिरफ्तारियां की हैं। बरामदगी का दावा किया है। मुठभेड़ की जानकारी दी है। तकनीकी साक्ष्यों की बात कही है।
लेकिन अब जिम्मेदारी सिर्फ गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
जांच में हर कड़ी की वैज्ञानिक और कानूनी तरीके से पड़ताल जरूरी है।
CCTV फुटेज हो, मोबाइल लोकेशन हो, पोस्टमार्टम रिपोर्ट हो, बरामदगी हो या मुठभेड़ की परिस्थितियां—हर साक्ष्य की जांच पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए, ताकि अदालत के सामने तथ्य मजबूती से रखे जा सकें।
क्योंकि हत्या के किसी भी मामले में सिर्फ कहानी काफी नहीं होती।
कहानी को साक्ष्यों में बदलना पड़ता है।
और रोहन राठी हत्याकांड में अब पूरे मामले की सबसे बड़ी परीक्षा यही है—क्या पुलिस की बताई कहानी हर वैज्ञानिक और न्यायिक कसौटी पर खरी उतरती है?
फिलहाल दो आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं, जांच जारी है और अंतिम दोषसिद्धि का फैसला अदालत के अधिकार क्षेत्र में है।















