नई दिल्ली। करूर भगदड़ मामले की जांच के बीच सुप्रीम कोर्ट ने द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) की उस याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करने पर सहमति जताई है, जिसमें तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय, मंत्री आधव अर्जुन और अन्य आरोपियों को मामले पर सार्वजनिक बयान देने तथा जांच के दौरान पीड़ित परिवारों से सीधे संपर्क करने से रोकने की मांग की गई है। इस मामले की जांच फिलहाल CBI कर रही है।
DMK के संगठन सचिव आर.एस. भारती की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी ने जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस शील नागू की पीठ के समक्ष मामले की तत्काल सुनवाई का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विजय 10 जुलाई को करूर जाकर मृतकों और घायलों के परिजनों से मिलने वाले हैं, जिससे CBI जांच के महत्वपूर्ण गवाह प्रभावित हो सकते हैं।
गवाहों को प्रभावित करने की आशंका
अहमदी ने अदालत में कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही इस मामले में CBI जांच और निगरानी व्यवस्था का आदेश दे चुका है, लेकिन अब जांच के दौरान गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने दावा किया कि करूर भगदड़ मामले के कुछ आरोपी अब राज्य सरकार में मंत्री हैं और वे पीड़ित परिवारों से संपर्क कर रहे हैं। उनके अनुसार, इस संबंध में रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री अदालत के सामने पेश की जा सकती है।
अदालत ने सुनवाई के लिए दिखाई सहमति
सुनवाई के दौरान जस्टिस अमानुल्लाह ने पूछा कि अदालत इस संबंध में किस प्रकार का आदेश पारित कर सकती है। इसके बाद पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करने पर सहमति दे दी।
पीड़ितों को राहत पर नहीं, मुलाकात के तरीके पर आपत्ति
याचिका में स्पष्ट किया गया है कि DMK को राज्य सरकार द्वारा पीड़ित परिवारों को अनुग्रह राशि, सरकारी सहायता या कल्याणकारी योजनाओं का लाभ देने पर कोई आपत्ति नहीं है।
हालांकि, पार्टी का कहना है कि जिन परिवारों से मुख्यमंत्री और अन्य आरोपी नेता मिलने वाले हैं, वे CBI जांच के महत्वपूर्ण गवाह भी हैं। ऐसे में राजनीतिक कार्यपालिका या जांच से जुड़े व्यक्तियों की सीधी बातचीत जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर सकती है।
पहले भी दिया जा चुका है मुआवजा
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि मुख्यमंत्री विजय ने अक्टूबर 2025 में, जब मामले की आपराधिक जांच जारी थी, तब मृतकों के परिजनों को 20-20 लाख रुपये और घायलों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की थी।
DMK का तर्क है कि अब सरकारी लाभों की घोषणा और आरोपियों के सार्वजनिक बयानों के बीच गवाहों पर प्रभाव पड़ने की आशंका को देखते हुए न्यायिक सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है।
41 लोगों की गई थी जान
गौरतलब है कि 27 सितंबर 2025 को करूर में तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) की जनसंपर्क रैली के दौरान भगदड़ मच गई थी। इस हादसे में 41 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 140 से अधिक लोग घायल हुए थे। मामले की जांच वर्तमान में CBI कर रही है और सुप्रीम कोर्ट इसकी निगरानी से जुड़े पहलुओं पर भी नजर बनाए हुए है।














